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इन 49 सीटों से बनेगा और बिगड़ेगा खेल, क्यों खास हैं ये सीटें?

Uttar Pradesh Assembly Elections 2027: इन 49 सीटों से बनेगा और बिगड़ेगा खेल, क्यों खास हैं ये सीटें?
Uttar Pradesh Assembly Elections 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 के चुनावी संग्राम की तैयारियां तेज हो गई हैं।राजनीतिक पार्टियों ने सेनाएं सजानी शुरू कर दी हैं।इस चुनाव में भाजपा और सपा जैसी प्रमुख पार्टियों का विशेष फोकस उन सीटों पर है जिन पर पिछली बार यानी 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत-हार का अंतर बहुत ही कम रहा।पिछली बार 15 सीटों पर मात्र एक हजार वोटों के अंतर से हार-जीत हुई थी।इतने कम अंतर से भाजपा जहां छह सीटें हार गई, वहीं सपा को भी सात सीटों पर झटका लगा। सपा गठबंधन में शामिल राष्ट्रीय लोकदल को दो सीटें सिर्फ 258 और 315 वोटों के अंतर से गंवानी पड़ी। भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी का प्रत्याशी 719 मतों से चुनाव जीतने में सफल रहा।दिलचस्प यह है कि 11 सीटें ऐसी थीं, जहां हार-जीत का अंतर 500 वोटों से भी कम था।आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टियों की कोशिश है कि इन निर्णायक सीटों पर मेहनत कर चुनावी हवा अपने पक्ष में मोड़ दी जाए। 

एक-एक वोट का बड़ा महत्व

राजनीतिक पार्टियां जानती हैं कि चुनाव में एक-एक वोट का बहुत महत्व होता है, खासकर तब जब मुकाबला कांटे का हो। उत्तर प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2022 में ऐसा ही देखने को मिला था।राज्य की 29 सीटें ऐसी थी, जिनमें अंतिम दौर की मगणना पूरी होने तक उम्मीदवारों की सांसें अटकी रही।मतगणना के दौरान कभी कोई उम्मीदवार मामूली वोटों से आगे हुआ, तो कभी कोई पीछे।अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया कि कौन जीत पाएगा और कौन नहीं? चुनाव नतीजों में दिलचस्पी ले रहे लोगों में क्रिकेट के 20-20 मैच जैसा रोमांच बना रहा। 29 सीटों पर हार-जीत का अंतर 2,000 से भी कम रहा।इनमें से 19 सीटें भाजपा और 9 सीटें समाजवादी पार्टी ने जीती थी। जाहिर है कि भाजपा सपा जीती हुई सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखने, तो हारी हुई सीटों को जीतने की कोशिश करेंगी।ऐसे में मुकाबला रोचक होने के आसार हैं। 

Uttar Pradesh Assembly Elections 2027: कैसे बनेंगे, बिगड़ेंगे समीकरण?

2027 के चुनाव में जो नए राजनीतिक समीकरण जन्म लेने जा रहे हैं, वे भाजपा के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं।भाजपा के लिए एक बड़ी बात यह है कि इस बार उसके खेमे एक मजबूत सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल भी खड़ा रहेगा। पिछला चुनाव राष्ट्रीय लोकदल ने सपा के साथ मिलकर लड़ा था।दल को दो सीटें सिर्फ 258 और 315 वोटों के अंतर से गंवानी पड़ी थी।पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस दल का परंपरागत तौर पर मजबूत जनाधार है।दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी के खिलाफ सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पिछले दिनों जो तंज किये उससे भी सपा के प्रति पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता में भारी नाराजगी दिखाई दे रही है। चुनाव के दौरान यदि सपा और कांग्रेस गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर कोई मतभेद पैदा होते हैं, तो भाजपा को इसका स्वाभाविक फायदा मिल सकता है। इस बार तो सुहैलदेव भारतीय समाज पार्टी भी सपा गठबंधन का हिस्सा नहीं है। 2022 के विधानसभा चुनाव में इस पार्टी को 6 सीटें मिली थी, जबकि सपा को भी पूर्वांचल के आधा दर्जन जिलों में इस पार्टी का फायदा मिला था।अब तो सुुहैलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा ही खोले हुए हैं। 

