Rahul Gandhi UPI MDR: लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने UPI के नए MDR नियम को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने सरकार से इस व्यवस्था को वापस लेने की मांग की। राहुल गांधी ने इससे पहले सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया था कि सरकार ने UPI पर फीस लगाने का रास्ता खोल दिया है। उन्होंने 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट UPI लेन-देन पर MDR लगाए जाने को लेकर सवाल उठाए।
Rahul Gandhi UPI MDR: ‘दुकानदार पर लगेगा चार्ज तो बोझ ग्राहक पर आ सकता है’-
राहुल गांधी ने दावा किया कि 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन संख्या में कम हैं, लेकिन UPI के कुल ट्रांजैक्शन मूल्य में उनका हिस्सा काफी बड़ा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ग्राहक से सीधे फीस नहीं ली जा रही है और दुकानदार पर MDR लगाया जा रहा है, तो इसका असर कीमतों के जरिए आखिरकार ग्राहक पर पड़ सकता है। यह राहुल गांधी की ओर से व्यक्त की गई आशंका है।
Rahul Gandhi UPI MDR: 2,000 रुपये से ऊपर के UPI भुगतान पर क्या है नियम-
मौजूदा व्यवस्था के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के Person-to-Merchant (P2M) UPI लेन-देन पर 0.4% MDR लागू किया जाना है। यह शुल्क ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाएगा, बल्कि मर्चेंट से जुड़ेगा। 2,000 रुपये तक के P2M भुगतान और Person-to-Person (P2P) ट्रांजैक्शन पर यह MDR लागू नहीं है। इस MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है। यानी 75,000 रुपये या उससे अधिक के योग्य P2M ट्रांजैक्शन पर MDR 300 रुपये तक सीमित रहेगा।
केसी वेणुगोपाल ने भी उठाए सवाल-
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी UPI MDR को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि रोजमर्रा की जरूरतों के लिए UPI का इस्तेमाल करने वाले आम लोगों पर इसका अप्रत्यक्ष असर क्यों पड़े और इसका खर्च बड़ी वित्तीय कंपनियों को क्यों नहीं उठाना चाहिए।
2,000 रुपये से ऊपर के ट्रांजैक्शन का कितना हिस्सा-
अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन की संख्या कुल P2M वॉल्यूम का करीब 4% थी, लेकिन इनका ट्रांजैक्शन वैल्यू में हिस्सा करीब 67% था। यही आंकड़ा UPI MDR पर चल रही बहस में अहम है। एक तरफ सरकार की व्यवस्था में छोटे मूल्य के भुगतान को MDR से बाहर रखा गया है, वहीं बड़े मर्चेंट भुगतान पर शुल्क लागू किया गया है।
सरकार की ओर से क्या कहा गया-
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि MDR का शुल्क ग्राहकों से सीधे नहीं लिया जाएगा। नए ढांचे में MDR से मिलने वाली राशि पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल बैंकों और ऐप प्रोवाइडर्स समेत संबंधित पक्षों के बीच बांटी जाएगी। इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच अलग-अलग दावे सामने आए हैं। MDR का वास्तविक असर मर्चेंट लागत, कीमतों और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम पर किस तरह पड़ता है, यह इसके लागू होने के बाद के आंकड़ों से स्पष्ट होगा।
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