Brijbhushan Sharan Singh: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग को लेकर खींचतान जारी है। इसी बीच बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के एक बयान ने नई चर्चा छेड़ दी है। कांग्रेस की 150 सीटों की दावेदारी पर उन्होंने कहा- ‘अखिलेश के बिना सब सूना है।’ आखिर इस बयान के मायने क्या हैं और क्या इसे किसी नए राजनीतिक समीकरण के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है? समझिए पूरा मामला।
कांग्रेस की 150 सीटों की दावेदारी क्या है?
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे पर बातचीत अभी अंतिम मुकाम तक नहीं पहुंची है। कांग्रेस की ओर से यूपी की 403 विधानसभा सीटों में कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदारी सामने आई है। कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा है कि सीट शेयरिंग पर अक्टूबर में चर्चा को अंतिम रूप देने की कोशिश होगी।
Brijbhushan Sharan Singh: इसी सवाल पर बृजभूषण ने क्या कहा?
इसी सीट बंटवारे को लेकर जब पूर्व बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह से सवाल किया गया तो उन्होंने कांग्रेस की 150 सीटों की दावेदारी पर कहा- ‘अखिलेश के बिना सब सूना है।’ बृजभूषण के इस छोटे से बयान ने इसलिए ध्यान खींचा क्योंकि उस समय सपा-कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग को लेकर चर्चा चल रही है और अखिलेश यादव 30 सितंबर की INDIA ब्लॉक बैठक में खुद शामिल नहीं हुए। उनकी जगह सपा की ओर से प्रतिनिधि भेजा गया।
क्या बृजभूषण ने अखिलेश की तारीफ की?
बयान को कई रिपोर्टों में अखिलेश यादव के प्रति बृजभूषण के नरम रुख से जोड़कर देखा गया है। दरअसल, अगस्त में एक इंटरव्यू के दौरान जब बृजभूषण से पूछा गया था कि वह अखिलेश यादव को लेकर ‘सॉफ्ट’ क्यों दिखाई देते हैं, तो उन्होंने जवाब दिया था कि ‘अखिलेश यादव भी मुझे लेकर सॉफ्ट रहते हैं।’ उसी बातचीत में उन्होंने बीजेपी छोड़कर सपा में जाने की संभावना से इनकार किया था।
Brijbhushan Sharan Singh: बृजभूषण के बयान का संदर्भ क्या है?
बृजभूषण का ताजा बयान ऐसे समय आया है जब सपा और कांग्रेस के बीच सबसे बड़ा सवाल सीटों की संख्या को लेकर है। कांग्रेस ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, जबकि सीट शेयरिंग का अंतिम फॉर्मूला अभी तय नहीं हुआ है। कांग्रेस की ओर से 150 से अधिक सीटों की दावेदारी सामने आने के बाद सपा के कुछ नेताओं ने भी इस मांग पर सवाल उठाए हैं। सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने कांग्रेस से जमीनी स्थिति को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक नजरिया अपनाने की बात कही थी।
अखिलेश बैठक से क्यों दूर रहे?
30 सितंबर को INDIA ब्लॉक की बैठक में अखिलेश यादव खुद शामिल नहीं हुए। सपा ने अपनी ओर से प्रतिनिधि भेजा। उनकी गैरमौजूदगी के पीछे व्यस्त कार्यक्रम और राज्यसभा चुनाव की तैयारियों का संदर्भ दिया गया है, जबकि कुछ रिपोर्टों में इसे सपा-कांग्रेस के बीच चल रही सीट शेयरिंग की बातचीत से भी जोड़कर देखा गया। इसलिए सिर्फ बैठक में अखिलेश की गैरमौजूदगी को किसी टूट या गठबंधन खत्म होने का संकेत मानना अभी जल्दबाजी होगी। सीटों पर बातचीत जारी है और कांग्रेस ने अक्टूबर में फॉर्मूला तय करने की बात कही है।

बृजभूषण का बयान नए राजनीतिक समीकरण का संकेत है?
यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है। ‘अखिलेश के बिना सब सूना है’ जैसे बयान की राजनीतिक व्याख्या जरूर हो रही है। अगस्त में उन्होंने खुद पार्टी बदलने की अटकलों को खारिज किया था। इसलिए फिलहाल उनके बयान को अखिलेश की राजनीतिक भूमिका पर उनकी व्यक्तिगत टिप्पणी के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा।
Brijbhushan Sharan Singh: अखिलेश को लेकर पहले दे चुके बयान बृजभूषण
यह पहली बार नहीं है जब बृजभूषण ने अखिलेश यादव को लेकर ऐसा रुख दिखाया है। अगस्त 2026 में यूपी चुनाव को लेकर एक इंटरव्यू में उनसे पूछा गया था कि क्या मुकाबला योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच होगा। उन्होंने जवाब दिया था कि इस बार ‘लड़ाई’ है और मुकाबला एकतरफा नहीं होगा। इससे पहले भी उन्होंने अखिलेश के प्रति अपने नरम रुख को लेकर कहा था कि दोनों एक-दूसरे के प्रति सॉफ्ट रहते हैं। इसलिए ताजा बयान को उनके पहले के बयानों की कड़ी में भी देखा जा रहा है।
फिर ‘सॉफ्ट कॉर्नर’ की चर्चा क्यों?
राजनीति में किसी नेता के दूसरे दल के नेता के बारे में सकारात्मक टिप्पणी को कई तरह से देखा जाता है। बृजभूषण बीजेपी से जुड़े रहे हैं और अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। ऐसे में बीजेपी से जुड़े एक बड़े नेता का सपा प्रमुख के बारे में ‘अखिलेश के बिना सब सूना है’ कहना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। लेकिन बयान से आगे बढ़कर इसके पीछे कोई निश्चित राजनीतिक रणनीति या मकसद कई तरह के अनुमान लगाए जा रहे है।
Brijbhushan Sharan Singh: क्या इसे राज्यसभा के ‘तीसरे उम्मीदवार’ से जोड़ना सही है?
इसी बीच सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में अखिलेश यादव के राज्यसभा चुनाव में किसी ‘चौंकाने वाले’ तीसरे उम्मीदवार के संकेत को लेकर भी अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन सपा के तीसरे उम्मीदवार को लेकर कई नामों की चर्चा है और बृजभूषण शरण सिंह का तेजी के साथ चर्चा में चला रहा है। अब देखना होगा कि अखिलेश यादव राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदवार के रूप किसको टिकट देते है। आने वाले समय पता लगा जाएगा।
सपा-कांग्रेस के सामने असली चुनौती क्या है?
अभी सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोनों दल सीटों का ऐसा फॉर्मूला कैसे तय करते हैं, जिस पर दोनों सहमत हों। कांग्रेस 150 से अधिक सीटों पर दावा कर रही है और अक्टूबर में सीट शेयरिंग पर चर्चा पूरी करने की बात कही गई है। दूसरी ओर, सपा की रणनीति अपने संगठन और चुनावी ताकत के हिसाब से सीटों का बंटवारा तय करने की है। यानी बृजभूषण का बयान चर्चा में जरूर है, लेकिन सपा-कांग्रेस के सामने वास्तविक राजनीतिक चुनौती अभी भी सीटों की संख्या और गठबंधन के फॉर्मूले की है।
‘अखिलेश के बिना सब सूना है’ का फिलहाल मतलब क्या?
बृजभूषण शरण सिंह के बयान ने यूपी की राजनीति में नई चर्चा जरूर पैदा कर दी है। उनके पुराने बयानों को देखते हुए अखिलेश यादव को लेकर उनका नरम रुख नया नहीं है। दूसरी तरफ सपा-कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग अभी बातचीत के दौर में है। इसलिए आने वाले दिनों में असली तस्वीर सीट बंटवारे के फॉर्मूले और नेताओं के अगले कदम से ही साफ होगी। फिलहाल ‘अखिलेश के बिना सब सूना है’ एक ऐसा राजनीतिक बयान है, जिसने सीट शेयरिंग की बहस के बीच बृजभूषण शरण सिंह और अखिलेश यादव के रिश्तों को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
पत्रकार ने बृजभूषण सिंह से सवाल किया – कांग्रेस कह रही है यूपी में गठबंधन में कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे
बृजभूषण सिंह का जवाब – अखिलेश के बिना सब सूना है pic.twitter.com/pguozvxbUM
— Gaurav Kumar (@gaurav1307kumar) September 30, 2026









