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समंदर में भारत-पाक के युद्धपोत क्यों टकराए? 3 नॉटिकल मील के नियम से लेकर दिल्ली में पाक अफसर तलब होने तक जानिए पूरा मामला…

INDIA VS PAKISTAN NEWS: अरब सागर में 15 सितंबर की शाम भारत और पाकिस्तान के युद्धपोत अचानक आमने-सामने आ गए। उत्तरी अरब सागर में नियमित निगरानी मिशन पर तैनात भारतीय नौसेना के एक फ्रंटलाइन युद्धपोत के पास पाकिस्तान की नौसैनिक यूनिट पहुंची और दोनों के बीच टक्कर हो गई। भारत के मुताबिक, पाकिस्तानी जहाज तेज गति से भारतीय पोत के करीब आया और उसने असुरक्षित तथा गैर-पेशेवर तरीके से मैन्युवर किया। घटना अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई और किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।

लेकिन इस घटना ने सिर्फ समुद्री सुरक्षा को लेकर सवाल नहीं खड़े किए, बल्कि करीब तीन दशक पुराने भारत-पाकिस्तान समझौते को भी चर्चा में ला दिया। भारत ने कहा कि पाकिस्तानी नौसैनिक यूनिट का व्यवहार 1991 के समझौते के अनुच्छेद 10 के अनुरूप नहीं था। इसके बाद 16 सितंबर को विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में पाकिस्तान के Charge d’Affaires को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

सवाल-1: आखिर समुद्र में हुआ क्या?

15 सितंबर की शाम भारतीय नौसेना का एक फ्रंटलाइन युद्धपोत उत्तरी अरब सागर में रूटीन निगरानी मिशन पर था। इसी दौरान पाकिस्तान की एक नौसैनिक यूनिट भारतीय जहाज के करीब पहुंची। भारत का कहना है कि पाकिस्तानी जहाज तेज गति से आया और उसका मैन्युवर असुरक्षित था। इसी दौरान दोनों नौसैनिक इकाइयों के बीच टक्कर हुई। घटना अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, टक्कर से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।

INDIA VS PAKISTAN NEWS: सवाल-2: 3 नॉटिकल मील का नियम आखिर क्या है?

इस घटना का सबसे अहम हिस्सा यहीं से शुरू होता है। भारत ने 1991 के ‘Agreement between India and Pakistan on Advance Notice on Military Exercises, Manoeuvres and Troop Movements’ के अनुच्छेद 10 का हवाला दिया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य दोनों देशों की सैन्य गतिविधियों के दौरान गलतफहमी और दुर्घटना की संभावना को कम करना है।

अनुच्छेद 10 में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों के बीच दूरी बनाए रखने का प्रावधान है। इसके तहत दोनों देशों के नौसैनिक जहाज और पनडुब्बियां एक-दूसरे से 3 नॉटिकल मील से कम दूरी पर नहीं आनी चाहिए। यह दूरी करीब 5.56 किलोमीटर होती है। यानी यह कोई सामान्य समुद्री दूरी का नियम भर नहीं है, बल्कि भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य गलतफहमियों और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए बनी द्विपक्षीय व्यवस्था का हिस्सा है।

सवाल-3: क्या इसी नियम की वजह से भारत ने पाकिस्तान पर आपत्ति जताई?

भारत के आधिकारिक रुख के मुताबिक, हां। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तानी नौसैनिक यूनिट का व्यवहार 1991 के समझौते के अनुच्छेद 10 के सीधे विरोध में था। भारत ने पाकिस्तान के राजनयिक प्रतिनिधि से कहा कि उसकी सैन्य इकाइयों को समुद्र में उचित सावधानी बरतनी चाहिए और दोनों देशों के बीच लागू समझौतों के प्रावधानों का सम्मान करना चाहिए। हालांकि, टक्कर के ठीक समय दोनों जहाजों की वास्तविक दूरी, उनकी गति और किस जहाज ने कौन सा मैन्युवर किया, इसकी पूरी तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए इन पहलुओं पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले आधिकारिक जांच या विस्तृत जानकारी का इंतजार जरूरी है।

INDIA VS PAKISTAN NEWS: सवाल-4: दिल्ली में पाकिस्तान के अफसर को क्यों बुलाया गया?

समुद्र में हुई घटना के अगले दिन भारत ने इसे कूटनीतिक स्तर पर उठाया। 16 सितंबर को विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में पाकिस्तान के Charge d’Affaires को तलब किया और पाकिस्तानी नौसैनिक यूनिट के व्यवहार पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत ने इस घटना को अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर आचरण से जोड़ते हुए आपत्ति जताई। साथ ही इस्लामाबाद में मौजूद भारत के Charge d’Affaires को भी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के सामने इसी तरह का विरोध दर्ज कराने के निर्देश दिए गए। यानी भारत की तत्काल प्रतिक्रिया सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि राजनयिक विरोध के रूप में सामने आई है।

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सवाल-5: क्या यह भारत-पाकिस्तान के बीच नया सैन्य टकराव है?

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे युद्ध या नए सैन्य संघर्ष की शुरुआत कहना सही नहीं होगा। यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में दो नौसैनिक इकाइयों के बीच हुई टक्कर है। भारत ने पाकिस्तानी जहाज के असुरक्षित संचालन को लेकर आपत्ति जताई है और इसी आधार पर राजनयिक कार्रवाई की है। किसी बड़े नुकसान या उसके बाद सैन्य कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल इसका मुख्य पहलू समुद्री सुरक्षा और द्विपक्षीय सैन्य समझौते का पालन है।

INDIA VS PAKISTAN NEWS: सवाल-6: 1991 का समझौता इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से सैन्य गतिविधियों को लेकर गलतफहमी और दुर्घटनाओं का जोखिम रहा है। इसी तरह की स्थितियों को नियंत्रित करने के लिए दोनों देशों ने सैन्य अभ्यास, मैन्युवर और सैनिकों की आवाजाही से जुड़ी गतिविधियों पर अग्रिम सूचना सहित कई व्यवस्थाएं तय की थीं।

इस समझौते का नौसैनिक प्रावधान खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में दोनों देशों के युद्धपोत एक-दूसरे के संपर्क में आ सकते हैं। ऐसे में तय दूरी और सुरक्षित संचालन का पालन किसी भी गलत आकलन को गंभीर घटना बनने से रोक सकता है। 2011 में भी भारतीय और पाकिस्तानी नौसैनिक जहाजों से जुड़ी एक घटना में दोनों पक्षों ने समुद्री सुरक्षा नियमों और इसी 1991 समझौते के अनुच्छेद 10 का संदर्भ दिया था।

सवाल-7: अब आगे क्या?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि टक्कर से ठीक पहले दोनों जहाजों की स्थिति क्या थी और वास्तव में किस तरह का मैन्युवर किया गया था। इसकी पूरी तकनीकी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। इसलिए भारत के आधिकारिक आरोप और घटना के तथ्य अलग-अलग रखना जरूरी है।

इतना जरूर स्पष्ट है कि 15 सितंबर को उत्तरी अरब सागर में दोनों देशों की नौसैनिक इकाइयों के बीच टक्कर हुई, किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है और 16 सितंबर को भारत ने पाकिस्तान के राजनयिक प्रतिनिधि को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। अब नजर पाकिस्तान की आधिकारिक प्रतिक्रिया और दोनों देशों की ओर से समुद्र में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए जाने वाले अगले कदमों पर रहेगी।

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