World Heart Day: मनुष्य के शरीर में हृदय की भूमिका केवल खून को पंप करने तक सीमित नहीं है। यह लगातार धड़कते हुए शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व पहुंचाता है। इसलिए स्वस्थ जीवन के लिए हृदय का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। बदलती जीवनशैली ने हृदय से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ाया है। लंबे समय तक बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि कम होना, असंतुलित भोजन, ज्यादा नमक और चीनी का सेवन, धूम्रपान, तंबाकू, तनाव, नींद की कमी और वायु प्रदूषण जैसे कारण हृदय रोगों का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
उच्च रक्तचाप, मधुमेह, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और मोटापा भी हृदय रोगों के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। खास बात यह है कि इनमें से कई समस्याएं लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के रह सकती हैं।विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियां दुनिया में मौत का एक प्रमुख कारण हैं। वर्ष 2022 में इन बीमारियों से करीब 1.98 करोड़ लोगों की मौत हुई, जो दुनिया भर में हुई कुल मौतों का लगभग 32 प्रतिशत था। इनमें करीब 85 प्रतिशत मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण हुईं। इन मौतों का बड़ा हिस्सा निम्न और मध्यम आय वाले देशों में दर्ज किया जाता है।
इसी वैश्विक चुनौती के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को हृदय रोगों के खतरे, बचाव, समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली के बारे में जागरूक करना है। स्वस्थ हृदय के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और समय पर स्वास्थ्य जांच को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना जरूरी है।
World Heart Day: हृदय रोग सिर्फ बुजुर्गों की समस्या नहीं
पहले हृदय रोगों को मुख्य रूप से बढ़ती उम्र से जुड़ी समस्या माना जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। उम्र हृदय रोग का एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक जरूर है, लेकिन इसके अलावा जीवनशैली, आनुवंशिकता, रक्तचाप, रक्त शर्करा, कोलेस्ट्रॉल, वजन, तंबाकू का सेवन और शारीरिक निष्क्रियता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भारत में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और आर्थिक बदलावों के साथ जीवनशैली से जुड़े जोखिम भी बढ़े हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के भारत संबंधी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 में इस्केमिक हार्ट डिजीज प्रमुख मृत्यु कारणों में शामिल थी। इसी साल भारत में गैर-संचारी बीमारियों का कुल मौतों में हिस्सा करीब 49 प्रतिशत आंका गया था।इसलिए हृदय स्वास्थ्य को केवल अस्पताल, दवाइयों और ऑपरेशन तक सीमित नहीं किया जा सकता। बचपन से अच्छी आदतें विकसित करना, नियमित जांच कराना और बीमारी होने से पहले जोखिम को पहचानना भी जरूरी है।
हृदय रोग कई तरह के होते हैं
