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राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर क्यों लगाया जोर: इस्तीफा नहीं हुआ तो क्या होगा, समझिए विपक्ष का प्लान

वोट चोरी मुद्दे पर राहुल गांधी का मार्च
वोट चोरी मुद्दे पर राहुल गांधी का मार्च

Opposition Protest: ‘ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो’ के नारे के साथ राहुल गांधी मंगलवार सुबह चुनाव आयोग की ओर मार्च करने निकले। राहुल गांधी ने दावा किया कि उनके साथ लोकसभा और राज्यसभा के करीब 300 विपक्षी सांसद सड़क पर मौजूद हैं। पुलिस ने जब उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश की, तो वह आकाशवाणी भवन में जाकर बैठ गए। करीब 8 घंटे बाद दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी को हिरासत में ले लिया। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को विपक्ष ने अब अपनी राजनीतिक लड़ाई का बड़ा मुद्दा बना लिया है।

Opposition Protest: चुनाव में गड़बड़ी के आरोप

विपक्ष के इस विरोध के पीछे चुनावों में कथित गड़बड़ी और चुनाव आयोग पर पक्षपात के आरोप मुख्य वजह हैं। महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव के बाद राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि डुप्लीकेट वोटर और एक ही पते पर कई मतदाताओं के नाम जैसी गड़बड़ियों के कारण कांग्रेस को चुनाव में नुकसान हुआ। राहुल गांधी के अलावा ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग पर बीजेपी की मदद करने और विपक्ष को चुनाव में हराने के आरोप लगाए हैं।

चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप

महाराष्ट्र में शिवसेना के विभाजन के बाद फरवरी 2023 में चुनाव आयोग ने पार्टी का पारंपरिक चुनाव निशान ‘धनुष-बाण’ एकनाथ शिंदे के गुट को दे दिया था। शिंदे गुट बाद में बीजेपी के साथ चला गया था, जबकि उद्धव ठाकरे के गुट को नया चुनाव निशान ‘मशाल’ मिला। इसी तरह एनसीपी के विभाजन के बाद बीजेपी के साथ गए अजित पवार गुट को पार्टी का पारंपरिक चुनाव निशान ‘घड़ी’ मिला। बंगाल चुनाव के बाद टीएमसी में विभाजन हुआ तो चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को पुराने चुनाव निशान के इस्तेमाल से रोक दिया।विपक्ष इन घटनाओं को चुनाव आयोग के पक्षपात से जोड़ रहा है। राहुल गांधी ने इसे ‘पार्टी चोरी’ करार देते हुए आरोप लगाया था कि पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब टीएमसी में भी एक जैसा पैटर्न देखने को मिल रहा है। उनके मुताबिक बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर पार्टियों में विभाजन कराते हैं और फिर पार्टी का चुनाव निशान छीन लिया जाता है।ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक है। इस दौरान 20 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। विपक्ष का कहना है कि ज्ञानेश कुमार के पद पर रहते निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं होंगे। 23 सितंबर को ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट सामने आने के बाद इस विवाद ने और जोर पकड़ लिया और विपक्ष ने आंदोलन तेज कर दिया।

Opposition Protest: राहुल गांधी के आंदोलन के पीछे क्या रणनीति?

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर राहुल गांधी लगातार सक्रिय हैं। पिछले करीब दो साल से वह चुनावों में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। 7 अगस्त 2025 को उन्होंने इस मुद्दे पर पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिसमें महादेवपुरा सीट पर कथित गड़बड़ी के सबूत पेश किए गए थे। इसके बाद सितंबर में उन्होंने कर्नाटक और महाराष्ट्र चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाए और नवंबर 2025 में हरियाणा चुनाव को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। 23 सितंबर 2026 को ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट में चुनाव आयोग से जुड़े खुलासे सामने आने के अगले दिन राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर चौथी प्रेस कॉन्फ्रेंस की।राजनीतिक विशेषज्ञ रशीद किदवई का कहना है कि राहुल गांधी को इस मुद्दे पर शुरुआत करने का फायदा मिल सकता है। उन्होंने बिहार चुनाव से पहले यह मुद्दा उठाया था और अब जब यह बड़ा राजनीतिक विषय बन गया है, तो इसका राजनीतिक लाभ भी उन्हें मिल सकता है। राहुल गांधी ने बिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ भी निकाली थी। 16 दिनों की इस यात्रा में उन्होंने 20 जिलों को कवर किया था और सासाराम में तेजस्वी यादव के साथ भी नजर आए थे।

