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अमित शाह ने क्यों उठाया ‘चिट्टा मुक्त पंजाब’ का मुद्दा? 2029 की डेडलाइन, 2027 चुनाव और BJP के अभियान का कनेक्शन

Amit Shah

Amit Shah: पंजाब की राजनीति में नशे का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। जालंधर में 30 सितंबर को हुई रैली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को ‘चिट्टा मुक्त’ करने का लक्ष्य घोषित किया। उन्होंने कहा कि आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ‘नशा मुक्त पंजाब’ के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी। इस ऐलान के साथ ही नशे के खिलाफ BJP का अभियान सीधे 2027 के विधानसभा चुनाव से जुड़ता दिखाई दे रहा है।

अमित शाह ने क्यों उठाया चिट्टे का मुद्दा?

अमित शाह ने पंजाब की पहचान किसानों, जवानों और गुरुओं की धरती के रूप में बताते हुए कहा कि राज्य के सामने अब नशे की चुनौती है। उनके भाषण में युवाओं को नशे से मुक्त करने और नशे के कारोबार पर कार्रवाई का मुद्दा प्रमुख रहा। उन्होंने यह भी कहा कि नशे के साथ-साथ महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे विषय भी पंजाब के विकास से जुड़े हैं।

Amit Shah: 31 दिसंबर 2029 की डेडलाइन क्यों चर्चा में?

अमित शाह ने स्पष्ट समयसीमा देते हुए कहा कि 31 दिसंबर 2029 से पहले पंजाब को चिट्टे से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही उन्होंने नशीले पदार्थों का कारोबार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही। यह डेडलाइन एक राजनीतिक वादे के साथ-साथ नशे के खिलाफ अभियान के लिए तय की गई समयसीमा के तौर पर पेश की गई है।

2027 के चुनाव से क्या है कनेक्शन?

पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है। ऐसे में BJP ने नशे के मुद्दे को अभी से अपने चुनावी अभियान के प्रमुख विषयों में शामिल करने का संकेत दिया है। जालंधर रैली में अमित शाह ने कहा कि BJP आने वाला विधानसभा चुनाव ‘नशा मुक्त पंजाब’ के मुद्दे पर लड़ेगी। इस तरह 2029 का लक्ष्य और 2027 का चुनाव एक ही राजनीतिक नैरेटिव से जुड़ते हैं।

Amit Shah: 4 हजार किलोमीटर की यात्रा का क्या मतलब?

इस ऐलान से पहले BJP ने 18 सितंबर से ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ शुरू की थी। चार अलग-अलग रूट से निकली यात्राओं ने करीब 4 हजार किलोमीटर की दूरी तय करते हुए पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों को कवर किया। 13 दिन तक चले इस अभियान का समापन जालंधर में अमित शाह की रैली के साथ हुआ।

BJP ने नशे को बनाया चुनावी मुद्दा

BJP के इस अभियान में केवल नशा ही नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे भी उठाए गए। पार्टी ने इसे जन-अभियान के रूप में पेश किया और राज्य के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचने की कोशिश की। चुनाव से काफी पहले सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों तक यात्रा ले जाना BJP के संगठनात्मक और राजनीतिक अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

Amit Shah: AAP और कांग्रेस पर भी अमित शाह का निशाना

जालंधर रैली में अमित शाह ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर नशे की समस्या को लेकर आरोप लगाए और कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने जनता से BJP को मौका देने की अपील करते हुए कहा कि सत्ता मिलने पर नशे के कारोबार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, राज्य सरकार और अन्य दलों की ओर से इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दावे और प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में 2027 के चुनाव में नशे का मुद्दा कितना प्रमुख रहता है, यह आगे के राजनीतिक अभियान और दलों के घोषणापत्रों से स्पष्ट होगा।

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