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Rajasthan civic polls: भाजपा और कांंग्रेस दोनों को कड़ा संदेश, जनता बोली-सचेत हो जाइये…

Rajasthan civic polls: भाजपा और कांंग्रेस दोनों को कड़ा संदेश, जनता बोली-सचेत हो जाइये...
Rajasthan civic polls: राजस्थान के निकाय चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने जिस तरह 2,273 वार्डों में जीत हासिल की, उसे देखते हुए भाजपा और कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियों को सचेत हो जाना चाहिए।हालांकि भाजपा जश्न मना सकती है कि उसे 4,179 वार्डों में जीत और कई निगमों में स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ है।मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस 3,613 वॉर्ड जीतकर अपनी स्थिति मजबूत होने का तर्क दे सकती है, लेकिन जनता का साफ संदेश है कि वह विकल्पहीनता की स्थिति में ही राष्ट्रीय पार्टियों को वोट देने को विवश है।निकट भविष्य में जहां कहीं भी उसे विकल्प की संभावनाएं दिखेंगी, वह तत्काल उन पर मोहर लगा देगी। 
 

नेतृत्व के लिए मंथन का विषय

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि जनता उनके साथ है, लेकिन उन्हें यह अहसास हो जाना चाहिए कि खुद उनके गृह नगर भरतपुर की जनता उनके सुशासन को नकार चुकी है।भरतपुर के 65 वार्डों में से 36 पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने बाजी मारी, जबकि बीजेपी को 20 और कांग्रेस को सिर्फ सात सीटें मिलीं।बीएसपी और आरएलपी ने एक-एक सीट जीती।बात सिर्फ इतनी भर नहीं है, बल्कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह नगर पाली के नतीजे भी भाजपा के लिए सुखद नहीं रहे।पाली नगर निगम के 65 वार्डों में 15 पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने न सिर्फ भाजपा, बल्कि कांग्रेस को भी कड़ी चुनौती दी है।पाली में कांग्रेस ने 29 सीटें जीती तो भाजपा को सिर्फ 21 सीटों से संतोष करना पड़ा। 
 

Rajasthan civic polls: भजपा के समक्ष सुलगते सवाल

ठीक है कि भाजपा निर्दलियों के समर्थन से कई निकायों में बहुमत हासिल कर सकती  है, लेकिन सवाल उठ सकते हैं कि यह स्थिति प्रदेश भाजपा और भाजपा आलाकमान दोनों के लिए सोचने का विषय नहीं होनी चाहिए? आखिर प्रदेश संगठन और सरकार से जनता का भरोसा क्यों टूट रहा है? क्या इस भरोसे के टूटने की एक बड़ी वजह नेतृत्व की विफलता तो नहीं है? क्या प्रदेश नेतृत्व जनता की अपेक्षाओं की पूर्ति नहीं कर पा रहा है? कहीं ऐसा तो नहीं कि नेतृत्व निकाय चुनावों में भी प्रधानमंत्री मोदी की करिश्माई छवि के भरोसे बैठा रहा हो? 

Rajasthan civic polls: कांग्रेस को झटका

कांग्रेस के लिए जनता का जनादेश इस मायने में झटका देने वाला है कि यदि जनता डबल इंजन की सरकार से खुश नहीं थी, तो निकायों में कांग्रेस को भरपूर समर्थन क्यों नहीं मिला?  आश्चर्यजनक है कि कई जगहों पर मुख्य विपक्षी कांग्रेस के बजाय जनता ने निर्दलियों पर भरोसा किया। उत्तराखंड, पंजाब जैसे राज्यों में कांग्रेस कार्यकर्ता उम्मीद लगाए हुए हैं कि सरकार से नाराज होने पर जनता मुख्य विपक्षी पार्टी होने के नाते कांग्रेस को समर्थन देगी, लेकिन राजस्थान निकाय चुनाव के नतीजे ऐसा संदेश नहीं देते हैं।