 Uttar Pradesh Assembly Elections 2027: सबक सिखाएंगे सीख

भाजपा और सपा गठबंधन की कोशिश 2022 के कटु अनुभवों से सबक लेने की दिखाई देती है। देखना है कि इसमें वे कहां तक सफल हो पाते हैं। पिछले चुनाव में 49 सीटें ऐसी रहीं जहां हार-जीत का अंतर 5000 मतों से कम रहा।
-समाजवादी पार्टी को 25 सीटों पर 5000 से कम वोटों से पराजय मिली, जबकि उसके सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल को तीन सीटों पर नजदीकी अंतर से हार का सामना करना पड़ा।

-भारतीय जनता पार्टी को 18 सीटों पर 5000 से कम वोटों से हार मिली, जबकि उसकी सहयोगी निषाद पार्टी को दो तथा अपना दल सोनेलाल को एक सीट पर बहुत कम वोटों से पराजय का सामना करना पड़ा।

-14 सीटें ऐसी थीं जिन पर जीत और हार का अंतर 1000 से 2000 वोटों के बीच का था। इनमें से 7 सीटें बीजेपी ने, 4 सीटें सपा ने, 2 सीटें अपना दल (सोनेलाल) ने जीतीं और एक सीट पर कांग्रेस के खाते में गई।
-उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में कुल 11 सीटें ऐसी थीं, जहां हार-जीत का अंतर 500 वोटों से कम था। इनमें से 7 सीटें ऐसी थीं जहां जीत-हार का अंतर 100 से 400 वोटों के बीच रहा।
 

Uttar Pradesh Assembly Elections 2027: 100 से 500 वोटों के अंतर वाली प्रमुख सीटें:

 सीट         वोटों का अंतर        जीतने वाली पार्टी

धामपुर :        203                       भाजपा
कुर्सी :             217                      भाजपा 
चांदपुर :         234                       सपा 
नहटौर :           258                      भाजपा 
बिलासपुर :    307                      भाजपा 
नकुड़ :            315                       भाजपा 
कटरा :            357                      भाजपा 
रामनगर:         261                       सपा 
इसौली:           269                      सपा 
बड़ौत:             315                      भाजपा 
दिबियापुर:    473                       सपा 
 

 Uttar Pradesh Assembly Elections 2027: यहां होगा रोमांचक मुकाबला 

 पिछली बार जीत-हार के बीच सबसे कम अंतर बिजनौर जिले में देखने को मिला था।जिले की धामपुर सीट पर भाजपा प्रत्याशी अशोक कुमार राणा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सपा उम्मीदवार नईम उल हसन को मात्र 203 मतों से हराया। इसी जिले की चांदपुर सीट पर सपा के स्वामी ओमवेश ने जबर्दस्त संघर्ष के बाद भाजपा के कमलेश सैनी को 234 मतों से पराजित किया।बिजनौर जिले की एक अन्य नहटौर सीट पर रोमांचक मुकाबला हुआ और आखिरकार भाजपा के ओमकुमार ने राष्ट्रीय लोक दल के मुंशीराम को 258 मतों से हरा दिया।
 
बाराबंकी जिले की कुर्सी विधानसभा सीट पर हुए कांटे के मुकाबले में भाजपा प्रत्याशी साकेंद्र वर्मा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सपा के राकेश वर्मा को महज 217 मतों से पराजित किया।इसी जिले की रामनगर सीट पर सपा के फरीद किदवई ने बीजेपी के शदकुमार अवस्थी को 261 मतों से पराजित किया।सुल्तानपुर जिले की इसौली सीट पर हुए कांटे के मुकाबले में सपा के ताहीर खान ने भाजपा के ओम प्रकाश पांडे को 269 मतों से हराया। रामपुर जिले की बिलासपुर विधानसभा सीट पर हुए दिलचस्प मुकाबले में भाजपा के बलदेव सिंह औलाख ने सपा के अमरजीत सिंह को 307 मतों से शिकस्त दी।
 