Opposition Protest: वोट चोरी मुद्दे पर राहुल गांधी का मार्च
वोट चोरी मुद्दे पर राहुल गांधी का मार्च
Opposition Protest: इंडिया गठबंधन को साथ रखने की कोशिश

‘वोट चोरी’ का मुद्दा विपक्षी गठबंधन को एकजुट रखने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। जुलाई 2023 में कांग्रेस, डीएमके, आम आदमी पार्टी समेत 23 दलों ने मिलकर ‘इंडिया’ गठबंधन बनाया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में इन दलों ने मिलकर चुनाव लड़ा था और बीजेपी 240 सीटों पर सिमट गई थी।अलग-अलग मुद्दों पर गठबंधन के दलों के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं, लेकिन ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर ज्यादातर विपक्षी दल एक साथ दिखाई दे रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ आदेश रावल के मुताबिक राहुल गांधी का लक्ष्य 2029 का लोकसभा चुनाव है। वह चाहते हैं कि 543 लोकसभा सीटों पर बीजेपी के खिलाफ इंडिया गठबंधन का केवल एक उम्मीदवार मैदान में उतरे।प्रदर्शन के दौरान टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, एनसीपी-एसपी सांसद सुप्रिया सुले और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी एक-दूसरे का हाथ पकड़कर साथ चलती नजर आईं।

युवाओं तक पहुंचने की कोशिश

इस मुद्दे को युवाओं और जेन-जी से जोड़ने की कोशिश भी की जा रही है। दिल्ली में पेपर लीक के खिलाफ हुए ‘जेन-जी प्रोटेस्ट’ के बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई थी। इसी तर्ज पर सीजेपी ने एक बार फिर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई है। प्रदर्शन में जुट रहे युवाओं के अलावा आम लोगों के बीच भी यह मुद्दा चर्चा में है।राहुल गांधी एसआईआर प्रक्रिया, फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी जैसे तकनीकी मुद्दों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए ‘सेव माय वोट’ और ‘वोट चोरी’ जैसे नारों का इस्तेमाल किया जा रहा है।राजनीतिक कार्यकर्ता और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद के मुताबिक आम लोगों के बीच ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को लेकर सहानुभूति है। उनका कहना है कि गांवों तक यह संदेश पहुंच चुका है कि चुनावी प्रक्रिया में कहीं न कहीं गड़बड़ी हो रही है। वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी के अनुसार विपक्ष को उम्मीद है कि अगर इस मुद्दे पर युवाओं के एक छोटे हिस्से को भी अपने साथ जोड़ा गया तो इससे विपक्ष के दोबारा मजबूत होने की उम्मीद बन सकती है।

Opposition Protest: परसेप्शन की लड़ाई में बढ़त

राहुल गांधी के अभियान को राजनीतिक धारणा की लड़ाई से भी जोड़कर देखा जा रहा है। 2023 में बनाए गए कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को कानूनी सुरक्षा मिली हुई है। इसके तहत पद पर रहते हुए किसी काम या बयान के लिए उनके खिलाफ आपराधिक मामला नहीं चलाया जा सकता।मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए महाभियोग की प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। अप्रैल 2026 में विपक्ष ने इसके लिए नोटिस दिया था, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति ने इसे स्वीकार नहीं किया था। विपक्ष अब दोबारा इसकी तैयारी कर रहा है, हालांकि उसके पास पर्याप्त संख्या नहीं है।आदेश रावल के मुताबिक राहुल गांधी की रणनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को कमजोर करने की है। वह यह संदेश देना चाहते हैं कि बीजेपी को चुनावों में जीत चुनाव आयोग की वजह से मिलती है, न कि नरेंद्र मोदी की वजह से। विपक्ष बीजेपी की चुनावी जीत को चुनाव आयोग में कथित गड़बड़ियों से जोड़कर पेश कर रहा है। प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद ‘बीजेपी ही सीईसी’ लिखे पोस्टर लेकर भी नजर आए।

