West Bengal: hMd; पश्चिम बंगाल में ममता सरकार की विदाई और सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा सरकार गठित होने के बाद राज्य की जनता विकास, रोजगार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर क्या सोचती है, सरकार से क्या अपेक्षा रखती है, इसका जायजा लेने के लिए मीडिया की एक टीम ने मुर्शिदाबाद के स्थानीय लोगों से बातचीत की।टीम ने लोगों से सरकार बदलने के बाद इलाके में आए बदलाव, कानून-व्यवस्था, बुलडोजर कार्रवाई, बाल विवाह, रोजगार और विकास जैसे मुद्दों पर सवाल किए गए। बातचीत के दौरान कुछ लोगों ने बंगाली में बात की और हिंदी में बातचीत करने को लेकर भी अपनी असहजता जाहिर की।
West Bengal: बुलडोजर कार्रवाई का मुद्दा भी उठा
बातचीत के दौरान स्थानीय लोगों ने इलाके में हुई बुलडोजर कार्रवाई का जिक्र किया। एक व्यक्ति ने बताया कि कुछ घरों और दुकानों को बुलडोजर से तोड़ा गया है। जब उनसे इस कार्रवाई के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अगर सरकारी या रेलवे की जमीन पर लंबे समय से अवैध कब्जा था, तो उसे हटाना गलत नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों का रोजगार ऐसी दुकानों या जगहों से जुड़ा था, उनके लिए रोजगार की व्यवस्था भी की जानी चाहिए।एक व्यक्ति ने कहा कि अगर कोई रेलवे की जमीन पर 20 साल से कब्जा करके दुकान चला रहा है और उसके पास जमीन से जुड़े दस्तावेज नहीं हैं, तो अवैध कब्जा हटाया जाना समझ में आता है। उन्होंने सवाल किया कि अगर कोई व्यक्ति किसी के घर में अवैध रूप से घुस जाए तो क्या उसे वहां रहने दिया जाएगा।
बाल विवाह रोकने के कानून पर लोगों की राय
बातचीत में बाल विवाह का मुद्दा भी सामने आया। लोगों से पूछा गया कि 18 साल से कम उम्र में होने वाली शादियों को रोकने के लिए सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों को वे किस तरह देखते हैं।एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि बाल विवाह पर रोक लगाना सही है। उन्होंने कहा कि पहले भी बाल विवाह को लेकर नियम मौजूद थे, लेकिन अब इस दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि कानून बनाने के साथ लोगों के बीच जागरूकता फैलाना भी जरूरी है।एक व्यक्ति ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर किसी लड़की की शादी तीन साल पहले हुई थी और अब उसके बच्चे हो रहे हैं, तो पुराने मामले में कानून लागू करने के बजाय आगे होने वाले बाल विवाह को रोकने के लिए जागरूकता और प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
West Bengal: रोजगार और बंद कारखाने खोलने की मांग
मुर्शिदाबाद के लोगों ने रोजगार को भी प्रमुख मुद्दा बताया। स्थानीय लोगों का कहना था कि इलाके में कई कारखाने पहले की सरकार के समय से बंद पड़े हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई सरकार इन्हें दोबारा शुरू करने की दिशा में काम करेगी, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके।एक व्यक्ति ने कहा कि उन्हें हिंदू-मुस्लिम के नाम पर राजनीति नहीं चाहिए, बल्कि युवाओं को नौकरी और रोजगार चाहिए। उन्होंने कहा कि जो युवा पढ़ाई कर रहे हैं, उनके लिए रोजगार के अवसर पैदा किए जाने चाहिए।स्थानीय लोगों ने बंद कारखानों को खोलने के साथ मुर्शिदाबाद में बनी यूनिवर्सिटी को लेकर भी काम करने की मांग रखी। उनका कहना था कि यूनिवर्सिटी में बच्चों को पढ़ाई और शिक्षा के बेहतर अवसर मिलने चाहिए।
मुर्शिदाबाद की छवि पर भी हुई चर्चा