बागपत जिले की बड़ौत सीट पर हुए कड़े संघर्ष में भाजपा के कृष्णपाल मलिक ने रालोद के उम्मीदवार जयवीर को 315 मतों से हराया। सहारनपुर जिले की नकुड़ विधानसभा सीट पर भाजपा के मुकेश चौधरी ने सपा के धरम सिंह सैनी को 315 मतों पटकनी दे डाली। चुनाव से पहले भाजपा छोड़ सपा में गए थे।वे योगी सरकार में मंत्री थे।गोंडा जिले की कटरा सीट पर भाजपा के वीर विक्रम सिंह ने सपा के राजेश यादव को 357 मतों से पराजित किया।औरैया जिले की दिबियापुर सीट पर सपा के प्रदीप कुमार यादव ने भाजपा के लखन सिंह राजपूत को 473 मतों से हराया।
 

Uttar Pradesh Assembly Elections 2027: ये सीटें होंगी खास

पिछली बार की कुछ सीटें इस बार भी खास हैं। जौनपुर जिले की शाहगंज सीट पर निषाद पार्टी के रमेश निर्बल ने सपा के विधायक और कद्दावर नेता शैलेंद्र यादव ललाई को 719 मतों से हराया, जबकि सिद्धार्थनगर जिले की डुमरियागंज सीट पर सपा की सैयदा खातून ने बीजेपी के राघवेंद्र प्रताप सिंह को 771 मतों से पराजित किया। मुरादाबाद जिले की मुरादाबाद नगर सीट से बीजेपी के रितेश कुमार गुप्ता ने सपा के युसूफ अंसारी को 782 वोटों से हराया, जबकि फिरोजाबाद जिले की जसराणा सीट पर हुई जबरदस्त टक्कर में जीत सपा के सचिन यादव के खाते में गई।उन्होंने बीजेपी के मानवेंद्र सिंह को 836 मतों से हराया।
 

Uttar Pradesh Assembly Elections 2027: दो हजार से कम का अंतर

औराई, बदलापुर, बड़ौत, बस्ती सदर, बिजनौर, बिलासपुर, बिसौली, दिबियापुर, डुमरियागंज, गाजीपुर , इटवा, जसराना, छिबरामऊ, मानिकपुर, मड़ियाहूं, मुरादाबाद नगर, नहटौर, फरेंदा, रामनगर, सलेन, शाहगंज, श्रावस्ती, सीतापुर, सुलतानपुर में भी जीत का अंतर दो हजार से कम रहा।

 Uttar Pradesh Assembly Elections 2027: सपा की चुनौती

सपा को अलीगंज, औराई, बहराइच, छिबरामऊ, इटावा, फरीदपुर, जलालाबाद, बिंदकी, जलेसर, कटरा, मधुबन, मानिकपुर, मड़ियाहूं, मोहम्मदी, मुरादाबाद नगर, नकुड़, फूलपुर, सलोन, शाहगंज, श्रावस्ती, सीतापुर, सुल्तानपुर और तिर्वा सीटों पर 5000 से कम अंतर से हार का सामना करना पड़ा। इनमें से छह सीटों पर हार का अंतर 1000 से भी कम था। इस बार ये सीटें सपा के लिए चुनौती होंगी कि वह कैसे इन्हें जीत पाती है।

 