विपक्ष की एकजुटता पर सवाल

हालांकि इस विरोध प्रदर्शन में पूरा विपक्ष एक साथ नहीं दिखा। 6 अक्टूबर के प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी और डीएमके शामिल नहीं हुईं। आम आदमी पार्टी पिछले साल ‘इंडिया’ गठबंधन से अलग हो गई थी। वहीं तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद डीएमके ने भी इंडिया गठबंधन से दूरी बना ली है। हालांकि दोनों पार्टियां अपने स्तर पर ज्ञानेश कुमार का विरोध कर रही हैं।

Opposition Protest: आरोपों के सबूत पर भी सवाल

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी। हालांकि 2025 में राहुल गांधी के आरोपों पर ज्ञानेश कुमार ने उन्हें बेबुनियाद बताया था। उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी या तो 7 दिनों के भीतर हलफनामा दें या देश से माफी मांगें। राहुल गांधी ने उस समय लिखित हलफनामा नहीं दिया था।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की क्या वजह है?
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की क्या वजह है?
बिहार का उदाहरण भी सामने

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी ने ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के तहत करीब 1300 किलोमीटर की यात्रा की थी और 110 विधानसभा सीटों को कवर किया था। इस यात्रा में बड़ी भीड़ जुटी थी, लेकिन यह भीड़ चुनावी वोट में नहीं बदल सकी। कांग्रेस ने बिहार में 61 सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसे केवल 6 सीटों पर जीत मिली।रशीद किदवई का कहना है कि अगर योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में चुनाव जीत जाते हैं और पंजाब में कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहता, तो आज के प्रदर्शन में जुटी भीड़ का राजनीतिक महत्व कम हो जाएगा।

Opposition Protest: बीजेपी ने राहुल गांधी पर किया पलटवार

इंडिया गठबंधन के मार्च और राहुल गांधी के आरोपों पर बीजेपी ने पलटवार किया है। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि यह मार्च अराजकता पैदा करने और राहुल गांधी को दोबारा राजनीतिक रूप से लॉन्च करने की कोशिश है।उन्होंने सवाल उठाया कि एसआईआर का विरोध करके क्या कांग्रेस 2.8 करोड़ मृत लोगों के नाम मतदाता सूची में बनाए रखना चाहती है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या राहुल गांधी और सोनिया गांधी ‘वोट चोरी’ के जरिए सांसद बने हैं। संबित पात्रा ने कहा कि अगर एसआईआर अवैध है तो क्या कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकारें भी अवैध हैं?

नवंबर तक चलेगा कांग्रेस का अभियान

कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के मुताबिक पार्टी ने नवंबर तक प्रदर्शन जारी रखने की तैयारी की है। कांग्रेस की योजना ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को संसद के शीतकालीन सत्र तक ले जाने की है।10 से 20 अक्टूबर तक ब्लॉक स्तर पर साइकिल और मोटरसाइकिल के जरिए ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान चलाया जाएगा। 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ चौपाल आयोजित की जाएगी, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली होगी।25 और 26 नवंबर को छह अलग-अलग जगहों से ‘चलो दिल्ली’ मार्च निकाला जाएगा। यह मार्च 26 नवंबर यानी संविधान दिवस के दिन दिल्ली पहुंचेगा।राजनीतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी के मुताबिक अगर ज्ञानेश कुमार दबाव में इस्तीफा देते हैं तो पूरी एसआईआर प्रक्रिया और उसके बाद हुए सभी चुनाव सवालों के घेरे में आ सकते हैं। वहीं अगर वह इस्तीफा नहीं देते हैं तो कांग्रेस का सड़क पर आंदोलन जारी रहेगा। उनके मुताबिक इस पूरे अभियान के जरिए राहुल गांधी को नरेंद्र मोदी के मुख्य राजनीतिक चुनौतीकर्ता के तौर पर स्थापित करने की कोशिश भी की जा रही है।

Opposition Protest: सुप्रीम कोर्ट के रुख का इंतजार

इस पूरे विवाद में अब सुप्रीम कोर्ट के रुख पर भी नजर है। कोर्ट ने कहा है कि फॉर्म-6 में बदलाव की मंजूरी उसने नहीं दी है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से उनके खिलाफ लगाए गए 14 आरोपों पर जवाब मांगा है। केंद्र सरकार को भी नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा गया है। अब आगे की कार्रवाई इन जवाबों और सुप्रीम कोर्ट के रुख के आधार पर तय होगी।