Jantar Mantar Protest: दिल्ली में प्रदर्शन करना मौलिक अधिकार है, लेकिन इसकी कुछ कानूनी सीमाएं भी हैं। जंतर-मंतर हो या रामलीला मैदान, धरना देने, जुलूस निकालने और भीड़ जुटाने के लिए जगह, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े नियमों का पालन करना पड़ सकता है। ऐसे में सवाल है कि क्या कोई भी व्यक्ति दिल्ली में कहीं भी प्रदर्शन कर सकता है? पुलिस की अनुमति कब जरूरी होती है और नियम तोड़ने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
क्या दिल्ली में कहीं भी प्रदर्शन कर सकते हैं?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(b) नागरिकों को शांतिपूर्वक और बिना हथियार एकत्र होने का मौलिक अधिकार देता है। लोकतंत्र में धरना, प्रदर्शन और विरोध के जरिए अपनी बात रखना इसी अधिकार का हिस्सा है। हालांकि, यह अधिकार असीमित नहीं है। संविधान का अनुच्छेद 19(3) सार्वजनिक व्यवस्था और अन्य वैध कारणों से उचित प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है। इसलिए किसी भी सार्वजनिक स्थान पर अपनी मर्जी से भीड़ जुटाना या जुलूस निकालना अधिकार का स्वतः हिस्सा नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट भी स्पष्ट कर चुका है कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे सार्वजनिक रास्तों पर अनिश्चितकाल तक कब्जा करने का अधिकार नहीं मिलता। यानी विरोध किया जा सकता है, लेकिन दूसरों के आने-जाने और सार्वजनिक व्यवस्था का ध्यान रखना भी जरूरी है। <u>स्रोत:</u> सुप्रीम कोर्ट का शाहीन बाग मामले में 2020 का फैसला।
Jantar Mantar Protest: जंतर-मंतर और रामलीला मैदान में प्रदर्शन के क्या नियम हैं?
दिल्ली में जंतर-मंतर और रामलीला मैदान जैसे स्थानों पर अलग-अलग तरह के धरने और रैलियां आयोजित की जाती हैं। लेकिन किसी स्थान पर प्रदर्शन करने की अनुमति मिलना वहां बिना शर्त भीड़ जुटाने की छूट नहीं है। प्रदर्शन की जगह, अनुमानित भीड़, समय, सुरक्षा व्यवस्था और यातायात पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखकर संबंधित अधिकारी शर्तें तय कर सकते हैं। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस की अनुमति और लागू दिशा-निर्देशों की जानकारी लेना जरूरी है। बड़ी रैली के लिए भी संबंधित स्थल और प्रशासन की शर्तों का पालन करना होता है। इसलिए यह मानना सही नहीं होगा कि जंतर-मंतर पर हर प्रदर्शन की अनुमति मिल जाएगी या रामलीला मैदान में किसी भी संख्या में लोगों को जुटाया जा सकता है।
क्या प्रदर्शन के लिए पुलिस की अनुमति लेना जरूरी है?
यह प्रदर्शन के स्वरूप, स्थान और उस समय लागू पुलिस आदेशों पर निर्भर करता है। बड़े या संगठित धरने, रैली और जुलूस के लिए संबंधित पुलिस प्राधिकरण से पहले अनुमति लेना आवश्यक हो सकता है। दिल्ली में आवेदन की प्रक्रिया और समय-सीमा के बारे में संबंधित जिले या आयोजन स्थल के पुलिस कार्यालय से जानकारी लेनी चाहिए। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए जारी दिशा-निर्देशों में पहले से आवेदन देने की व्यवस्था भी शामिल रही है।
ध्यान रहे कि हर प्रकार की सभा के लिए एक समान समय-सीमा लागू होने का दावा करने से पहले संबंधित आदेश की पुष्टि जरूरी है। अनुमति मिलने पर भी आयोजकों को निर्धारित स्थान, समय, भीड़ और अन्य शर्तों का पालन करना पड़ता है।
Jantar Mantar Protest: धारा 163 क्या है और प्रदर्शन पर इसका क्या असर पड़ता है?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत सक्षम कार्यपालक मजिस्ट्रेट कुछ परिस्थितियों में सार्वजनिक व्यवस्था, सुरक्षा या संभावित खतरे को देखते हुए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर सकते हैं। यह प्रावधान पहले लागू दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144 से संबंधित व्यवस्था की जगह आया है।
अगर किसी क्षेत्र में धारा 163 के तहत ऐसा आदेश लागू है, जो जुलूस, प्रदर्शन या लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाता है, तो उस आदेश का पालन करना जरूरी होता है। आदेश का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, धारा 163 लागू होने का अर्थ यह नहीं है कि पूरे दिल्ली शहर में हर समय पांच या उससे अधिक लोगों का एकत्र होना अपने आप गैरकानूनी हो जाता है। प्रतिबंध का दायरा संबंधित आदेश में तय क्षेत्र, अवधि और शर्तों से निर्धारित होता है।
क्या पुलिस प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले सकती है?
