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इस्तीफा नहीं दिया तो कब तक CEC रहेंगे ज्ञानेश कुमार? कार्यकाल, नियम और हटाने की पूरी प्रक्रिया समझिए

Gyanesh Kumar: इस्तीफा नहीं दिया तो कब तक CEC रहेंगे ज्ञानेश कुमार?

Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इन दिनों राजनीतिक विवाद के केंद्र में हैं। विपक्षी दल उनके इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। 7 अक्टूबर 2026 को भी राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन और हिरासत की खबर सामने आई। विवाद की पृष्ठभूमि में मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष के आरोप हैं, जबकि चुनाव आयोग और बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज किया है।

19 फरवरी 2025 को संभाला था CEC का पद

ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त यानी CEC के रूप में कार्यभार संभाला था। इससे पहले वह 15 मार्च 2024 से निर्वाचन आयुक्त के रूप में काम कर रहे थे। चुनाव आयोग के मुताबिक, CEC बनने से पहले उनके कार्यकाल में लोकसभा समेत कई विधानसभा चुनाव हुए थे।

Gyanesh Kumar: कितने साल का होता है मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल?

2023 के कानून के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल 6 साल या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, रहता है। साथ ही इस पद पर दोबारा नियुक्ति का प्रावधान नहीं है। इसलिए केवल राजनीतिक दबाव या इस्तीफे की मांग उठने से कार्यकाल अपने आप खत्म नहीं होता।

इस्तीफा नहीं देते हैं तो कब तक रहेंगे?

ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को CEC का पद संभाला था। सामान्य स्थिति में छह साल की अवधि के हिसाब से उनका कार्यकाल फरवरी 2031 तक जा सकता है। लेकिन कानून में 65 वर्ष की उम्र की सीमा भी है। इसलिए अंतिम तारीख इस बात पर निर्भर करेगी कि वह 65 वर्ष की आयु कब पूरी करते हैं। यानी 6 साल और 65 वर्ष में जो पहले आएगा, उसी दिन कार्यकाल समाप्त होगा।

Gyanesh Kumar: क्या उन्हें कार्यकाल पूरा होने से पहले हटाया जा सकता है?

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सामान्य सरकारी पदों से अलग है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत CEC को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है। इसका मतलब है कि केवल किसी राजनीतिक दल की मांग या प्रदर्शन के आधार पर CEC को पद से नहीं हटाया जा सकता। संसद में निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्ताव और दोनों सदनों में आवश्यक विशेष बहुमत की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

 

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