UPI MDR Charges: UPI पर MDR यानी Merchant Discount Rate लागू होने के बाद बैंकों, पेमेंट ऐप्स और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की कमाई को लेकर चर्चा तेज है। ब्रोकरेज फर्मों के अनुमानों के मुताबिक, इससे सालाना हजारों करोड़ रुपये का रेवेन्यू पूल बन सकता है।
UPI MDR Charges: UPI पर MDR लागू होने के बाद क्या बदलेगा-
UPI पर MDR लगाने के फैसले के बाद सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि इससे होने वाली कमाई किसके हिस्से में जाएगी। Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे पेमेंट ऐप्स के साथ-साथ ग्राहक और व्यापारी के बैंक तथा दूसरे पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर भी इस व्यवस्था का हिस्सा होंगे। EY इंडिया के पेमेंट्स सेक्टर लीडर रणदुर्जय तालुकदार के अनुसार, नया फ्रेमवर्क UPI को सब्सिडी पर आधारित मॉडल से निकालकर टिकाऊ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में ले जाने में मदद कर सकता है। NPCI और वित्त मंत्रालय की ओर से भी डिजिटल पेमेंट सिस्टम को टिकाऊ बनाने पर जोर दिया गया है।
UPI MDR Charges: 5,000 रुपये के भुगतान पर 20 रुपये MDR-
मान लीजिए किसी ग्राहक ने बड़े स्टोर से 5,000 रुपये की खरीदारी की और UPI के जरिए भुगतान किया। अगर इस ट्रांजैक्शन पर MDR 0.4 प्रतिशत है तो 20 रुपये का MDR बनेगा। यह राशि ग्राहक के खाते से सीधे नहीं कटेगी, बल्कि संबंधित व्यापारी की ओर से दी जाएगी। इसके बाद यह रकम बैंक, पेमेंट ऐप, प्रोसेसिंग बैंक और पेमेंट नेटवर्क से जुड़े दूसरे हिस्सेदारों के बीच तय हिस्सेदारी के अनुसार बांटी जाएगी।
75 हजार के ट्रांजैक्शन पर ऐसे बंटेंगे 300 रुपये-
अगर कोई ग्राहक 75,000 रुपये का योग्य UPI भुगतान करता है और MDR 0.4 प्रतिशत है, तो कुल MDR 300 रुपये होगा।
इस रकम के बंटवारे के उदाहरण के तौर पर:
ग्राहक के बैंक को 40% यानी 120 रुपये मिलेंगे। यह वह बैंक होगा, जहां से ग्राहक के खाते से पैसा कटता है।
व्यापारी के बैंक को 30% यानी 90 रुपये मिलेंगे, जहां दुकानदार का भुगतान पहुंचता है।
PSP बैंक को 10% यानी 30 रुपये मिलेंगे, जो UPI ऐप के साथ पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के तौर पर काम करता है।
पेमेंट ऐप को 20% यानी 60 रुपये मिलेंगे। इसमें Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे ऐप शामिल हो सकते हैं।
22 हजार करोड़ रुपये तक के रेवेन्यू का अनुमान-
MDR से बनने वाले संभावित रेवेन्यू को लेकर अलग-अलग ब्रोकरेज फर्मों ने अलग अनुमान दिए हैं। UBS, Goldman Sachs, JPMorgan और Citi के अनुमानों में इंडस्ट्री के लिए हजारों करोड़ रुपये के रेवेन्यू पूल की संभावना जताई गई है। UBS का अनुमान है कि बैंकों और पेमेंट कंपनियों के लिए सालाना रेवेन्यू पूल 10,000 से 15,000 करोड़ रुपये हो सकता है। Goldman Sachs ने इसे करीब 20,600 करोड़ रुपये तक बताया है। JPMorgan के मुताबिक संभावित रेवेन्यू पूल करीब 17,000 करोड़ रुपये तक हो सकता है, जबकि Citi ने 16,000 से 17,000 करोड़ रुपये का अनुमान दिया है। इन अनुमानों में अंतर है, लेकिन मोटे तौर पर संभावित रेवेन्यू पूल को 22,000 करोड़ रुपये तक बताया जा रहा है।
बैंकों को मिल सकता है बड़ा हिस्सा-
