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New Delhi: UCC पर क्यों गरमा रही है देश की राजनीति, क्या विपक्ष की बढ़ेंगी चुनौतियां?

New Delhi: UCC पर क्यों गरमा रही है देश की राजनीति, क्या विपक्ष की बढ़ेंगी चुनौतियां?
New Delhi: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ऐलान किया है कि 2029 से पहले देश के सभी एनडीए (NDA) शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू कर दी जाएगी। उनके इस ऐलान के साथ ही देश की राजनीति गरमा गई।विपक्षी पार्टियां UCC का जिस तरह विरोध कर रही हैं, उससे तो यही कहा जा सकता है कि उन्हें इससे सत्ताधारी भाजपा को फायदा मिलने और खुद को नुकसान होने की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। 

कैसे बढ़ जाएंगी विपक्ष की चुनौतियां?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यदि UCC को सफलतापूर्वक लागू किया गया, तो विपक्ष के लिए राष्ट्रवाद और सामाजिक सुधार के इस नैरेटिव का मुकाबला करना काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। धर्म-आधारित पर्सनल लॉ की वकालत करते रहे खास दलों की चुनावी रणनीति को बड़ा झटका लग सकता है।यही वजह है कि वे इसका विरोध कर रहे हैं।विश्लेषकों के अनुसार राम मंदिर और अनुच्छेद 370 के बाद यूसीसी भाजपा के पास एक ऐसा मुद्दा है, जिससे विपक्षी पार्टियों की राजनीति काफी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।यही वजह है कि वे अपनी-अपनी रणनीति के तहत इसके विरोध में दलीलें दे रहे हैं।यह अलग बात है कि कोई अपने वोट बैंक को साधे रखने के लिए आक्रामक तेवर अपनाए हुए हैं, तो किसी को इस बात का ध्यान भी रखना पड़ रहा है कि कहीं विरोध की तीखी भाषा का बड़ा राजनीतिक नुकसान न हो जाए।

New Delhi: किसी के तीखे तेवर, तो कोई संभलकर बोल रहा

विपक्षी पार्टियों की बात करें तो इस मुद्दे पर सबसे ज्यादा मुखर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी हैं।उनका सीधा सा आरोप है कि UCC  के नाम पर एक विशेष समुदाय (मुसलमानों) को निशाना बनाया जा रहा है। सीपीआईएम (CPI-M) और नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) जैसी पार्टियों ने इसे बहुसंख्यकवादी राजनीति करार दिया है। कांग्रेस के सामने दिक्कत यह है कि वह ओवैसी की भाषा में सरकार पर हमला भी नहीं बोल पा रही है और यूसीसी का समर्थन भी नहीं कर सकती है।हालांकि वह दलील देती रही है कि देश की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता का सम्मान किया जाना चाहिए।जबर्दस्ती किसी एक जैसी व्यवस्था को नहीं थोपा जा सकता है।कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा चुनावों के समय ध्रुवीकरण और चुनावी लाभ के लिए यूसीसी जैसे मुद्दों को हवा देती है।कांग्रेस के इस आरोप से तो यही लगता है कि यदि  UCC वाकई सफलतापूर्क लागू हो गया, तो भाजपा को चुनावी लाभ मिलेगा और विपक्ष को झटका लग सकता है। 

New Delhi: क्या कहती है सरकार?

केंद्र सरकार का मानना है कि विधि के समक्ष सभी नागरिक समान हैं। UCC का उद्देश्य समान नागरिक दायित्वों और अधिकारों को स्थापित करना है।UCC के तहत विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे मामलों में सभी धर्मों के नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू होंगे। सरकार द्वारा यूसीसी को महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक न्याय से जोड़ा जाना विपक्ष के लिए बड़ी समस्या बन सकती है।विपक्ष द्वारा UCC का विरोध किये जाने के कारण महिलाओं के एक बड़े वर्ग में यह संदेश जा सकता है कि आखिर प्रगतिशील विचारों की बात करने वाले दल क्यों उनके अधिकारों के खिलाफ हैं ?