हृदय रोग किसी एक बीमारी का नाम नहीं है। हृदय और रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करने वाली कई अलग-अलग स्थितियां इसके अंतर्गत आती हैं। इनमें कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर, दिल की धड़कन में अनियमितता, वाल्व से जुड़ी बीमारियां, जन्मजात हृदय रोग और उच्च रक्तचाप से जुड़ी हृदय समस्याएं शामिल हैं।स्ट्रोक सीधे तौर पर हृदय की बीमारी नहीं है, लेकिन इसका संबंध हृदय और रक्त वाहिकाओं की प्रणाली से गहरा है। जब रक्त वाहिका में रुकावट या किसी अन्य कारण से मस्तिष्क तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो स्ट्रोक हो सकता है। इसलिए हृदय और रक्त वाहिका स्वास्थ्य को एक पूरी प्रणाली के रूप में समझना जरूरी है।
World Heart Day: उच्च रक्तचाप को न करें नजरअंदाज
उच्च रक्तचाप को अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है, क्योंकि कई लोगों में इसके कोई साफ लक्षण दिखाई नहीं देते। लंबे समय तक ब्लड प्रेशर नियंत्रित न रहने पर हृदय, मस्तिष्क, गुर्दे और आंखों सहित शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं।विश्व स्वास्थ्य संगठन के उपलब्ध भारत प्रोफाइल के अनुसार, वर्ष 2019 में भारत में अनुमानित करीब 2.566 मिलियन हृदय-रक्त वाहिका मौतों का आकलन था और इनमें उच्च सिस्टोलिक रक्तचाप का योगदान महत्वपूर्ण था। इसी प्रोफाइल में वयस्कों में नमक का सेवन और शारीरिक निष्क्रियता जैसे जोखिम भी दर्ज किए गए हैं।इसलिए ब्लड प्रेशर की जांच केवल तब नहीं करनी चाहिए जब सिरदर्द या कोई दूसरी परेशानी हो। नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान भी रक्तचाप की निगरानी करना जरूरी है।
कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह और मोटापा भी जोखिम बढ़ाते हैं
शरीर के लिए कुछ मात्रा में कोलेस्ट्रॉल जरूरी होता है, लेकिन खून में एलडीएल यानी कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन का स्तर बढ़ने से रक्त वाहिकाओं में प्लाक बनने का खतरा बढ़ सकता है। समय के साथ रक्त वाहिकाएं संकरी हो सकती हैं और हृदय तक रक्त पहुंचने में परेशानी हो सकती है।इसी तरह मधुमेह और बढ़ा हुआ ब्लड शुगर भी हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों के जोखिम से संबंधित हैं। मोटापा, खासकर पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और रक्त में असामान्य वसा जैसी कई समस्याओं से जुड़ा हो सकता है।विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, अस्वस्थ खान-पान और शारीरिक निष्क्रियता जैसे व्यवहार से जुड़े जोखिम रक्तचाप, ब्लड शुगर, रक्त वसा और वजन बढ़ने जैसे मेटाबोलिक जोखिमों के रूप में सामने आ सकते हैं। आगे चलकर ये हार्ट अटैक, स्ट्रोक और दूसरी जटिलताओं का खतरा बढ़ा सकते हैं।

World Heart Day: हृदय की देखभाल रसोई से शुरू होती है
हृदय को स्वस्थ रखने के लिए किसी एक ‘सुपरफूड’ पर निर्भर रहने के बजाय पूरे खान-पान की गुणवत्ता पर ध्यान देना अधिक जरूरी है। भोजन में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, फलियां, मेवे और उचित मात्रा में स्वस्थ वसा शामिल की जा सकती है।वहीं, ज्यादा नमक, चीनी, ट्रांस फैट और अस्वस्थ वसा वाले भोजन को सीमित करना जरूरी है। बहुत ज्यादा प्रसंस्कृत और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का लगातार सेवन भी स्वस्थ आहार का हिस्सा नहीं माना जाता।भारतीय भोजन में भी आसानी से संतुलन बनाया जा सकता है। दाल, सब्जी, अनाज, सलाद, फल और जरूरत के अनुसार दूध या अन्य पौष्टिक चीजों को सही मात्रा और विविधता में शामिल किया जा सकता है। सबसे जरूरी बात भोजन के प्रकार, मात्रा और नियमितता के बीच संतुलन बनाए रखना है।
सिर्फ जिम नहीं, रोजाना सक्रिय रहना जरूरी