UBS के अनुमान के मुताबिक, इस रेवेन्यू पूल में बैंकों की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत तक हो सकती है। Citi का अनुमान इसे करीब 60 प्रतिशत तक रखता है, जबकि कुछ विशेषज्ञ इसे 80 प्रतिशत तक मानते हैं। अगर बैंकों की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत मानी जाए तो करीब 17,000 करोड़ रुपये से ज्यादा रकम बैंकों के हिस्से में आ सकती है। हालांकि वास्तविक हिस्सेदारी बैंक के ग्राहकों की संख्या, UPI ट्रांजैक्शन और मर्चेंट नेटवर्क जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगी।
बड़े ग्राहक आधार वाले बैंकों को क्यों मिल सकता है फायदा-
MDR व्यवस्था में जिस बैंक के पास ज्यादा ग्राहक और ज्यादा UPI यूजर्स होंगे, उसके लिए संभावित कमाई का हिस्सा बड़ा हो सकता है।डेबिट कार्ड मार्केट शेयर को बचत खातों के संकेतक के तौर पर देखें तो SBI की हिस्सेदारी करीब 25 प्रतिशत बताई गई है। इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा करीब 8 प्रतिशत, HDFC बैंक 6.2 प्रतिशत, Canara Bank 5.9 प्रतिशत और Union Bank 5.6 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ आते हैं। हालांकि डेबिट कार्ड मार्केट शेयर और MDR से होने वाली वास्तविक कमाई एक ही चीज नहीं है। वास्तविक कमाई कई दूसरे कारकों पर भी निर्भर करेगी।
पेमेंट ऐप्स को भी मिलेगा 20 प्रतिशत हिस्सा-
Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे पेमेंट ऐप्स के हिस्से में उदाहरण के तौर पर 20 प्रतिशत MDR आ सकता है। यह बैंकों की संभावित हिस्सेदारी से कम है, लेकिन ऐप कंपनियों के लिए नियमित कमाई का नया स्रोत बन सकता है। अब तक UPI ने इन कंपनियों को बड़ा ग्राहक आधार और भारी ट्रांजैक्शन वॉल्यूम दिया है, लेकिन सामान्य UPI पेमेंट से सीधे और नियमित रेवेन्यू की गुंजाइश सीमित रही है। MDR व्यवस्था से योग्य बड़े पेमेंट पर ऐप्स को हिस्सा मिलने की संभावना है।
MDR की 5% राशि जाएगी प्रोत्साहन फंड में-
NPCI के मुताबिक MDR से जुड़ी व्यवस्था का एक उद्देश्य डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को बढ़ावा देना भी है। इसके लिए एक समर्पित फंड बनाया जाएगा। MDR से मिलने वाली कुल राशि का 5 प्रतिशत इस प्रोत्साहन फंड में जाने की बात कही गई है। इसका इस्तेमाल UPI को और व्यापक बनाने तथा छोटे कारोबारियों को डिजिटल पेमेंट सिस्टम से जोड़ने के लिए किया जा सकता है।
सरकार को कितनी कमाई होगी-
इस पूरे गणित में बैंकों और पेमेंट कंपनियों की हिस्सेदारी की चर्चा ज्यादा है। वहीं MDR से बनने वाली राशि का एक हिस्सा प्रोत्साहन फंड में जाएगा। इसलिए कुल MDR और सरकार की प्रत्यक्ष कमाई को एक ही चीज मानना सही नहीं होगा। असल में MDR का पैसा पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल अलग-अलग हिस्सेदारों के बीच बांटा जाएगा। इसमें ग्राहक का बैंक, व्यापारी का बैंक, PSP बैंक, पेमेंट ऐप और नेटवर्क से जुड़े अन्य पक्ष शामिल हो सकते हैं।
UPI को टिकाऊ बनाने पर जोर-
EY इंडिया के पेमेंट्स सेक्टर लीडर रणदुर्जय तालुकदार के अनुसार, नया फ्रेमवर्क UPI को सब्सिडी आधारित मॉडल से निकालकर ज्यादा टिकाऊ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की दिशा में ले जा सकता है। उनके मुताबिक, इससे बैंक और पेमेंट कंपनियां साइबर सुरक्षा, तकनीकी सुधार, ग्राहक सेवा और पेमेंट नेटवर्क को मजबूत करने पर ज्यादा संसाधन खर्च कर सकती हैं। कुल मिलाकर MDR से बनने वाली राशि किसी एक कंपनी के खाते में नहीं जाएगी। इसका वितरण पेमेंट सिस्टम में शामिल अलग-अलग खिलाड़ियों के बीच होगा और वास्तविक कमाई ट्रांजैक्शन वॉल्यूम तथा संबंधित बैंक और पेमेंट नेटवर्क की भूमिका पर निर्भर करेगी।
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