DTC Bus Service: दिल्ली परिवहन निगम यानी डीटीसी के स्वामित्व वाली आखिरी बस मंगलवार को सड़कों से हट गई। राजघाट डिपो-1 से चलने वाली डीटीसी की बस संख्या 4038 ने अपनी तय सेवा अवधि पूरी कर ली। इसके साथ ही डीटीसी के पास यात्रियों को सेवा देने के लिए अब अपनी एक भी बस नहीं बची है। यानी दिल्ली में डीटीसी की बस सेवा अब पूरी तरह निजी कंपनियों के जरिए संचालित बसों पर निर्भर हो गई है।
DTC Bus Service: खत्म हुआ निगम की अपनी बसों का दौर
मौजूदा व्यवस्था में करीब 17 कंपनियों के जरिए बसों का संचालन किया जा रहा है। इनमें लगभग 5088 इलेक्ट्रिक बसें और करीब 1700 सीएनजी बसें शामिल हैं। ये बसें निजी कंपनियों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती हैं और उन्हीं के जरिए संचालित भी होती हैं। इस तरह डीटीसी के स्वामित्व वाला बस बेड़ा अब पूरी तरह खत्म हो चुका है।
लाल रंग की बसों की रही खास पहचान
डीटीसी की लाल रंग की वातानुकूलित लो-फ्लोर बसें दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन के इतिहास का अहम हिस्सा रही हैं। साल 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों से पहले बड़ी संख्या में नई बसों को दिल्ली की सड़कों पर उतारा गया था। इनमें वातानुकूलित और गैर-वातानुकूलित, दोनों तरह की बसें शामिल थीं।
DTC Bus Service: 2008-09 में खरीदी गई थीं 2500 बसें
साल 2008-09 में डीटीसी ने 2500 बसें खरीदी थीं। इनमें 1000 वातानुकूलित और 1500 गैर-वातानुकूलित बसें थीं। इसके बाद 625 और बसें खरीदी गईं। इस तरह उस समय कुल 3125 बसें डीटीसी के बेड़े में शामिल हुई थीं। वहीं, अन्य अध्ययनों के अनुसार 2007 से 2011 के बीच डीटीसी में 3700 लो-फ्लोर सीएनजी बसें शामिल की गई थीं। इनमें करीब एक तिहाई बसें वातानुकूलित थीं।
राष्ट्रमंडल खेलों में भी चलीं लाल बसें
इन लाल रंग की वातानुकूलित बसों ने राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान विदेशी खिलाड़ियों, अधिकारियों, पत्रकारों और आम यात्रियों को आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा दी थी। उस समय इन बसों को दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा गया था। खेलों के दौरान करीब 600 बसों को विशेष रूप से खेलों की ड्यूटी में लगाया गया था।