हृदय को स्वस्थ रखने के लिए जिम जाना अनिवार्य नहीं है। तेज चलना, साइकिल चलाना, तैरना, सीढ़ियों का इस्तेमाल करना, घर के काम करना और दूसरी नियमित शारीरिक गतिविधियां भी फायदेमंद हो सकती हैं।विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 से 300 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली एरोबिक शारीरिक गतिविधि या 75 से 150 मिनट की अधिक तीव्र गतिविधि करनी चाहिए। इसके अलावा सप्ताह में कम से कम दो दिन प्रमुख मांसपेशी समूहों को मजबूत करने वाली गतिविधियां भी उपयोगी मानी जाती हैं।जो लोग अभी बिल्कुल सक्रिय नहीं हैं, उन्हें अचानक बहुत ज्यादा व्यायाम शुरू करने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे गतिविधि बढ़ानी चाहिए। किसी बीमारी या विशेष चिकित्सकीय स्थिति में व्यायाम का प्रकार और मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करना उचित है।
World Heart Day: लंबे समय तक बैठना भी नुकसानदायक
डिजिटल काम के बढ़ने से लोगों की शारीरिक गतिविधि कम हुई है। कंप्यूटर, मोबाइल और दूसरी स्क्रीन के सामने कई घंटे लगातार बैठना अब सामान्य हो गया है।समस्या सिर्फ व्यायाम न करने की नहीं है। पूरे दिन लंबे समय तक बैठे रहना भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए काम के दौरान बीच-बीच में उठना, थोड़ी दूरी पैदल चलना, सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और शरीर को सक्रिय रखना जरूरी है।विश्व स्वास्थ्य संगठन भी लंबे समय तक निष्क्रिय रहने को कम करने और नियमित शारीरिक गतिविधि बढ़ाने पर जोर देता है।
तनाव और नींद का भी असर
आज की तेज जिंदगी में काम का दबाव, आर्थिक चिंता, पारिवारिक जिम्मेदारियां और डिजिटल दुनिया से लगातार जुड़े रहना तनाव बढ़ा सकता है। लगातार तनाव का असर नींद, खान-पान और शारीरिक गतिविधि जैसी स्वस्थ आदतों पर भी पड़ सकता है।इसलिए हृदय की सेहत के लिए मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। पर्याप्त नींद, नियमित दिनचर्या, ध्यान, योग, सामाजिक संबंध और मनोरंजन के लिए समय निकालना तनाव को संभालने में मदद कर सकता है। इसका उद्देश्य किसी बीमारी का खुद इलाज करना नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली को मजबूत करना है।
World Heart Day: धूम्रपान और तंबाकू से दूरी जरूरी
तंबाकू हृदय और रक्त वाहिकाओं के लिए प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है। धूम्रपान रक्त वाहिकाओं और हृदय की रक्त संचार प्रणाली को नुकसान पहुंचा सकता है।तंबाकू के धुएं का असर केवल धूम्रपान करने वाले व्यक्ति पर नहीं पड़ता, बल्कि उसके आसपास मौजूद लोगों पर भी हो सकता है। विश्व हृदय महासंघ भी तंबाकू नियंत्रण और धूम्रपान छोड़ने को हृदय स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण उपायों में शामिल करता रहा है।इसलिए तंबाकू छोड़ना केवल व्यक्ति की सेहत से जुड़ा फैसला नहीं है, बल्कि परिवार और समाज के स्वास्थ्य की रक्षा से भी जुड़ा कदम है।
महिलाओं के हृदय स्वास्थ्य पर भी ध्यान दें
लंबे समय तक हृदय रोगों को पुरुषों से अधिक जुड़ी समस्या माना जाता रहा, लेकिन महिलाओं में भी हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियां गंभीर स्वास्थ्य चुनौती हैं।महिलाओं में हृदय रोग के लक्षण कुछ मामलों में अलग तरीके से दिखाई दे सकते हैं। सीने में स्पष्ट दर्द के बजाय सांस फूलना, असामान्य थकान, मतली या अन्य लक्षण भी सामने आ सकते हैं।गर्भावस्था से जुड़ी कुछ स्वास्थ्य स्थितियां भविष्य में हृदय और रक्त वाहिका संबंधी जोखिम से जुड़ सकती हैं। वहीं, रजोनिवृत्ति के बाद भी स्वास्थ्य जोखिमों का दोबारा आकलन जरूरी हो सकता है।महिलाओं को नियमित रूप से रक्तचाप, ब्लड शुगर, लिपिड और वजन की जांच के साथ अपने व्यक्तिगत जोखिमों के बारे में डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
