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यूपी राज्यसभा चुनाव में कौन बना सकता है समीकरण? एक्स्ट्रा वोट से लेकर क्रॉस वोटिंग तक पूरा खेल

राज्यसभा चुनाव में बीजेपी-सपा का वोट गणित

UP Rajya Sabha Election: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है। इस बार मुकाबला केवल सीटों की संख्या तक सीमित नहीं है। चुनाव में किस दल के पास कितने अतिरिक्त वोट बचते हैं और मतदान के दौरान क्रॉस वोटिंग होती है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण होगा। भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए और समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन अपने-अपने उम्मीदवारों के लिए विधायकों के समर्थन का आंकड़ा जुटाने में लगा है। मौजूदा संख्या के आधार पर कुछ सीटों का गणित स्पष्ट दिखाई देता है, लेकिन अतिरिक्त वोटों की स्थिति आखिरी नतीजे पर असर डाल सकती है। खासतौर पर एनडीए की 8वीं और सपा की 3वीं सीट के लिए यह गणित महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

UP Rajya Sabha Election: पहले समझिए राज्यसभा चुनाव का गणित

उत्तर प्रदेश विधानसभा की प्रभावी संख्या 397 बताई जा रही है। 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में एक उम्मीदवार को जीत के लिए 37 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में किसी पार्टी या गठबंधन के पास मौजूद कुल विधायकों के साथ-साथ बचने वाले अतिरिक्त वोट भी अहम हो जाते हैं।इसे एक उदाहरण से समझें। अगर किसी गठबंधन के पास 74 वोट हैं तो वह 2 उम्मीदवारों को 37-37 वोट देकर राज्यसभा भेज सकता है। इसके बाद बचे वोट तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए पर्याप्त हैं या नहीं, यही अगला सवाल होगा।

एनडीए के पास कितने वोट हैं?

दिए गए आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश विधानसभा में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 289 विधायक हैं। इनमें भाजपा के 256, अपना दल (सोनेलाल) के 13, निषाद पार्टी के 5, राष्ट्रीय लोक दल के 9 और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के 6 विधायक शामिल हैं।इस संख्या के आधार पर एनडीए 7 उम्मीदवारों को राज्यसभा भेजने की स्थिति में है। 7 सीटों के लिए 259 वोट की जरूरत होगी। यानी 7 उम्मीदवारों को जिताने के बाद एनडीए के पास 30 वोट अतिरिक्त बचेंगे। 8वीं सीट के लिए उसे 7 और वोटों की जरूरत होगी।

हालांकि, अगर जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के 2 और 3 निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी एनडीए को मिलता है, तो उसका आंकड़ा 294 तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में 7 सीटों के बाद उसके पास 35 वोट बचेंगे और 8वीं सीट के लिए केवल 2 अतिरिक्त वोटों की जरूरत रह जाएगी। इसी वजह से मतदान के दौरान क्रॉस वोटिंग की संभावना को भी चर्चा में रखा जा रहा है।

UP Rajya Sabha Election: राज्यसभा चुनाव में बीजेपी-सपा का वोट गणित
राज्यसभा चुनाव में बीजेपी-सपा का वोट गणित
UP Rajya Sabha Election: सपा के सामने तीसरी सीट का गणित

समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले खेमे के पास 103 विधायक बताए जा रहे हैं। इनमें सपा के 101 और कांग्रेस के 2 विधायक शामिल हैं। 103 वोटों के साथ यह गठबंधन 2 उम्मीदवारों को राज्यसभा भेज सकता है। 2 सीटों के लिए 74 वोट इस्तेमाल होने के बाद उसके पास 29 वोट बचेंगे।तीसरे उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए 37 वोट चाहिए होंगे। यानी सपा गठबंधन को अपने पास मौजूद 29 अतिरिक्त वोटों के अलावा 8 और वोट जुटाने होंगे। ऐसे में पार्टी की रणनीति केवल अपने विधायकों के समर्थन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दूसरे खेमे के संभावित समर्थन और क्रॉस वोटिंग पर भी नजर रह सकती है।

किस पार्टी ने कितने नामांकन पत्र खरीदे?

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए सपा की ओर से 3 नामांकन पत्र खरीदे गए हैं। वहीं भाजपा 8 उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की तैयारी में है। ऐसे में 10वीं सीट के लिए चुनाव होना तय माना जा रहा है और मुकाबला निर्विरोध रहने की स्थिति नहीं बनती। इसी वजह से अतिरिक्त वोटों और क्रॉस वोटिंग का मुद्दा भी चर्चा में है।

UP Rajya Sabha Election: क्रॉस वोटिंग क्यों बदल सकती है पूरा खेल?

