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कश्मीर पर तुर्की और OIC के बयान का क्या है मतलब? भारत ने दिया जवाब

 Kashmir Statement:

Kashmir Statement: तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे का जिक्र किया है। 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में अपने संबोधन के दौरान अर्दोआन ने कहा कि दक्षिण एशिया में कश्मीर समेत सभी विवादों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संबंधित प्रस्तावों के तहत बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए। उनके भाषण के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी सदन में मौजूद थे।

Kashmir Statement: OIC ने कश्मीरी लोगों के आत्म-निर्णय के अधिकार का किया समर्थन-

इसी दौरान इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) के जम्मू-कश्मीर पर मिनिस्टीरियल कॉन्टैक्ट ग्रुप की न्यूयॉर्क में बैठक हुई। OIC ने कश्मीरी लोगों के आत्म-निर्णय के अधिकार के समर्थन को दोहराया और कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय एजेंडे पर बनाए रखने की बात कही। OIC के जम्मू-कश्मीर कॉन्टैक्ट ग्रुप में अजरबैजान, पाकिस्तान, तुर्किये, सऊदी अरब और नाइजर शामिल हैं। बैठक संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से इतर हुई।

Kashmir Statement: तुर्की के बयान का क्या मतलब है-

तुर्की का ताजा बयान यह दर्शाता है कि वह कश्मीर मुद्दे पर अपनी पहले से चली आ रही स्थिति को दोहरा रहा है। अर्दोआन ने इस बार कश्मीर को दक्षिण एशिया के विवादों के संदर्भ में उठाते हुए बातचीत और संयुक्त राष्ट्र चार्टर व प्रस्तावों के दायरे में समाधान की बात कही है। भारत लंबे समय से कश्मीर मुद्दे पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता या हस्तक्षेप का विरोध करता रहा है और इसे भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दा बताता है।

OIC के बयान पर भारत ने क्या कहा-

OIC के बयान के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि OIC के पास भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा बताया। भारत ने OIC की ओर से जम्मू-कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणियों को “अनुचित और तथ्यात्मक रूप से गलत” बताया है। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि राजनीतिक रूप से प्रेरित बयानों को बार-बार दोहराने से स्थिति नहीं बदलती।

भारत और OIC के रुख में क्या अंतर है-

OIC अपने बयान में कश्मीरी लोगों के आत्म-निर्णय के अधिकार और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का हवाला दे रहा है। वहीं भारत का रुख है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा हैं और OIC जैसे संगठन को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। फिलहाल तुर्की के इस ताजा बयान पर भारत की ओर से अलग से प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, OIC के बयान पर विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया में भारत ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है

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