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‘माई के लाल हो तो बताओ कब लॉन्च करोगे…’, ओवैसी की रामेश्वर शर्मा को खुली चुनौती; UCC पर भी उठाए सवाल, जानिए पूरा मामला

BHOPAL TRENDING NEWS: भोपाल में UCC के खिलाफ सभा के दौरान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने BJP विधायक रामेश्वर शर्मा के पुराने ‘काजी कैंप पर मिसाइल’ वाले बयान को लेकर उन्हें खुली चुनौती दे दी। इसके साथ ही ओवैसी ने समान नागरिक संहिता को लेकर संविधान, धार्मिक स्वतंत्रता और आदिवासियों को दी जा रही छूट का मुद्दा उठाया। ऐसे में सवाल है कि भोपाल में अचानक UCC से लेकर ‘मिसाइल’ तक की सियासत क्यों गरमा गई?

सवाल-1: ओवैसी ने रामेश्वर शर्मा को क्या चुनौती दी?

भोपाल में UCC के विरोध में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा के पुराने बयान का जिक्र किया। ओवैसी ने मंच से कहा, “रामेश्वर शर्मा अगर तुम माई के लाल हो तो बोलो कब लॉन्च करोगे, मैं अकेला ठहरता हूं काजी कैंप में आकर।” ओवैसी ने आगे कहा कि वह डरने या सिर झुकाने वाले नहीं हैं। उनके इस बयान के बाद भोपाल की स्थानीय राजनीति में दोनों नेताओं के बीच जुबानी टकराव एक बार फिर चर्चा में आ गया।

BHOPAL TRENDING NEWS: सवाल-2: आखिर रामेश्वर शर्मा ने ऐसा क्या कहा था?

यह विवाद रामेश्वर शर्मा के 4 सितंबर के एक कार्यक्रम में दिए गए बयान से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने करोंद चौराहे से काजी कैंप पर मिसाइल गिराने की बात कही थी।बयान पर विवाद बढ़ने के बाद शर्मा ने सफाई दी थी कि उनका इशारा भोपाल के काजी कैंप की ओर नहीं, बल्कि इस्लामाबाद के काजी कैंप की ओर था। ओवैसी ने इसी सफाई और बयान को आधार बनाकर उन्हें सार्वजनिक मंच से चुनौती दी।

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सवाल-3: इस पूरे विवाद का UCC से क्या कनेक्शन है?

ओवैसी का भोपाल दौरा मुख्य रूप से समान नागरिक संहिता यानी UCC के विरोध से जुड़ा था। उन्होंने कहा कि विवाह, तलाक, विरासत और दूसरे व्यक्तिगत कानूनों में समान नियम लागू करने की कोशिश को धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत कानूनों के नजरिए से भी देखा जाना चाहिए। ओवैसी ने संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 29 का उल्लेख करते हुए तर्क दिया कि नागरिकों को समानता के साथ-साथ धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अधिकार भी हासिल हैं। यह उनके राजनीतिक भाषण में रखा गया संवैधानिक तर्क है; दूसरी ओर UCC के समर्थक समान नागरिक कानून को समानता और लैंगिक न्याय के नजरिए से देखते हैं।

BHOPAL TRENDING NEWS: सवाल-4: ओवैसी ने आदिवासियों का मुद्दा क्यों उठाया?

ओवैसी ने मध्य प्रदेश में UCC से अनुसूचित जनजातियों को बाहर रखे जाने पर सवाल उठाया। उनका तर्क था कि अगर आदिवासी समुदायों की अलग सामाजिक और पारंपरिक व्यवस्था को देखते हुए उन्हें छूट दी जा सकती है, तो मुस्लिम व्यक्तिगत कानून को अलग क्यों नहीं माना जा रहा? मध्य प्रदेश के UCC मॉडल में अनुसूचित जनजातियों को छूट दिए जाने का प्रावधान चर्चा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ओवैसी ने इसी अंतर को राजनीतिक और संवैधानिक सवाल के रूप में उठाया।

सवाल-5: UCC को लेकर अभी इतनी राजनीति क्यों बढ़ गई है?

इसकी बड़ी वजह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का हालिया बयान है। शाह ने कहा है कि 2029 से पहले भाजपा-एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में UCC लागू किया जाएगा। इस बयान के बाद UCC एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। यानी एक तरफ सरकार और भाजपा UCC को आगे बढ़ाने की दिशा में राज्यों के जरिए कदम बढ़ा रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष और कुछ राजनीतिक दल इसके स्वरूप, दायरे और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े सवाल उठा रहे हैं।

BHOPAL TRENDING NEWS: सवाल-6: UCC पर सबसे बड़ा संवैधानिक सवाल क्या है?

संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करने की बात कही गई है। वहीं विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और परिवार से जुड़े कई विषय समवर्ती सूची में आते हैं, जिस पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं। इसी वजह से अभी UCC का रास्ता केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक और कानूनी बहस का भी विषय है। उत्तराखंड के बाद गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में भी UCC को लेकर कानून/विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ी है, लेकिन राज्यों के मॉडल में कुछ अंतर भी हैं।

सवाल-7: अब आगे क्या?

भोपाल की सभा ने UCC की बहस को स्थानीय राजनीतिक टकराव से जोड़ दिया है। एक तरफ ओवैसी ने UCC के प्रावधानों और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए, तो दूसरी तरफ रामेश्वर शर्मा के पुराने बयान को लेकर उन्होंने सीधे भाजपा विधायक को चुनौती दी। अब बहस सिर्फ “UCC लागू होगा या नहीं” तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह भी है कि अलग-अलग राज्यों में इसका स्वरूप क्या होगा, किन समुदायों को छूट मिलेगी, व्यक्तिगत कानूनों पर इसका कितना प्रभाव पड़ेगा और इसे लेकर अदालतों तथा विभिन्न सामाजिक समूहों की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। भोपाल का यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि UCC की राष्ट्रीय राजनीति अब स्थानीय स्तर पर भी सीधे राजनीतिक टकराव का मुद्दा बनती दिखाई दे रही है।

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