Home » एक्सप्लनेर » क्या महिलाएं सच में सुरक्षित हैं? जमुई से दिल्ली तक सामने आई घटनाओं ने सिस्टम और समाज पर खड़े किए बड़े सवाल

क्या महिलाएं सच में सुरक्षित हैं? जमुई से दिल्ली तक सामने आई घटनाओं ने सिस्टम और समाज पर खड़े किए बड़े सवाल

महिला अपराधों पर सिस्टम और समाज घिरा

Women Safety: देश के अलग-अलग शहरों और राज्यों से महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराध की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। बिहार के जमुई और मुजफ्फरपुर से लेकर ओडिशा के ढेंकानाल तक और दिल्ली से मध्य प्रदेश के ग्वालियर तक कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिन्होंने महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कहीं घूमने निकली युवती के साथ बदसलूकी हुई, तो कहीं कोचिंग जा रही छात्रा से छेड़छाड़ की गई। किसी मामले में पुलिसकर्मी बताकर नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया गया, तो कहीं सड़क पर एक कपल को रोककर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या महिला सुरक्षा के मामले में हमारा सिस्टम और समाज दोनों अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम हो रहे हैं?

Women Safety: कार्रवाई के बाद भी क्यों नहीं रुक रहे अपराध?

अपराध की घटनाएं सामने आने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी होती है और कुछ मामलों में एनकाउंटर तक किए जाते हैं। इसके बावजूद ऐसे अपराधों में कमी क्यों नहीं आ रही, यह बड़ा सवाल है। इसके साथ ही लगातार ऐसी खबरें सामने आने का महिलाओं और बच्चियों की मानसिक स्थिति पर भी असर पड़ता है। जब किसी महिला को सड़क, बस, बाजार, पार्क या दूसरी सार्वजनिक जगहों पर बार-बार असुरक्षित महसूस हो, तो इसे सिर्फ कानून-व्यवस्था की समस्या मानना पर्याप्त नहीं है। यह सवाल समाज के व्यवहार, सार्वजनिक जगहों के माहौल और महिलाओं के प्रति सामूहिक सोच से भी जुड़ा हुआ है।

जमुई में युवती के साथ यौन उत्पीड़न

बिहार के जमुई में सामने आई घटना ने लोगों को झकझोर दिया। यहां एक युवक और युवती को कुछ लोगों की भीड़ ने घेर लिया। युवती ने खुद को बचाने की कोशिश की, जबकि युवक भी अपनी साथी को बचाने का प्रयास करता रहा। इसके बावजूद भीड़ नहीं रुकी। युवती के साथ छेड़छाड़ की गई और उसे जबरन अपने साथ ले जाने की कोशिश भी की गई।

Women Safety: मुजफ्फरपुर में छात्राओं पर ब्लेड से हमला

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में सुबह स्कूल जा रही दो छात्राओं पर बाइक सवार एक व्यक्ति ने अचानक ब्लेड से हमला कर दिया। हमले में दोनों छात्राएं गंभीर रूप से घायल हो गईं। इस घटना ने स्कूल आने-जाने वाली बच्चियों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

ढेंकानाल में सड़क पर कपल को रोका

जमुई की घटना के बाद ओडिशा के ढेंकानाल से सामने आया एक वीडियो भी चिंता बढ़ाने वाला है। वीडियो में एक बाइक पर युवक और युवती दिखाई दे रहे हैं। कुछ लोग उन्हें बीच सड़क पर रोकते नजर आते हैं। इसके बाद युवक के साथ मारपीट और युवती के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है। वीडियो में युवती हाथ जोड़कर लोगों से उन्हें छोड़ देने की अपील करती दिखाई देती है।

Women Safety: महिला अपराधों पर सिस्टम और समाज घिरा
महिला अपराधों पर सिस्टम और समाज घिरा
Women Safety: ग्वालियर में छात्रा से सड़क पर छेड़छाड़

