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रवि किशन गोरखपुर को ‘स्पेन’ क्यों कहते हैं? जानें बयान के पीछे की पूरी कहानी

Ravi Kishan:

Ravi Kishan: 29 अगस्त को बशारतपुर में नवनिर्मित कल्याण मंडपम के उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में रवि किशन गोरखपुर में हुए बदलावों का जिक्र कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने भोजपुरी अंदाज में कहा कि उन्हें गोरखपुर स्पेन और स्मार्ट सिटी जैसा लगता है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने गोरखपुर का बदलाव नहीं देखा, उनके लिए वह क्या कर सकते हैं। उनके इस अंदाज पर मंच पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत अन्य लोग हंसते नजर आए। इसके बाद उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

Ravi Kishan: ‘स्पेन’ की बात पहली बार नहीं कही-

रवि किशन का गोरखपुर को स्पेन बताने का बयान पहली बार सामने नहीं आया है। एक पुराने समाचार इंटरव्यू में भी उनसे पूछा गया था कि वह गोरखपुर को स्पेन क्यों कहते हैं। इस पर उन्होंने गोरखपुर के पुराने और मौजूदा हालात की तुलना की थी। उन्होंने बताया था कि पहले शहर में जलभराव, इंसेफेलाइटिस और अपराध जैसी समस्याएं बड़ी चुनौती थीं। उनके मुताबिक, समय के साथ शहर में कई स्तरों पर बदलाव देखने को मिला है।

Ravi Kishan: रामगढ़ताल से जुड़ा है ‘स्पेन मॉडल’-

रवि किशन के विजन में गोरखपुर का रामगढ़ताल भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उन्होंने रामगढ़ताल की तुलना स्पेन के जलाशयों से करते हुए गोरखपुर में पर्यटन और आधुनिक सुविधाओं की संभावनाओं की बात की थी। उनके अनुसार, गोरखपुर के जल संसाधनों और विकसित हो रही सुविधाओं का इस्तेमाल शहर को बेहतर पर्यटन स्थल और आधुनिक शहरी सुविधाओं वाला शहर बनाने के लिए किया जा सकता है। इस लिहाज से ‘स्पेन’ शब्द का इस्तेमाल केवल यह दावा करने के लिए नहीं है कि गोरखपुर स्पेन बन चुका है, बल्कि इसे वह शहर के विकास के एक लक्ष्य और बदलती तस्वीर के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।

रवि किशन के ‘स्पेन मॉडल’ में क्या-क्या शामिल है-

रवि किशन के अलग-अलग बयानों को जोड़कर देखें तो गोरखपुर को लेकर उनके विजन में कई प्रमुख चीजें शामिल हैं। इनमें बेहतर सड़क और कनेक्टिविटी, एयर कनेक्टिविटी, रेलवे और स्टेशन का विकास, एम्स जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं, खाद कारखाना, रामगढ़ताल का विकास, पर्यटन, जलभराव से निजात, स्मार्ट सिटी सुविधाएं, शहर का सौंदर्यीकरण, रोजगार और औद्योगिक विकास शामिल हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अपने भाषणों में गोरखपुर में एम्स, खाद कारखाना, स्मार्ट सिटी कार्य, रिंग रोड और हाईवे जैसी परियोजनाओं का जिक्र करते रहे हैं।

आखिर स्पेन ही क्यों-

यह सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है। स्पेन दुनिया के प्रमुख पर्यटन देशों में शामिल है। वहां ऐतिहासिक शहरों के साथ आधुनिक शहरी ढांचा, पर्यटन सुविधाएं और सार्वजनिक स्थान भी विकसित हैं। रवि किशन संभवतः इसी तरह के आधुनिक शहर, पर्यटन, जल संसाधन और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर वाले मॉडल को गोरखपुर से जोड़कर देखते हैं। रामगढ़ताल का उनके पुराने बयान में जिक्र इस तुलना को और स्पष्ट करता है। उनका विजन है कि गोरखपुर के जल संसाधनों और पर्यटन क्षमता को विकसित करके शहर की अलग पहचान बनाई जा सकती है।

विरोधियों को क्यों मिला हमला करने का मौका-

विवाद केवल ‘स्पेन’ शब्द को लेकर नहीं हुआ। उनके बयान में विकास नहीं देखने वालों को लेकर की गई टिप्पणी भी चर्चा का विषय बनी। विपक्ष ने इसे अतिशयोक्ति बताया। आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी गोरखपुर पहुंचकर व्यंग्य करते हुए कहा कि यहां आने पर उन्हें लगा कि वह स्पेन आ गए हैं और वीजा भी नहीं लगा।

गोरखपुर की जनता की राय क्या है-

इस मुद्दे पर लोगों की राय एक जैसी नहीं है। कुछ लोगों का मानना है कि पिछले वर्षों में गोरखपुर में काफी विकास हुआ है, लेकिन शहर की तुलना स्पेन से करना उचित नहीं है। वहीं, कुछ लोग रवि किशन के बयान को शहर के विकास को लेकर सकारात्मक सोच के तौर पर देखते हैं। ऐसे में इस पूरे मामले को केवल सही या गलत के तौर पर देखने के बजाय यह सवाल ज्यादा महत्वपूर्ण है कि पिछले एक दशक में गोरखपुर में कितना बदलाव आया है और वह बदलाव किस स्तर तक पहुंचा है।

‘स्पेन’ मंजिल नहीं, रवि किशन का विजन है-

रवि किशन के बयानों को देखें तो वह गोरखपुर को ऐसा शहर बनते देखना चाहते हैं, जहां आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर कनेक्टिविटी, पर्यटन, जलाशयों का विकास, स्वास्थ्य और औद्योगिक सुविधाएं एक साथ मौजूद हों। अपने पुराने इंटरव्यू में उन्होंने गोरखपुर को स्पेन जैसा बनाने की बात कही थी। ऐसे में 29 अगस्त का बयान अचानक कही गई बात नहीं, बल्कि गोरखपुर के विकास को लेकर उनके लंबे समय से बताए जा रहे विजन का हिस्सा माना जा सकता है। उनके लिए ‘गोरखपुर बराबर स्पेन’ एक राजनीतिक और भावनात्मक तुलना है, जिसके जरिए वह शहर के पुराने दौर और मौजूदा विकास के बीच अंतर बताने की कोशिश करते हैं

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