Jantar Mantar Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर और आकाशवाणी भवन के आसपास बुधवार को राजनीतिक प्रदर्शन को लेकर माहौल गर्म रहा। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के कार्यकर्ता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और वोटों को प्रभावित किया जा रहा है। इस दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, दीपेंद्र हुड्डा और कांग्रेस के कई अन्य नेताओं को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। मौके से प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर ले जाया गया। खबर इंडिया की ग्राउंड कवरेज में जंतर-मंतर से लेकर आकाशवाणी भवन तक की स्थिति दिखाई गई।
Jantar Mantar Protest: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
प्रदर्शन में शामिल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ता लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते नजर आए। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि वे किसी से डरने वाले नहीं हैं और चाहे पुलिस आए या बस भेजी जाए, वे ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लेकर रहेंगे।प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि बिहार और बंगाल के चुनावों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उनका कहना था कि अगर चुनावी प्रक्रिया में गलतियां हुई हैं तो भविष्य में किसी भी चुनाव को लेकर लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
एसआईआर को लेकर भी सवाल
प्रदर्शनकारियों ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि 2003 में भी एसआईआर की प्रक्रिया हुई थी, लेकिन मौजूदा प्रक्रिया को लेकर विपक्ष लगातार आपत्ति जता रहा है।एक प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि फर्जी वोट हटाने के नाम पर सही मतदाताओं के नाम भी प्रभावित किए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि चुनाव आयोग के सामने सही वोटों से जुड़ी जानकारी रखी गई थी, तो उन वोटों को ठीक क्यों नहीं किया गया।
Jantar Mantar Protest: कांग्रेस और सपा कार्यकर्ताओं की नारेबाजी
जंतर-मंतर पर पहुंचे प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त और केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाते दिखाई दिए। कुछ कार्यकर्ता ज्ञानेश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए नारे लगा रहे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि चुनाव आयोग की कार्रवाई से भारतीय जनता पार्टी को फायदा पहुंच रहा है।कवरेज के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों के बीच सवाल-जवाब भी हुआ। एक प्रदर्शनकारी ने खुद को राहुल गांधी का समर्थक बताया और सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। वहीं, पत्रकार से बहस के दौरान मीडिया की भूमिका को लेकर भी तीखी बात हुई।
पांच दिन से जारी प्रदर्शन पर सवाल
मौके पर मौजूद पत्रकार ने कहा कि दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों की ओर से इलाके में प्रतिबंध लागू होने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी बार-बार जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में पहुंच रहे हैं।उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर राजधानी में लगातार कई दिनों से प्रदर्शन क्यों हो रहा है और प्रदर्शनकारियों को बार-बार हिरासत में लेने की स्थिति क्यों बन रही है। प्रदर्शनकारियों की ओर से हिरासत में ले जाने के लिए इस्तेमाल की जा रही बसों में एसी की सुविधा को लेकर भी टिप्पणी की गई।
Jantar Mantar Protest: प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया
आकाशवाणी भवन के पास प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने एक-एक करके हिरासत में लिया। पुलिस उन्हें बसों में बैठाकर वहां से ले गई।मौके पर मौजूद तस्वीरों में बड़ी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बल दिखाई दिए। प्रदर्शनकारी लगातार नारे लगाते हुए चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर आरोप लगा रहे थे। पुलिस की कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारियों की संख्या धीरे-धीरे कम होती गई।
राहुल और प्रियंका आकाशवाणी भवन के पास मौजूद
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भी पुलिस ने आकाशवाणी भवन के भीतर रोके रखा। उनके साथ कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा, पवन खेड़ा और पार्टी के अन्य नेता भी मौजूद थे।बाद में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी आकाशवाणी भवन के नीचे एक पेड़ की छांव में बैठे दिखाई दिए। दोनों काफी देर तक खड़े रहे, जिसके बाद वहां उनके बैठने के लिए चटाई बिछाई गई। प्रियंका गांधी चटाई पर बैठीं, जबकि राहुल गांधी पेड़ के चबूतरे का सहारा लेते हुए दिखाई दिए।इस दौरान एक व्यक्ति ने ‘रघुपति राघव राजा राम’ भजन गाना शुरू किया। हालांकि, राहुल गांधी ने उसे रोक दिया। मौके पर मौजूद पत्रकार ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में अभिव्यक्ति की आजादी है और प्रदर्शन के बीच इस तरह के गीत को लेकर राहुल गांधी के रोकने की वजह स्पष्ट नहीं हुई।
Jantar Mantar Protest: सड़क पर सामान्य दिखी स्थिति
जंतर-मंतर और संसद मार्ग के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। बड़ी संख्या में दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षाकर्मी तैनात दिखाई दिए। वहीं, आसपास की सड़कों पर सामान्य आवाजाही भी जारी रही।कवरेज में आसपास के दफ्तरों में काम करने वाले लोगों को अपने काम पर जाते हुए भी दिखाया गया। इस पर सवाल उठाया गया कि यदि एसआईआर, केंद्र सरकार या चुनाव आयोग की कार्रवाई से आम लोगों को परेशानी है, तो वे भी विरोध प्रदर्शन में शामिल क्यों नहीं दिखाई दे रहे हैं।
चुनिंदा कार्यकर्ताओं के बार-बार पहुंचने का दावा
मौके से जानकारी देते हुए पत्रकार ने दावा किया कि पिछले कई दिनों से अलग-अलग विपक्षी नेताओं के आह्वान पर कुछ चुनिंदा कार्यकर्ता बार-बार प्रदर्शन स्थल पर पहुंच रहे हैं। उनके मुताबिक, इन कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिया जा रहा है और इससे पुलिस, मीडिया कर्मियों तथा आम लोगों को भी परेशानी हो रही है।वहीं, राहुल गांधी के समर्थन में पहुंचे कुछ लोगों ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया। उनका कहना था कि राहुल गांधी को हिरासत में लेना लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ है। दूसरी ओर, इस पर सवाल उठाया गया कि कई दिनों तक सड़कों पर प्रदर्शन और आवाजाही प्रभावित होने को लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ कैसे देखा जाए।
Jantar Mantar Protest: संसद घेराव के लिए निकले थे राहुल-प्रियंका
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध जताने और संसद की ओर मार्च करने के लिए निकले थे। उनका आरोप था कि चुनाव आयोग की कार्रवाई से भाजपा को फायदा पहुंचाया जा रहा है।पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर बसों में बैठाया, जबकि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को आकाशवाणी भवन के पास रोक दिया गया।प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनका आंदोलन चुनाव प्रक्रिया और एसआईआर को लेकर है। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था और प्रतिबंधों के बीच बार-बार प्रदर्शन किए जाने को लेकर सवाल भी उठते रहे। जंतर-मंतर पर पुलिस की मौजूदगी के बीच राजनीतिक नारेबाजी और हिरासत की कार्रवाई जारी रही।









