Opinion: एक अच्छे राजनेता को हर स्थिति में धैर्य रखना होता है। यह धैर्य राजनेता की रणनीतिक समझ, दूरदृष्टि और आत्मबल का परिचय देता है। यही कारण है कि कई बार बड़े धैर्य का परिचय देते हुए भविष्य की बड़ी लड़ाई लड़ने के लिेए वर्तमान की छोटी लड़ाइयों को छोड़ देना ही उचित होता है। तात्कालिक छोटे लाभ के लिए लालायित रहने के बजाय धैर्यपूर्वक सोचना होता है कि भविष्य में इसके क्या नुकसान हो सकते हैं? सोचना होता है कि आज का फैसला कहीं कल के लिए उल्टा न पड़ जाय।
वर्षों पुराने रिश्तों को तिलांजलि देने की भूल
आज कांग्रेस नेता राहुल गांधी राष्ट्रीय राजनीति में NDA के खिलाफ INDIA ब्लॉक को खड़ा करने की कोशिश तो कर रहे हैं, लेकिन उन्हें थोड़ा पीछे मुड़कर देखने की भी जरूरत है।यदि कांग्रेस ने तमिलनाडु में विजय थलपति सरकार में शामिल होने का मोह न दिखाया होता, तो आज द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) भी दिल्ली में INDIA ब्लॉक की उस बैठक में शामिल हो सकता थी जिसे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के उद्देश्य से बुलाया गया। आखिर DMK बैठक में शामिल भी क्यों होती, डीएमके कैसे भूल सकती है कि कांग्रेस ने तमिलनाडु में सत्ता सुख के लिए उसके साथ अपने वर्षों पुराने रिश्तों को तिलांजलि देने में जरा भी संकोच नहीं किया? तब डीएमके ने कांग्रेस को धोखेबाज तक करार दिया था, लेकिन कांग्रेस पर कोई फर्क नहीं पड़ा और उसने अपने नए दोस्त TVK के साथ सरकार में शामिल होना सही समझा।
Opinion: नेतृत्व की सबसे बड़ी चुनौती
कांग्रेस को तब बेशक राज्य की सत्ता दिख रही थी, लेकिन आज पार्टी नेतृत्व का वही निर्णय बड़ी लड़ाई लड़ने के रास्ते में रुकावट साबित हो रहा है। क्या INDIA ब्लॉक में शामिल पार्टियों के नेताओं के दिलो-दिमाग में यह सवाल नहीं कौंध सकता है कि जब कांग्रेस नेतृत्व ने तात्कालिक लाभ के लिए अपने उस पुराने दोस्त को छोड़ दिया जिसके 22 लोकसभा और 8 राज्यसभा सांसद महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदन में भी मददगार साबित होते, तो फिर कल के दिन अनुकूल मौका मिलने पर कांग्रेस अन्य दलों के साथ कैसे न्याय की गारांटी दे सकती है? नेतृत्व की सबसे बड़ी चुनौती यही होती है वह कैसे अपने दोस्तों का विश्वास बनाए रखकर लड़ाई को अंजाम तक पहुंचा पाता है।
Opinion: सवाल विश्वसनीयता का
राहुल गांधी के लिए मंथन का समय है कि दक्षिण में डीएमके जैसी बड़ी पार्टी साथ नहीं रही और उत्तर में सपा जैसी पार्टी जिसके साथ यूपी चुनाव में गठबंधन होने जा रहा है, वह भी क्यों खुलकर साथ नहीं है? आम आदमी पार्टी( AAP) भी स्पष्ट कर चुकी है कि वह INDIA गठबंधन हिस्सा नहीं है। उन्हें समझना होगा कि विपक्षी दलों की अपनी-अपनी प्रथामिकताएं होती हैं, ठीक वैसी ही जैसी कि कांग्रेस ने तमिलनाडु में TVK सरकार का हिस्सा बनने में तय की थी।यदि राहुल गांधी वास्तव में INDIA ब्लॉक को मजबूत कर NDA के खिलाफ विकल्प देना चाहते हैं, तो उन्हें सहयोगी दलों की विश्वसनीयता हर हाल में बनाए रखनी होगी।









