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लखनऊ बनेगा टेक्नोलॉजी का ग्लोबल हब, अक्टूबर में 1200 से ज्यादा विशेषज्ञ करेंगे AI-Quantum पर मंथन

लखनऊ में 23 से 25 अक्टूबर तक तकनीक से जुड़ा एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय आयोजन होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) में International Dialogue 2026 का आयोजन किया जाएगा। तीन दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी समेत कई देशों के विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, कारोबारी, कंपनियों के प्रतिनिधि और शिक्षाविद शामिल होंगे। आयोजकों के अनुसार, इस कार्यक्रम में करीब 1,200 प्रतिभागियों के शामिल होने की तैयारी है।इस अंतरराष्ट्रीय संवाद में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स, ड्रोन, 3-डी प्रिंटिंग और डिजिटल फॉरेंसिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों पर चर्चा होगी। इसके अलावा, तकनीक से जुड़े कानूनी, सुरक्षा और डेटा गोपनीयता के पहलुओं पर भी विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे।

Lucknow: युवाओं को भविष्य की टेक्नोलॉजी से जोड़ने पर फोकस
International Dialogue 2026 का उद्देश्य केवल नई तकनीकों की जानकारी देना नहीं है। UPSIFS की योजना शिक्षा, सरकार और उद्योग के बीच ऐसा सहयोग विकसित करने की है, जिससे छात्रों को बदलती तकनीकी जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा सके।संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के तहत युवाओं को नई तकनीकों से जोड़ने और उन्हें भविष्य के रोजगार के लिए तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में इस आयोजन को रिसर्च, इंडस्ट्री और युवा प्रतिभाओं के बीच संवाद का मंच बनाया जा रहा है।
AI से क्वांटम कंप्यूटिंग तक किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
कार्यक्रम में उन तकनीकों पर विशेष फोकस रहेगा, जिनका आने वाले वर्षों में उद्योग, सुरक्षा और न्यायिक व्यवस्था पर प्रभाव पड़ सकता है। AI और रोबोटिक्स के साथ ड्रोन, 3-डी प्रिंटिंग, क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम कम्युनिकेशन जैसे विषयों पर विशेषज्ञ चर्चा करेंगे। क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत की मौजूदा क्षमता और भविष्य की जरूरतों पर भी विचार-विमर्श प्रस्तावित है। वहीं, साइबर फॉरेंसिक्स, DNA फॉरेंसिक्स, डिजिटल एविडेंस और आधुनिक जांच तकनीकें भी चर्चा के प्रमुख विषयों में रहेंगी। डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सुरक्षा, प्राइवेसी, ऑडिट, गवर्नेंस और कानूनी अनुपालन जैसे मुद्दों को भी संवाद का हिस्सा बनाया जाएगा।
Lucknow: छात्रों के लिए क्या होगा खास?
आयोजन के पहले दिन युवाओं और इंडस्ट्री के बीच सीधे संवाद पर जोर रहेगा। छात्रों को कंपनियों और विशेषज्ञों से यह समझने का अवसर मिलेगा कि आने वाले समय में किन तकनीकी कौशलों की मांग बढ़ सकती है।प्रस्तावित कार्यक्रम में टेक्नोलॉजी डेमो, मास्टरक्लास और विशेषज्ञों के साथ संवाद जैसे सत्र शामिल हैं। छात्रों को इंटर्नशिप और रोजगार के संभावित अवसरों से जोड़ने के साथ स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं के लिए नेटवर्किंग का अवसर भी उपलब्ध कराने की योजना है।UPSIFS शिक्षा और इंडस्ट्री के बीच व्यावहारिक जुड़ाव बढ़ाने पर भी काम कर रहा है। इसके तहत प्रशिक्षण, पाठ्यक्रम विकास और संयुक्त रिसर्च जैसे क्षेत्रों में संस्थानों और कंपनियों के बीच सहयोग की संभावनाएं तलाशने की तैयारी है।
24 अक्टूबर को होगा मुख्य सम्मेलन
International Dialogue का मुख्य समिट 24 अक्टूबर को प्रस्तावित है। इसमें सरकारी प्रतिनिधियों के साथ उद्योग, स्टार्टअप और नीति क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे।
मुख्य सम्मेलन में राउंडटेबल डिस्कशन, टेक्नोलॉजी प्रदर्शन और निवेश से संबंधित सत्र आयोजित किए जाने की योजना है। रिसर्च प्रोजेक्ट और भविष्य की साझेदारी को लेकर कंपनियों और संस्थानों के बीच बातचीत भी इस दौरान हो सकती है।आयोजन का एक प्रमुख उद्देश्य नई तकनीकों पर काम कर रहे उद्योगों और नीति निर्माण से जुड़े लोगों के बीच संवाद को मजबूत करना है।
Lucknow: ‘Law with Labs’ मॉडल भी दिखाएगा UPSIFS
UPSIFS अपने ‘Law with Labs’ मॉडल को भी International Dialogue में पेश करेगा। इस पहल का उद्देश्य कानून की पढ़ाई को वैज्ञानिक जांच और आधुनिक तकनीक के व्यावहारिक इस्तेमाल से जोड़ना है।
संस्थान में DNA और साइबर फॉरेंसिक से जुड़ी प्रयोगशालाओं के साथ AI, रोबोटिक्स, ड्रोन और 3-D प्रिंटिंग जैसी तकनीकों पर भी काम किया जा रहा है। इसके जरिए ऐसे छात्रों और प्रोफेशनल्स को तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है, जो तकनीक के इस्तेमाल के साथ उसके कानूनी और प्रक्रियात्मक पहलुओं को भी समझें।
टेक कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए भी भागीदारी का अवसर
इस आयोजन में टेक कंपनियों, स्टार्टअप्स, लॉ फर्म और लीगल-टेक क्षेत्र से जुड़े संस्थानों को भी भागीदारी का अवसर दिया जा रहा है। आयोजकों ने इसके लिए अलग-अलग श्रेणियां निर्धारित की हैं। जानकारी के मुताबिक, सिल्वर श्रेणी के लिए 5 लाख रुपये या उससे अधिक, गोल्ड श्रेणी के लिए 8 लाख रुपये या उससे अधिक और प्लैटिनम श्रेणी के लिए 12 लाख रुपये या उससे अधिक की भागीदारी राशि निर्धारित की गई है।इसके माध्यम से कंपनियों को प्रतिभा विकास, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन, प्रशिक्षण और नीतिगत संवाद से जुड़ी गतिविधियों का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा।
रोजगार और अनुसंधान पर भी रहेगा जोर
डॉ. जीके गोस्वामी के अनुसार, आयोजन में युवाओं के रोजगार और भविष्य के लिए आवश्यक कौशल विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। विद्यार्थियों को उद्योग विशेषज्ञों और मार्गदर्शकों से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें इंटर्नशिप और प्लेसमेंट से जुड़े अवसरों तक पहुंच उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। लखनऊ में आयोजित होने वाला यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संवाद ऐसे समय में हो रहा है, जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक जैसे क्षेत्र तेजी से बदल रहे हैं। UPSIFS के इस मंच के माध्यम से सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं को इन उभरते तकनीकी क्षेत्रों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

लेखिका: स्वाति शर्मा

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