Uttar Pradesh Assembly Elections 2027: भाजपा की चुनौती

भाजपा को 18 सीटों पर 5000 से कम अंतर से हार का सामना करना पड़ा। भाजपा को बस्ती सदर, भदोही, बिसौली, दिबियापुर, डुमरियागंज, गाजीपुर, इटवा, जसराना, किठौर, मेजा, पटियाली, फरेंदा, रानीगंज, सरेनी और जैदपुर सीटों पर 5000 से कम वोटों से पराजय मिली। इनमें से छह सीटें ऐसी हैं जहां पर भाजपा को 1000 से भी कम मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा।इस बार भाजपा के सामने इन सीटों को जीतने की चुनौती है।

भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी को हंडिया सीट से सपा के हाथों 3543 मतों से और कालपी सीट से सपा के ही खिलाफ 2816 वोटों पराजय का सामना करना पड़ा।भाजपा के एक अन्य सहयोगी दल अपना दल (सोनेलाल) के प्रत्याशी को बछरावां सीट से सपा उम्मीदवार ने 2812 मतों से पराजित किया।

 

Uttar Pradesh Assembly Elections 2027: क्या रहा पिछला परिणाम?

 उत्तर प्रदेश की 403 सीटों के लिए विधानसभा चुनाव में बीजेपी, अपना दल (एस) और निषाद पार्टी ने मिलकर 273 सीटों पर कब्जा जमाया वहीं समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) और सुहैलदेव भारतीय समाज पार्टी के गठबंधन के खाते में 125 सीटें मिली। अकेले भाजपा ने 255 सीटों पर, जबकि समाजवादी पार्टी ने 111 सीटों पर जीत दर्ज की।
 

Uttar Pradesh Assembly Elections 2027:  क्या है भाजपा की रणनीति?

भाजपा अवध, कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही है। ऐसा इसलिए कि 2024 के लोकसभा चुनावों में यहां भाजपा को नुकसान हुआ था और इन क्षेत्रों में 134 विधानसभा सीटें आती हैं। इसके साथ ही भाजपा मैनपुरी, रायबरेली, आज़मगढ़ आदि  उन जगहों की 115 विधानसभा सीटों पर विशेष अभियान चला रही है, जो फिलहाल सपा और कांग्रेस के मजबूत गढ़ माने जाते हैं।पार्टी ने  सपा के पीडीए की काट के लिए दलित और ओबीसी चेहरों को संगठन में अधिक से अधिक हिस्सेदारी दी है।पूर्वांचल में कुर्मी, पश्चिम में जाट-गुर्जर तथा अवध में ब्राह्मण-पासी समीकरणों पर भाजपा ने फोकस किया है। भाजपा की रणनीति में सबसे अहम बात यह है कि पार्टी ने विपक्ष के भ्रामक प्रचार का तुरंत और आक्रामक जवाब देने के लिए क्विक रिस्पांस टीम (QRT) का गठन किया है। इस टीम के सदस्य जनता को बताएंगे कि  2017 से पहले कैसे ‘माफिया राज’ चलता था और आज कैसे सुशासन चल रहा है। आज कैसे जनता निडर होकर जी रही है।कैसे महिलाएं रात के वक्त बिना खौफ के ड्यूटी से लौट रही हैं। भाजपा कार्यकर्ता योगी सरकार के विकास कार्यों को जनता के बीच लेकर जाएंगे।   
 
Uttar Pradesh Assembly Elections 2027: क्या है सपा की रणनीति?
सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपने पारंपरिक मजबूत गढ़ों जैसे मैनपुरी, फिरोजाबाद, आज़मगढ़, गाजीपुर आदि के साथ-साथ महिला और युवा मतदाताओं को आकर्षित करने पर जोर दे रही है।पार्टी की रणनीति है कि राज्य का कोई एक घोषणापत्र जारी करने के बजाय सभी  75 जिलों के लिए अलग-अलग स्थानीय घोषणापत्र तैयार किये जाएं।सपा PDA ( पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के बूते चुनाव में उतरना चाहती है। 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान सपा को इसका फायदा मिला था।