World Heart Day: युवाओं में भी बढ़ सकता है खतरा
कम उम्र में हृदय रोग का नाम सुनकर अक्सर लोग इसे असामान्य मानते हैं। लेकिन युवाओं में भी मोटापा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, तंबाकू का सेवन, शारीरिक निष्क्रियता और खराब खान-पान जैसे जोखिम मौजूद हो सकते हैं।इसका समाधान युवाओं को डराना नहीं, बल्कि बचपन से स्वस्थ जीवनशैली को सामान्य बनाना है। स्कूल और कॉलेजों में खेल, शारीरिक गतिविधि, पोषण शिक्षा और तंबाकू विरोधी जागरूकता को प्रभावी तरीके से बढ़ावा दिया जा सकता है।
प्रदूषण भी हृदय के लिए जोखिम
हृदय स्वास्थ्य की बात केवल खान-पान और व्यायाम तक सीमित नहीं है। वायु प्रदूषण भी हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ा पर्यावरणीय जोखिम है।लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने का संबंध हृदय और रक्त वाहिका संबंधी बीमारियों से पाया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी वायु प्रदूषण को हृदय रोग और स्ट्रोक के महत्वपूर्ण पर्यावरणीय जोखिम कारकों में शामिल करता है।इसलिए स्वच्छ हवा, पैदल चलने के लिए बेहतर शहर, सुरक्षित साइकिल मार्ग, खुले सार्वजनिक स्थान और हरित क्षेत्र केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी हैं।
World Heart Day: समय पर जांच से पता चल सकता है जोखिम
हृदय रोगों से बचाव में नियमित स्वास्थ्य जांच की महत्वपूर्ण भूमिका है। रक्तचाप, ब्लड शुगर, एचबीए1सी, लिपिड प्रोफाइल, वजन, कमर की परिधि और पारिवारिक इतिहास जैसी जानकारी व्यक्ति के जोखिम को समझने में मदद कर सकती है।हालांकि हर व्यक्ति के लिए एक जैसी जांच जरूरी नहीं होती। उम्र, पारिवारिक इतिहास, पहले से मौजूद बीमारी और अन्य जोखिमों के आधार पर डॉक्टर आवश्यक जांच तय कर सकते हैं।यदि किसी रिपोर्ट में कोई असामान्यता सामने आती है तो खुद से दवा शुरू करने के बजाय योग्य डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
हार्ट अटैक के संकेत पहचानें
हार्ट अटैक की स्थिति में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। सीने में दबाव, जकड़न या दर्द, दर्द का हाथ, कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक पहुंचना, सांस फूलना, अचानक पसीना आना, कमजोरी या मतली इसके चेतावनी संकेत हो सकते हैं।हर व्यक्ति में हार्ट अटैक के लक्षण एक जैसे नहीं होते। इसलिए गंभीर या नए लक्षणों को केवल गैस, थकान या सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत आपात चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
World Heart Day: सीपीआर और प्राथमिक सहायता की जानकारी जरूरी
कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक एक जैसी स्थिति नहीं हैं। कार्डियक अरेस्ट में हृदय की प्रभावी पंपिंग अचानक रुक जाती है। व्यक्ति बेहोश हो सकता है और सामान्य रूप से सांस नहीं ले सकता।ऐसी स्थिति में तुरंत सीपीआर और उपलब्ध होने पर एईडी का इस्तेमाल जीवन बचाने में महत्वपूर्ण हो सकता है। अगर ज्यादा से ज्यादा लोगों को बेसिक लाइफ सपोर्ट की ट्रेनिंग मिले तो अस्पताल पहुंचने से पहले आपात स्थिति में सहायता देने की क्षमता बढ़ सकती है।स्कूलों, कार्यालयों, सार्वजनिक संस्थानों और सामुदायिक संगठनों में प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण को बढ़ावा देना उपयोगी कदम हो सकता है।
