Abhijeet Deepke: कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके शनिवार को मध्य प्रदेश के बालाघाट पहुंचे। बालाघाट में संक्रमण की वजह से बच्चों की मौत की खबर के बाद वह वहां पहुंचे थे। इस दौरान कुछ यूट्यूब पत्रकारों ने उनकी कार को घेर लिया और उनसे सवाल किया कि क्या वह लाशों पर राजनीति करने आए हैं। इस पर अभिजीत दीपके ने व्यंग्य करते हुए कहा कि वह मध्य प्रदेश के राजभवन जाएंगे और मुख्यमंत्री के तौर पर अपना इस्तीफा सौंपेंगे। इसके बाद उन्होंने मजाकिया अंदाज में इस्तीफे का एक पत्र भी साझा किया।
Abhijeet Deepke: “मुख्यमंत्री के ऑफिस से अपना इस्तीफा देता हूं”
अभिजीत दीपके ने साझा किए गए पत्र में लिखा कि वह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के ऑफिस से अपना इस्तीफा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि बालाघाट में 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत के बाद उनकी अंतरात्मा उन्हें इस पद पर बने रहने की अनुमति नहीं दे रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री के तौर पर बच्चों को समय पर जरूरी चिकित्सा सुविधा और मदद न मिल पाने की जिम्मेदारी लेने की बात कही। उनके मुताबिक, इनमें से कई बच्चों की जान शायद बचाई जा सकती थी और वह इस नाकामी की जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों की मौत के बाद दिखाई गई असंवेदनशीलता भी उतनी ही शर्मनाक है।
पत्र में अभिजीत दीपके ने मुआवजे को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि शुरुआत में हर बच्चे के लिए सिर्फ ₹2 लाख मुआवजे का ऐलान किया गया था, जिसे आदिवासी समुदाय के विरोध के बाद बढ़ाकर ₹4 लाख किया गया। उन्होंने सवाल किया कि अगर ये बच्चे मंत्रियों या विधायकों के होते तो क्या ₹4 लाख का मुआवजा पर्याप्त माना जाता? उनके मुताबिक, इस सवाल का जवाब यह दिखाता है कि आदिवासी बच्चों की जान को कितनी कम कीमत दी गई है।
हेल्थ व्यवस्था और जवाबदेही पर उठाए सवाल
अभिजीत दीपके ने आगे कहा कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद हेल्थ अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराने में भी नाकामी रही। उन्होंने कहा कि मासूम बच्चों की मौत के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। उनके अनुसार, सरकार की नाकामियां सिर्फ हेल्थकेयर तक सीमित नहीं हैं।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि हर घर नल योजना के तहत घरों तक नल का पानी पहुंचाने की सफलता का ऐलान किया गया है, लेकिन बालाघाट के कुछ हिस्सों में आदिवासी परिवार अब भी पीने के पानी के लिए नदी पर निर्भर हैं। इससे उनकी सेहत पर खतरा बना हुआ है।
I hereby resign as the Chief Minister of MP with immediate effect.
I thank Hon’ble PM @narendramodi ji for giving me the opportunity to serve the people of MP, an opportunity in which I have clearly failed.@GovernorMP pic.twitter.com/BVhfJDIf5n
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) September 13, 2026
Abhijeet Deepke: स्कूलों की स्थिति पर भी जताई चिंता
अभिजीत दीपके ने शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि कई गांवों में स्कूलों की हालत जानवरों के शेल्टर से भी खराब है। उन्होंने बालाघाट के एक गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां आंगनवाड़ी से लेकर कक्षा 5 तक के करीब 75 बच्चे एक ही क्लासरूम में पढ़ते हैं। उनके मुताबिक, स्थानीय आदिवासी समुदाय की ओर से बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद उन्हें बेहतर स्कूल भवन उपलब्ध कराने में नाकामी रही है।
आदिवासी परिवारों को लेकर सरकार पर तंज
अभिजीत दीपके ने तंज करते हुए कहा कि आज उनका सिर शर्म से झुक जाता है कि 2003 से मध्य प्रदेश में बीजेपी सरकारों के करीब 21 साल पूरे होने के बाद भी कई आदिवासी परिवारों को साफ पीने का पानी, उचित हेल्थकेयर और अच्छी शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की गारंटी नहीं मिल पाई है।
Abhijeet Deepke: आंकड़ों के जरिए सरकार की नाकामियां गिनाईं
अभिजीत दीपके ने कुछ आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि ये आंकड़े भी आदिवासी समुदायों के प्रति उनकी सरकार की नाकामियों को सामने रखते हैं।
- सरकार के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में 55,795 आदिवासी घरों में बिजली नहीं है।
- NCRB के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ दर्ज अपराधों में से 32% मामले मध्य प्रदेश में दर्ज किए गए।
- राज्य में 5.41 लाख से ज्यादा बच्चे यानी 8.60% बच्चे कम वजन वाले थे।
- सरकार की ओर से विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 1.36 लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषित के रूप में पंजीकृत थे। इनमें आदिवासी समुदाय के बच्चे भी बुरी तरह प्रभावित थे।
“मुझे पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं”
अभिजीत दीपके ने आगे कहा कि उन्होंने केवल बालाघाट ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के आदिवासी समुदाय को निराश किया है। उन्होंने कहा कि इतने सारे मासूम बच्चों को खोने के बाद उन्हें नहीं लगता कि उनके पास मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार है। इसी वजह से उन्होंने तत्काल प्रभाव से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की बात कही।अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें मध्य प्रदेश के लोगों की सेवा करने का मौका देने के लिए वह प्रधानमंत्री के आभारी हैं।







