India Oil Import: रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अब नया कानूनी आधार मिल गया है। वह रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकते हैं। हाल के वर्षों में रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले देशों में चीन, भारत और तुर्किये शामिल रहे हैं। फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत लगातार रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है और यह सिलसिला अभी भी जारी है।
इससे पहले रूस से तेल खरीदने को लेकर ट्रंप की ओर से लगाए गए टैरिफ को अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने अवैध बताते हुए खारिज कर दिया था। कोर्ट ने ट्रंप को इस मामले में फटकार भी लगाई थी। हालांकि, इस बार स्थिति अलग है। रूस से तेल खरीदने पर टैरिफ लगाने से जुड़ा विधेयक अमेरिकी कांग्रेस से पारित हो चुका है और ट्रंप ने भी उस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यानी यह अब कानून बन चुका है। ऐसे में अगर ट्रंप भारत पर टैरिफ लगाते हैं तो उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देना पहले की तरह आसान नहीं होगा।
40 से ज्यादा देशों से तेल खरीदता है भारत
भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। इसके लिए वह 40 से अधिक देशों पर निर्भर है। ईरान-अमेरिका और इजराइल के बीच युद्ध शुरू होने से पहले भारत को बड़ी मात्रा में तेल खाड़ी देशों से मिलता था। इनमें सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई, कतर और ओमान शामिल थे।लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के बाद खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति या तो रुक गई है या फिर काफी कम हो गई है। सऊदी अरब से तेल लाने का एक दूसरा रास्ता बाब अल मंदेब भी था, लेकिन हूतियों के हमलों के बाद लाल सागर का यह मार्ग भी लगभग बंद हो गया है। ऐसे में खाड़ी देशों से भारत को होने वाली तेल आपूर्ति करीब-करीब ठप हो गई है।
अगर मौजूदा स्थिति यानी 2025 की बात करें तो भारत ने अपनी जरूरत का करीब 30 से 35 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से आयात किया है। यानी भारत के तेल आयात का लगभग एक-तिहाई हिस्सा रूस से आ रहा था। अगर यह आपूर्ति रुकती है और खाड़ी देशों से भी पर्याप्त कच्चा तेल नहीं मिलता है तो भारत के सामने ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।

India Oil Import: अमेरिका के कहने पर रूस से खरीदा था तेल
अब रूस से तेल खरीदने पर भारत पर डोनाल्ड ट्रंप 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकते हैं। दूसरी ओर, खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति पहले ही बेहद कम हो गई है। ऐसे में भारत के पास कच्चा तेल खरीदने के विकल्प लगातार सीमित होते जा रहे हैं।इस स्थिति के लिए भारत अकेला जिम्मेदार नहीं है। इसका एक बड़ा कारण अमेरिका और काफी हद तक पश्चिमी देशों से जुड़ी परिस्थितियां भी हैं। अगर ईरान पर हमला नहीं हुआ होता तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पहले की तरह खुला रहता और तेल की आपूर्ति पर इतना बड़ा असर नहीं पड़ता।
खास बात यह है कि भारत ने रूस से तेल खरीदना अपनी ओर से अचानक शुरू नहीं किया था। जब रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ था, तब अमेरिका में जो बाइडेन प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत से रूस से तेल खरीदने का अनुरोध किया था। इसके बाद भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदना शुरू किया।
भारत ने कहा- ऊर्जा जरूरतों पर समझौता नहीं
रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले भारत मॉस्को से कच्चा तेल नहीं खरीदता था। अब स्थिति यह है कि अमेरिका भारत से रूस का तेल नहीं खरीदने के लिए कह रहा है। हालांकि, भारत ने साफ कर दिया है कि वह किसी बाहरी दबाव में नहीं आएगा।भारत का कहना है कि अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए वह दुनिया में जहां भी सस्ता तेल उपलब्ध होगा, वहां से कच्चा तेल खरीदेगा। टैरिफ के मुद्दे पर भी भारत ने अमेरिका को स्पष्ट संदेश दिया है। नई दिल्ली ने कहा है कि अगर अमेरिका ने इस बार भारत पर टैरिफ लगाया तो इसका असर दोनों देशों के आपसी संबंधों पर पड़ेगा और रिश्ते पहले जैसे नहीं रह पाएंगे।

India Oil Import: दूर देशों से तेल खरीदना पड़ेगा महंगा
अमेरिका भारत को खाड़ी देशों से तेल खरीदने से नहीं रोक रहा है। भारत सऊदी अरब, यूएई, इराक और कुवैत जैसे देशों से तेल खरीद सकता है। लेकिन असली सवाल यह है कि वहां से तेल भारत तक पहुंचेगा कैसे, क्योंकि तेल लाने वाले प्रमुख समुद्री रास्ते प्रभावित हैं।अगर भारत अमेरिका, कनाडा, वेनेजुएला, ब्राजील, नाइजीरिया और अंगोला जैसे दूर के देशों से तेल खरीदना बढ़ाता है तो दूरी के कारण परिवहन लागत बढ़ सकती है। इससे भारत के लिए कच्चा तेल महंगा पड़ सकता है। साथ ही, इन देशों से नियमित रूप से तेल की आपूर्ति शुरू करने में भी समय लग सकता है।
विशेषज्ञों की राय है कि अमेरिका की परेशानी केवल इस बात से नहीं है कि भारत रूस से तेल क्यों खरीद रहा है। उनके अनुसार, एक वजह यह भी हो सकती है कि भारत अमेरिका से ज्यादा तेल क्यों नहीं खरीद रहा। ट्रंप के मन में इस बात को लेकर नाराजगी होने की बात कही जाती है। अगर भारत अमेरिका से होने वाले तेल आयात को मौजूदा 6-7 प्रतिशत से बढ़ाकर 15-20 प्रतिशत कर देता है तो संभव है कि अमेरिका की ओर से टैरिफ लगाने की बात आगे न बढ़े।
India Oil Import: अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है ऊर्जा की लगातार आपूर्ति
कुल मिलाकर, मौजूदा परिस्थितियों में भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए उपलब्ध आपूर्ति के रास्ते सीमित होते जा रहे हैं। किसी भी देश के विकास में ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह ऊर्जा कच्चे तेल, एलएनजी और पीएनजी जैसे स्रोतों से मिल सकती है।भारत की अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा का लगातार उपलब्ध रहना बेहद जरूरी है। अगर ऊर्जा की आपूर्ति बाधित होती है तो इसका सीधा असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। भारत अभी 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है और दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में मौजूद है।
भारत का लक्ष्य जल्द से जल्द जापान और जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना है। हालांकि, अगर ऊर्जा की आपूर्ति में रुकावट आती है तो इस लक्ष्य को हासिल करने में देरी हो सकती है। इसके बावजूद भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कोई न कोई वैकल्पिक रास्ता निकालने की कोशिश करेगा।