आधुनिक उपचार से बदली तस्वीर
पिछले कुछ दशकों में हृदय रोगों के इलाज के क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है। आधुनिक कार्डियोलॉजी में दवाओं के साथ एंजियोप्लास्टी, स्टेंट, बाईपास सर्जरी, पेसमेकर, इम्प्लांटेबल उपकरण और आधुनिक इमेजिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।हालांकि आधुनिक इलाज उपलब्ध होने का मतलब यह नहीं है कि रोकथाम की जरूरत कम हो गई है। इलाज के बाद भी जीवनशैली में बदलाव, दवाओं का नियमित सेवन, डॉक्टर की निगरानी और पुनर्वास महत्वपूर्ण रहते हैं।
World Heart Day: डिजिटल तकनीक से निगरानी आसान
स्मार्टवॉच और दूसरे पहनने योग्य उपकरणों ने हृदय गति और शारीरिक गतिविधि पर नजर रखना आसान बनाया है। कुछ उपकरणों में ईसीजी जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।टेलीमेडिसिन और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं दूरदराज के क्षेत्रों में चिकित्सा सलाह की पहुंच बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। हालांकि डिजिटल उपकरण डॉक्टर की जगह नहीं ले सकते।किसी उपकरण में असामान्य रीडिंग आने पर उसका मतलब व्यक्ति की पूरी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर समझना जरूरी है। तकनीक निगरानी और जागरूकता बढ़ा सकती है, लेकिन बीमारी की पहचान और इलाज के लिए चिकित्सकीय जांच आवश्यक रहती है।
आयुर्वेद और योग के साथ संतुलित दृष्टिकोण
भारतीय परंपरा में भोजन, दिनचर्या, शारीरिक गतिविधि और मानसिक संतुलन को स्वास्थ्य से जोड़ा गया है। योग और ध्यान तनाव प्रबंधन तथा नियमित शारीरिक सक्रियता का हिस्सा हो सकते हैं।हालांकि किसी आयुर्वेदिक या हर्बल उत्पाद को केवल ‘प्राकृतिक’ होने के कारण पूरी तरह सुरक्षित मानना उचित नहीं है। अगर कोई व्यक्ति पहले से हृदय, रक्तचाप, मधुमेह या किसी अन्य बीमारी की दवा ले रहा है तो किसी भी पूरक उपचार या उत्पाद को लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।बिना चिकित्सकीय सलाह के प्रमाण-आधारित आधुनिक इलाज बंद करना भी उचित नहीं है।

World Heart Day: परिवार से शुरू हो सकती है हृदय की सुरक्षा
हृदय स्वास्थ्य की शुरुआत घर से भी की जा सकती है। परिवार में पौष्टिक भोजन को बढ़ावा देना, बच्चों को खेलने के लिए प्रोत्साहित करना, बुजुर्गों की नियमित जांच कराना, घर को तंबाकू-मुक्त रखना और आपात स्थिति में प्राथमिक सहायता की जानकारी रखना छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कदम हैं।अगर परिवार में कम उम्र में हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह या ऐसी ही किसी बीमारी का इतिहास रहा है, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी देना उपयोगी है। पारिवारिक इतिहास व्यक्ति के स्वास्थ्य जोखिम का आकलन करने का एक हिस्सा हो सकता है।
रोकथाम के लिए मिलकर करना होगा काम
हृदय रोगों को रोकने के लिए कोई एक उपाय पर्याप्त नहीं है। इसके लिए कई स्तरों पर एक साथ प्रयास करने की जरूरत है।व्यक्ति अपनी जीवनशैली में सुधार करे, परिवार स्वस्थ वातावरण बनाए, स्कूल और कार्यस्थल शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा दें और स्वास्थ्य व्यवस्था समय पर जांच व इलाज उपलब्ध कराए।विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, व्यवहार से जुड़े और पर्यावरणीय जोखिमों को कम करके बड़ी संख्या में हृदय और रक्त वाहिका संबंधी बीमारियों को रोका जा सकता है। तंबाकू से दूरी, स्वस्थ भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन पर नियंत्रण और जोखिम कारकों की समय पर पहचान इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