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भी एक छात्रा के साथ सड़क पर आपत्तिजनक व्यवहार का मामला सामने आया। आरोप है कि दो युवकों ने छात्रा को रास्ते में रोका और उसके साथ छेड़छाड़ की। विरोध करने पर उस पर हमला भी किया गया। पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। वीडियो में छात्रा आरोपियों से बचकर भागती दिखाई देती है, जबकि एक आरोपी उसके पीछे जाता नजर आता है।

दिल्ली में सामने आए कई गंभीर मामले

इन घटनाओं के बीच दिल्ली में सामने आए महिला और बच्चियों से जुड़े मामलों को देखें तो चिंता और बढ़ जाती है। हाल के मामलों में छोटी बच्चियों के साथ यौन अपराध, दुकान के अंदर नाबालिग से दुष्कर्म, 16 साल की लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या, चलती स्लीपर बस में 16 वर्षीय छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म और कालकाजी के पास एक पार्क में 17 वर्षीय लड़की से सामूहिक दुष्कर्म जैसे मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं से यह सवाल उठता है कि महिलाओं और बच्चियों के लिए खतरा किसी एक तरह की जगह तक सीमित नहीं है।

Women Safety: क्या सिस्टम और समाज दोनों नाकाम हो रहे हैं?

सड़क, बाजार, दुकान, पार्क और सार्वजनिक परिवहन जैसी अलग-अलग जगहों पर महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। महिला सुरक्षा की समस्या किसी एक राज्य या किसी एक सरकार तक सीमित नहीं है। राज्यों और शहरों की संस्कृति अलग हो सकती है, लेकिन महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अलग-अलग जगहों से सामने आ रही घटनाएं एक बड़ी चिंता की ओर इशारा करती हैं।

निर्भया मामले में वकील रह चुकीं सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता सीमा समृद्धि कुशवाहा का कहना है कि सिस्टम के साथ-साथ समाज को भी अपनी भूमिका पर विचार करना होगा। उनके मुताबिक, अगर सिस्टम सही तरीके से काम करता है तो समाज भी ज्यादा सतर्क रहता है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना और लोगों को जागरूक करना, दोनों ही जरूरी हैं।

सीमा समृद्धि कुशवाहा ने कहा कि जिस समाज में बेटियों को देवियों के रूप में पूजने की बात कही जाती है, उसी समाज में महिलाओं के साथ होने वाली घटनाएं चिंता का विषय हैं। उन्होंने दिल्ली की एक घटना का जिक्र करते हुए पुलिसकर्मी के रूप में आरोपी पर लगाए गए दुष्कर्म के आरोपों और जमुई की घटना के बाद सामने आई सोच का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, जमुई की घटना के बाद आरोपी के गांव के कुछ लोगों ने लड़की के ही बाहर निकलने पर सवाल उठाए और कहा कि अगर रात में गांव की तरफ घूमने आएंगे तो ऐसी घटना होगी। उन्होंने इसे समाज की गंभीर मानसिकता से जुड़ा सवाल बताया।

पीड़िता के साथ दूसरी महिलाओं पर भी असर

सड़क, बस या किसी सार्वजनिक जगह पर किसी लड़की के साथ बदसलूकी या यौन हिंसा का असर केवल घटना के कुछ मिनटों तक नहीं रहता। ऐसी घटना के बाद पीड़िता के व्यवहार, आत्मविश्वास और सार्वजनिक जगहों को लेकर उसकी सोच पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है। इसका प्रभाव दूसरी महिलाओं पर भी हो सकता है।

साइकोलॉजिस्ट और क्राइस्ट यूनिवर्सिटी, दिल्ली एनसीआर में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्रेयसी रॉय के मुताबिक, ऐसी घटनाओं के कारण महिलाओं में डर और असुरक्षा की भावना बढ़ सकती है। इसका असर उनके मानसिक स्वास्थ्य और पूरे जीवन पर पड़ सकता है। इससे उनके महिला होने की पहचान को लेकर भी सवाल पैदा हो सकते हैं। घर से बाहर निकलने से पहले ही मन में डर पैदा हो सकता है और लगातार चिंता, तनाव तथा मनोवैज्ञानिक बेचैनी बढ़ सकती है।डॉ. श्रेयसी रॉय का कहना है कि किसी शोषण का प्रभाव केवल उस एक घटना तक सीमित नहीं रहता। ऐसी घटनाएं दूसरी महिलाओं की इस सोच को भी प्रभावित कर सकती हैं कि भविष्य में उनके साथ भी कुछ ऐसा हो सकता है। इसका असर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है। वे कुछ जगहों पर जाने से बच सकती हैं और उनके अंदर डर की भावना बढ़ सकती है।

