Divya Mittal: उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा के बाद अब राजनीति में कदम रखने का ऐलान कर दिया है। करीब 13 साल तक सरकारी सेवा में रहने के बाद उन्होंने IAS पद से इस्तीफा दिया, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया। अब उनकी नई पारी उत्तर प्रदेश की राजनीति में शुरू होने जा रही है। खास बात यह है कि दिव्या मित्तल ने फिलहाल किसी राजनीतिक दल के साथ जाने के बजाय जनता के साथ सीधे राजनीति करने की बात कही है। ऐसे में उनकी एंट्री को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक नए राजनीतिक प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है।
कौन हैं पूर्व IAS दिव्या मित्तल?
दिव्या मित्तल 2013 बैच की IAS अधिकारी रही हैं। उन्होंने IIT दिल्ली और IIM बेंगलुरु से पढ़ाई की। विदेश में नौकरी करने के बाद उन्होंने भारत लौटकर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की और UPSC में 68वीं रैंक हासिल की। प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। संत कबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया की जिलाधिकारी के तौर पर भी उन्होंने काम किया।
Divya Mittal: मिर्जापुर में काम से बनी पहचान
दिव्या मित्तल को मिर्जापुर की जिलाधिकारी के रूप में भी काफी पहचान मिली। उनके कार्यकाल के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था और विकास से जुड़े कई मुद्दे चर्चा में रहे। प्रशासनिक सेवा के दौरान उनका फोकस जमीनी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन और आम लोगों से जुड़ी समस्याओं पर रहा। यही अनुभव अब उनकी राजनीतिक पारी में भी दिखाई देने की बात कही जा रही है।
IAS की नौकरी क्यों छोड़ी?
दिव्या मित्तल ने अगस्त 2026 में IAS से इस्तीफा दिया था। इसके बाद से ही उनके भविष्य को लेकर चर्चाएं चल रही थीं। अब उन्होंने खुद स्पष्ट कर दिया है कि वह राजनीति में आने जा रही हैं। उनका कहना है कि प्रशासन में रहते हुए उन्होंने लोगों की समस्याओं को करीब से देखा और कई बार यह महसूस किया कि केवल प्रशासनिक व्यवस्था के जरिए हर समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने राजनीति में आने का फैसला किया है।
Divya Mittal: किसी राजनीतिक पार्टी में जाएंगी या नहीं?
दिव्या मित्तल ने फिलहाल किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की बात नहीं कही है। उन्होंने साफ किया है कि वह किसी पार्टी के झंडे के बजाय लोगों के साथ मिलकर राजनीति करना चाहती हैं। यानी उनकी शुरुआती रणनीति किसी स्थापित राजनीतिक संगठन का हिस्सा बनने के बजाय सीधे जनता के बीच अपनी जगह बनाने की दिखाई दे रही है। हालांकि, आगे चलकर उनका राजनीतिक संगठन किस रूप में सामने आएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
जाति-धर्म से अलग क्या होगा एजेंडा?
दिव्या मित्तल ने अपनी राजनीतिक पारी के लिए कई जमीनी मुद्दों का जिक्र किया है। इनमें स्कूल, सड़क, रोजगार और पेपर लीक जैसे मुद्दे शामिल हैं। उन्होंने पैसे, बाहुबल और जाति-धर्म के प्रभाव से अलग जनता आधारित राजनीति की बात कही है। ऐसे में उनका घोषित एजेंडा विकास और आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों के इर्द-गिर्द दिखाई देता है। अब चुनौती इन मुद्दों को राजनीतिक संगठन और जनसमर्थन में बदलने की होगी।
Divya Mittal: UP 2027 से क्या है कनेक्शन?
दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। हालांकि, अभी उन्होंने यह घोषणा नहीं की है कि वह विधानसभा चुनाव लड़ेंगी या किसी खास सीट से मैदान में उतरेंगी। उन्होंने किसी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन को लेकर भी कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है। ऐसे में फिलहाल इतना तय है कि पूर्व IAS अधिकारी के रूप में पहचानी जाने वाली दिव्या मित्तल अब प्रशासनिक व्यवस्था के बाहर रहकर जनता के बीच राजनीतिक भूमिका निभाने की तैयारी में हैं। आने वाले समय में यह साफ होगा कि उनकी यह पहल चुनावी राजनीति का रूप लेती है या स्वतंत्र राजनीतिक मंच के तौर पर आगे बढ़ती है।
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