बातचीत के दौरान मुर्शिदाबाद की छवि को लेकर भी सवाल किया गया। स्थानीय व्यक्ति से पूछा गया कि पूरे देश में मुर्शिदाबाद का नाम आने पर क्या यहां लोगों में डर का माहौल रहता है और क्या लोग खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते।इस पर उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है। उनके मुताबिक मुर्शिदाबाद एक ऐसी जगह है जहां हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और पंजाबी समुदाय के लोग साथ रहते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ विशेष घटनाओं को छोड़कर पूरे मुर्शिदाबाद को एक ही नजर से नहीं देखा जाना चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को स्थानीय नागरिकों की समस्याओं पर सवाल करना चाहिए, न कि हर मुद्दे को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी अन्य नेता के नाम से जोड़ना चाहिए।
West Bengal: वोटर लिस्ट में नाम कटने का मुद्दा
बातचीत के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटने का मुद्दा भी उठाया गया। एक स्थानीय व्यक्ति ने दावा किया कि मुर्शिदाबाद में बड़ी संख्या में लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इनमें कुछ नाम हटाए या ट्रांसफर किए गए हो सकते हैं, लेकिन कई वास्तविक मतदाता भी हो सकते हैं।उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास जन्म प्रमाण पत्र, माध्यमिक शिक्षा से जुड़े दस्तावेज, पासपोर्ट या परिवार के पुराने दस्तावेज मौजूद हैं, उनके नाम भी वोटर लिस्ट में प्रभावित हुए हैं। उन्होंने इस मामले में वास्तविक मतदाताओं की समस्या को देखने की मांग की और कहा कि इस मुद्दे को लेकर हाई कोर्ट में रिट याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया चल रही है।
हिंदू-मुस्लिम मुद्दे से ज्यादा विकास की मांग
स्थानीय लोगों ने बातचीत के दौरान बार-बार रोजगार और विकास की बात पर जोर दिया। एक व्यक्ति ने कहा कि उन्हें हिंदू-मुस्लिम के मुद्दे नहीं चाहिए। उनका कहना था कि युवाओं को नौकरी चाहिए और इलाके में विकास होना चाहिए।उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के दौरान उन्हें विकास की कमी महसूस हुई। उनके मुताबिक न तो हिंदू समुदाय का पर्याप्त विकास हुआ और न ही मुस्लिम समुदाय का। उन्होंने नई सरकार से कारखाने खोलने, रोजगार देने और शिक्षा के क्षेत्र में काम करने की मांग की।
West Bengal: कानून-व्यवस्था को लेकर भी रखी राय
बातचीत में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और वहां की बुलडोजर कार्रवाई का भी जिक्र हुआ। स्थानीय लोगों से पूछा गया कि क्या उन्हें उम्मीद है कि पश्चिम बंगाल में भी कानून-व्यवस्था को उसी तरह मजबूत किया जा सकता है।एक व्यक्ति ने कहा कि बुलडोजर के मुद्दे को अलग रखकर कानून-व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस को संविधान और मौजूदा कानूनों के अनुसार अपना काम करने की पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। उनके मुताबिक सरकार को नया कुछ बनाने की जरूरत नहीं है, बल्कि मौजूदा कानूनी व्यवस्था को सही तरीके से लागू करना चाहिए।
युवाओं को सुरक्षा और रोजगार की उम्मीद
बातचीत के अंत में स्थानीय युवाओं की मांगों पर भी चर्चा हुई। लोगों ने कहा कि उन्हें ऐसी व्यवस्था चाहिए जिसमें वे सुरक्षित महसूस कर सकें और बिना डर के घर से बाहर निकल सकें। साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ाए जाने चाहिए।एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि सरकार बदलने के बाद कुछ बदलाव की उम्मीद जरूर बनी है, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। लोगों का कहना था कि मुर्शिदाबाद में विकास, रोजगार और बेहतर कानून-व्यवस्था उनकी प्रमुख जरूरतें हैं।मीडिया टीम ने बातचीत के अंत में कहा कि मुर्शिदाबाद में लोगों की मांग मुख्य रूप से विकास, रोजगार और सुरक्षा से जुड़ी हुई दिखाई देती है। लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में सरकार के प्रति उनका विश्वास और मजबूत होगा।