World Heart Day: भविष्य में व्यक्तिगत इलाज और एआई की भूमिका
हृदय रोगों के क्षेत्र में लगातार शोध हो रहा है। व्यक्तिगत जोखिम आकलन, जीनोमिक्स, आधुनिक इमेजिंग, पहनने योग्य उपकरण, दूरस्थ निगरानी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण भविष्य में बीमारी की पहचान और इलाज को ज्यादा व्यक्तिगत बनाने में मदद कर सकते हैं।विश्व हृदय महासंघ की 2026 की रिपोर्ट में जन्मजात हृदय रोग पर विशेष ध्यान दिया गया है। इससे यह भी पता चलता है कि हृदय स्वास्थ्य का दायरा केवल जीवनशैली से होने वाली बीमारियों तक सीमित नहीं है।भविष्य में तकनीक की भूमिका बढ़ने के साथ यह भी जरूरी होगा कि उसका लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे। आधुनिक इलाज का व्यापक स्वास्थ्य लाभ तभी संभव है जब समय पर जांच, जरूरी दवाएं और विशेषज्ञ चिकित्सा जरूरतमंद लोगों तक उपलब्ध हों।
स्वस्थ आदतें हैं हृदय की मजबूत सुरक्षा
विश्व हृदय दिवस सिर्फ एक दिन हृदय के बारे में बात करने का मौका नहीं है। यह अपने रोजमर्रा के जीवन की उन आदतों पर ध्यान देने का अवसर भी है, जो आने वाले वर्षों में हमारी सेहत को प्रभावित कर सकती हैं।हृदय रोगों का एक बड़ा हिस्सा जोखिम कारकों की समय पर पहचान और स्वस्थ जीवनशैली के जरिए रोका या नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए हृदय की देखभाल का मतलब केवल बीमारी होने के बाद इलाज कराना नहीं है, बल्कि बीमारी से पहले ही स्वास्थ्य की रक्षा करना भी है।
आज जब जिंदगी की रफ्तार बढ़ रही है और काम से लेकर मनोरंजन तक बहुत कुछ स्क्रीन पर निर्भर हो गया है, ऐसे में शरीर को सक्रिय रखना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, तनाव को बेहतर तरीके से संभालना, तंबाकू से दूरी, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की निगरानी तथा समय पर चिकित्सकीय जांच हृदय की सुरक्षा की मजबूत नींव हैं।
हृदय स्वास्थ्य व्यक्ति की जिम्मेदारी जरूर है, लेकिन यह केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं है। स्वस्थ भोजन की उपलब्धता, स्वच्छ हवा, सुरक्षित सार्वजनिक स्थान, शारीरिक गतिविधि के अवसर, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और बेहतर आपात चिकित्सा व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी हैं।इसलिए स्वस्थ हृदय के लिए व्यक्ति, परिवार, समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। हृदय की धड़कन हर पल हमें याद दिलाती है कि जीवन लगातार आगे बढ़ने का नाम है। इस गति को स्वस्थ बनाए रखने के लिए बीमारी का इंतजार करने के बजाय आज से ही छोटे-छोटे बदलाव शुरू करना जरूरी है।विश्व हृदय दिवस का संदेश यही है कि हृदय की देखभाल केवल एक दिन का संकल्प नहीं, बल्कि जीवनभर अपनाई जाने वाली स्वस्थ आदतों की निरंतर प्रक्रिया है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता और जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। किसी भी बीमारी, लक्षण, जांच या उपचार से संबंधित निर्णय लेने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह जरूर लें।