Women Safety: बढ़ सकती है जरूरत से ज्यादा सतर्कता

डॉ. श्रेयसी रॉय के अनुसार, ऐसी घटनाओं के कारण महिलाओं में हाइपरविजिलेंस की स्थिति भी पैदा हो सकती है। इसका मतलब है कि महिलाएं अपने आसपास मौजूद संभावित खतरे को लेकर जरूरत से ज्यादा सतर्क रहने लग सकती हैं। इससे उनमें बेबसी की भावना बढ़ सकती है और खुद या परिस्थितियों पर नियंत्रण होने का भरोसा कम हो सकता है।उनके मुताबिक, ऐसी घटनाओं के कारण लोगों पर विश्वास भी कम हो सकता है। अगर इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ती हैं, तो लोगों के बीच बुनियादी भरोसा प्रभावित हो सकता है, जबकि किसी भी रिश्ते के लिए भरोसा एक महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे समय में परिवार का सामाजिक सहयोग बेहद जरूरी हो जाता है। साथ ही सार्वजनिक स्थानों और पुलिस व्यवस्था को ऐसा बनाया जाना चाहिए, जहां महिलाओं को अधिक भरोसा और सुरक्षा महसूस हो।

महिला सुरक्षा के लिए किन स्तरों पर बदलाव जरूरी?

महिला सुरक्षा में सुधार तभी संभव है, जब बदलाव समाज से लेकर प्रशासन तक कई स्तरों पर दिखाई दे। यह बदलाव हमारी सोच, व्यवस्था और कानून के इस्तेमाल में भी नजर आना चाहिए।सबसे पहले पुलिसिंग और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है। संवेदनशील इलाकों में पर्याप्त गश्त, सही तरीके से काम करने वाले सीसीटीवी कैमरे और शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई जरूरी है। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा मानकों को गंभीरता से लागू करना होगा। ड्राइवर और कंडक्टर के सत्यापन की प्रक्रिया भी मजबूत होनी चाहिए।महिलाओं और बच्चियों के लिए ऐसी शिकायत व्यवस्था जरूरी है, जहां वे बिना डर के अपनी बात रख सकें और उन्हें तुरंत सहायता मिल सके।

Women Safety: सुरक्षा सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं

महिला सुरक्षा का मतलब केवल दुष्कर्म और छेड़छाड़ जैसे गंभीर अपराधों को रोकना नहीं है। किसी लड़की का पीछा करना, सार्वजनिक जगह पर उसे रोकना, अश्लील टिप्पणी करना, धमकाना या उसकी इच्छा के खिलाफ उसे छूना भी उस माहौल को प्रभावित करता है जिसमें महिलाएं और बच्चियां घर से बाहर निकलती हैं।सुरक्षा का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि अपराध होने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाए। सुरक्षित माहौल का मतलब यह भी है कि अपराध होने की संभावना कम हो, पीड़ित को शिकायत करने में डर न लगे और कानून का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल हो।

समाज की जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी

महिला सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी केवल प्रशासन पर नहीं डाली जा सकती। समाज को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। अगर किसी महिला के साथ सड़क पर बदसलूकी हो रही है, तो लोगों को सिर्फ तमाशबीन बने रहने के बजाय उसकी मदद करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर पुलिस को सूचना देनी चाहिए।इसके साथ स्कूलों और समुदायों में सहमति, सम्मान और लैंगिक संवेदनशीलता को लेकर लगातार जागरूकता की जरूरत है। महिला सुरक्षा में स्थायी बदलाव तभी दिखाई देगा, जब कानून-व्यवस्था के साथ समाज के व्यवहार और सोच में भी बदलाव आए।