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राजस्थान के शहरों में खिला बीजेपी का कमल, कांग्रेस ने भी घटाया वोटों का अंतर

Rajasthan Urban Polls:

Rajasthan Urban Polls: राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों में बीजेपी ने मजबूत प्रदर्शन किया है। प्रदेश के 10 बड़े नगर निगमों में से आठ में बीजेपी बोर्ड बनाने की स्थिति में है। शहरी इलाकों में बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक पर पकड़ बरकरार रहने से पार्टी को राहत मिली है। हालांकि, वार्ड और वोट शेयर के आंकड़े बताते हैं कि कांग्रेस भी बीजेपी से ज्यादा पीछे नहीं है। इन चुनावों को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि जंतर-मंतर पर युवाओं के प्रदर्शन के बाद यह राजस्थान का पहला बड़ा चुनाव था। 18 से 25 साल की उम्र के करीब 15 फीसदी मतदाता इसमें शामिल थे। इसके अलावा ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के तहत पहली बार पूरे राजस्थान की शहरी आबादी ने एक साथ मतदान किया।

Rajasthan Urban Polls: 309 शहरी निकायों में 1.44 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं ने डाला वोट-

राजस्थान में कुल 5 करोड़ 17 लाख से ज्यादा मतदाता हैं। इनमें 1 करोड़ 44 लाख से अधिक शहरी मतदाता हैं, जो राज्य के कुल मतदाताओं का करीब 27.84 फीसदी हैं। ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के तहत 309 शहरी निकायों में इन मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। बीजेपी के लिए शहरी वोट बैंक का यह प्रदर्शन इसलिए अहम है, क्योंकि पार्टी ने यह चुनाव मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में लड़ा था।

Rajasthan Urban Polls: भजनलाल शर्मा ने ‘काकाजी’ वाले बयान से साधा निशाना-

चुनाव में बीजेपी की बढ़त के बाद पार्टी कार्यालय में जीत का जश्न मनाया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए ‘काकाजी’ वाले बयान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता कहते थे कि ‘काका जी’ भी वन स्टेट, वन इलेक्शन नहीं करवा सकते, लेकिन अब इसे सफलतापूर्वक किसने करवाया? राजस्थान की राजनीति में नेताओं को लोकप्रिय संबोधनों से पुकारने की पुरानी परंपरा रही है। ऐसे में भजनलाल शर्मा का ‘काकाजी’ के रूप में उभरना उनके राजनीतिक कद के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आठ नगर निगमों में बीजेपी बोर्ड बनाने की स्थिति में-

प्रदेश के 10 नगर निगमों में से आठ में बीजेपी बोर्ड बनाने की स्थिति में है। जयपुर, कोटा, उदयपुर और भीलवाड़ा में बीजेपी को स्पष्ट बढ़त मिली है। अलवर में भी बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। पाली और भरतपुर में निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से बीजेपी बोर्ड बना सकती है। वहीं जोधपुर में मुकाबला बेहद करीबी है। यहां बीजेपी और कांग्रेस के पास 44-44 सीटें हैं। ऐसे में निर्दलीय पार्षद और आरएलपी का एक पार्षद निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

जोधपुर में गहलोत और शेखावत की प्रतिष्ठा दांव पर-

जोधपुर का मुकाबला पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के लिए भी अहम माना जा रहा है। दोनों नेताओं के लिए यह चुनाव संगठनात्मक क्षमता और राजनीतिक रणनीति की परीक्षा बन गया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निर्दलीय पार्षद किसका समर्थन करते हैं और किस पार्टी का बोर्ड बनता है।

बीजेपी ने 4,179 और कांग्रेस ने 3,613 वार्ड जीते-

Rajasthan Urban Polls:
[NDTV.com]
कुल 10,245 वार्डों के आंकड़ों में बीजेपी ने 4,179 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस 3,613 वार्ड जीतने में सफल रही। निर्दलीय और अन्य उम्मीदवारों ने 2,273 वार्डों में जीत हासिल की। इससे साफ है कि बीजेपी का प्रदर्शन मजबूत रहा, लेकिन चुनाव पूरी तरह एकतरफा नहीं रहा। बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत ने भी तस्वीर को प्रभावित किया।

बीजेपी-कांग्रेस के वोट शेयर का अंतर 1 फीसदी से भी कम-

वोट शेयर के आंकड़े बीजेपी के लिए एक चुनौती की ओर भी इशारा करते हैं। 309 स्थानीय निकायों में बीजेपी को करीब 37.35 लाख वोट मिले, जबकि कांग्रेस को लगभग 36.35 लाख वोट मिले। दोनों पार्टियों के बीच करीब 99,615 वोटों का अंतर रहा। वोट शेयर के लिहाज से दोनों दलों के बीच अंतर करीब 0.94 फीसदी है, यानी एक फीसदी से भी कम। 2023 के विधानसभा चुनाव में भी दोनों पार्टियों के बीच वोटों का अंतर 99,615 था, लेकिन तब वोट शेयर का अंतर करीब 2.16 फीसदी था।

ग्रामीण राजस्थान में होगी असली अग्निपरीक्षा-

शहरी निकाय चुनावों में बीजेपी के प्रदर्शन से पार्टी को राहत जरूर मिली है, लेकिन कांग्रेस के साथ घटता वोट शेयर अंतर बीजेपी के लिए चिंता का विषय भी है। निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी बड़ी संख्या में वोट हासिल किए हैं। आम आदमी पार्टी ने भी बारां जिले में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, जहां उसके 42 उम्मीदवार विजयी रहे। अब राजस्थान की करीब 70 फीसदी आबादी वाले ग्रामीण इलाकों पर नजर है। अगले चरण में पंचायत चुनाव होंगे, जहां दोनों प्रमुख दलों के लिए असली राजनीतिक परीक्षा होने वाली है

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