राज्यसभा चुनाव में विधायक उम्मीदवारों को प्राथमिकता के आधार पर वोट देते हैं। जब प्रमुख दल कई सीटों पर अपने उम्मीदवारों को जिताने के बाद कुछ अतिरिक्त वोट बचा लेते हैं, तब दूसरे खेमे के कुछ विधायकों का अलग उम्मीदवार के पक्ष में मतदान चुनावी गणित को बदल सकता है।ऐसी स्थिति में कुछ अतिरिक्त वोट किसी उम्मीदवार को जीत के लिए जरूरी संख्या तक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। इसलिए इस चुनाव में विधायकों के रुख पर भी नजर रहेगी।

2024 में भी सामने आया था क्रॉस वोटिंग का असर

उत्तर प्रदेश में फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग का उदाहरण देखने को मिला था। उस चुनाव में भाजपा ने 10 में से 8 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि सपा को 2 सीटें मिली थीं। भाजपा ने 8वां उम्मीदवार उतारकर मुकाबला कराया था और सपा के कम से कम 7 विधायकों के क्रॉस वोट करने की रिपोर्ट सामने आई थी।2024 के चुनाव में भाजपा को अपने आठवें उम्मीदवार को जिताने के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत थी। मतदान के बाद भाजपा के उम्मीदवार को जीत मिली और सपा के तीसरे उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। इस पुराने घटनाक्रम को देखते हुए इस बार भी क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है।

UP Rajya Sabha Election: आरएलडी और सुभासपा के विधायकों पर सपा की नजर

इस बार समाजवादी पार्टी की रणनीति में उसके पुराने सहयोगी रहे राष्ट्रीय लोक दल के विधायक भी चर्चा में हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा और आरएलडी के बीच गठबंधन था। उस समय आरएलडी के 3 विधायक सपा के साथ गठबंधन का हिस्सा थे।इसके अलावा सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के कुछ विधायकों को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। अब्बास अंसारी, जगदीश नारायण राय, दुधराम और हंसू राम जैसे नामों का जिक्र किया जा रहा है। हालांकि, किसी भी विधायक का अंतिम रुख मतदान के समय ही स्पष्ट होगा।सपा की रणनीति केवल विपक्षी खेमे के समर्थन को मजबूत करने तक सीमित नहीं रह सकती। पार्टी एनडीए के ऐसे विधायकों से भी संपर्क करने की कोशिश कर सकती है, जिनके लिए 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकती है।

अपना दल कमेरावादी का रुख भी अहम

इस चुनाव में अपना दल कमेरावादी की भूमिका को लेकर भी चर्चा है। सिराथू की विधायक पल्लवी पटेल का नाम इस संदर्भ में सामने आ रहा है। उन्होंने 2022 का विधानसभा चुनाव सपा के टिकट पर जीता था।हाल ही में पल्लवी पटेल और अखिलेश यादव की मुलाकात भी हुई है। इसके बाद दोनों के बीच रिश्तों में सुधार को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हुई है। इसी आधार पर यह भी कहा जा रहा है कि उनका रुख सपा के पक्ष में जा सकता है। हालांकि, यह अभी राजनीतिक चर्चा और दावे के स्तर पर है और अंतिम स्थिति मतदान के दौरान ही स्पष्ट होगी।

UP Rajya Sabha Election: बसपा के लिए क्या बदलेगा?

राज्यसभा चुनाव का एक पहलू बहुजन समाज पार्टी से भी जुड़ा है। मौजूदा विधानसभा में बसपा के पास कोई विधायक नहीं होने की स्थिति में पार्टी के लिए उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य चुनना संभव नहीं होगा।बसपा के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह का अगस्त में निधन हो गया था। वहीं पार्टी के मौजूदा राज्यसभा सदस्य रामजी गौतम का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, रामजी गौतम 2020 में भाजपा के समर्थन से राज्यसभा पहुंचे थे।इस चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में बसपा का प्रतिनिधित्व समाप्त होने की स्थिति बन सकती है।

किन राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है?

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के 10 में से 8 पद फिलहाल भाजपा के पास हैं, जबकि 1-1 सीट सपा और बसपा के पास है। इन सीटों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होना है। इनमें भाजपा के बृज लाल, गीता शाक्य, हरदीप सिंह पुरी, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, अरुण सिंह और बीएल वर्मा शामिल हैं। भाजपा के दिनेश शर्मा की सीट 11 सितंबर को उनके अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल नियुक्त होने के बाद इस्तीफा देने से पहले ही खाली हो चुकी है।समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सदस्य रामगोपाल यादव का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। वहीं बसपा के रामजी गौतम का कार्यकाल भी नवंबर में खत्म होगा।

UP Rajya Sabha Election: 16 अक्टूबर को होगा मतदान

चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। मतदान 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा। इसके बाद उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी।नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और उम्मीदवार 9 अक्टूबर तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। चुनाव प्रक्रिया 19 अक्टूबर तक पूरी कर ली जाएगी।

8वीं और 3वीं सीट पर नजर

मौजूदा संख्या बल को देखें तो एनडीए के लिए 7 और सपा गठबंधन के लिए 2 सीटों का गणित बनता है। इसके बाद बचने वाले वोटों की संख्या ही अगली सीटों के लिए अहम हो जाती है।एनडीए की 8वीं सीट के लिए अतिरिक्त वोट जुटाना जरूरी होगा। वहीं सपा गठबंधन के सामने 3वीं सीट के लिए अपने 29 अतिरिक्त वोटों के अलावा कम से कम 8 और वोट हासिल करने की जरूरत होगी। ऐसे में इस चुनाव में केवल विधायकों की संख्या ही नहीं, बल्कि अतिरिक्त समर्थन, गठबंधन के बाहर से मिलने वाले वोट और मतदान के दौरान विधायकों का वास्तविक रुख भी महत्वपूर्ण रहेगा।