हां, लेकिन कार्रवाई का आधार कानून और परिस्थितियां होनी चाहिए। यदि किसी प्रदर्शन के दौरान लागू प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन होता है, सार्वजनिक रास्ता बाधित किया जाता है या कोई अन्य संज्ञेय अपराध सामने आता है, तो पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती है।
BNSS की धारा 148 के तहत सक्षम अधिकारी गैरकानूनी सभा या शांति भंग होने की आशंका वाली पांच या उससे अधिक लोगों की सभा को तितर-बितर होने का आदेश दे सकते हैं। आदेश का पालन न होने पर कानून में निर्धारित परिस्थितियों के तहत बल प्रयोग या गिरफ्तारी की कार्रवाई भी हो सकती है। लेकिन सिर्फ पांच या उससे अधिक लोगों का साथ खड़ा होना ही हर स्थिति में सभा को गैरकानूनी नहीं बनाता। इसके लिए संबंधित कानून की शर्तें और परिस्थितियां देखना जरूरी है।

Jantar Mantar Protest: क्या प्रदर्शन के दौरान सड़क जाम करना गैरकानूनी है?
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का मतलब यह नहीं है कि सार्वजनिक सड़क या आम रास्ते को अनिश्चितकाल तक बंद रखा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग मामले में कहा था कि सार्वजनिक रास्तों पर अनिश्चितकालीन कब्जा करके लोगों की आवाजाही बाधित नहीं की जा सकती। पुलिस यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रदर्शन के स्थान, मार्ग या संचालन पर उचित प्रतिबंध लगा सकती है। हालांकि, किसी विशेष प्रदर्शन पर कार्रवाई उचित थी या नहीं, यह संबंधित तथ्यों और लागू आदेशों के आधार पर तय होगा।
क्या लाउडस्पीकर, झंडे और टेंट लगाने पर भी नियम हैं?
प्रदर्शन के दौरान लाउडस्पीकर, साउंड सिस्टम, अस्थायी ढांचे और अन्य सामग्री के इस्तेमाल पर लागू स्थानीय नियमों तथा अनुमति की शर्तों का पालन करना होता है। ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियम भी लागू हो सकते हैं। इसी तरह हथियार या प्रतिबंधित वस्तुएं लेकर चलना, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, आगजनी करना या हिंसा में शामिल होना अलग कानूनी कार्रवाई का आधार बन सकता है।
हालांकि, झंडे के डंडे की लंबाई, टेंट लगाने या रात में रुकने पर लागू किसी विशेष रोक के बारे में जानकारी संबंधित स्थल के वर्तमान आदेश से सत्यापित करनी चाहिए। हर प्रतिबंध को बिना पुष्टि के पूरी दिल्ली पर लागू नहीं माना जा सकता।
Jantar Mantar Protest: प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिले तो क्या किया जा सकता है?
यदि पुलिस किसी प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार करती है, तो आयोजक संबंधित आदेश और कारणों की जानकारी मांग सकते हैं। परिस्थितियों के अनुसार वे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष अपना पक्ष रख सकते हैं या कानूनी सलाह लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की जा सकती है। हालांकि, अदालत से राहत मिलेगी या नहीं, यह मामले के तथ्यों, लागू प्रतिबंधों और कानूनी आधार पर निर्भर करता है।
गिरफ्तारी या हिरासत के समय क्या हैं अधिकार?
प्रदर्शन के दौरान हिरासत या गिरफ्तारी होने पर भी व्यक्ति के कानूनी और संवैधानिक अधिकार समाप्त नहीं होते। गिरफ्तारी की स्थिति में कानून के अनुसार उसे गिरफ्तारी के आधार की जानकारी पाने, वकील से परामर्श करने और निर्धारित प्रक्रिया के तहत मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने का अधिकार है। मुफ्त कानूनी सहायता पाने की पात्रता भी लागू नियमों के अनुसार हो सकती है।
महिलाओं की गिरफ्तारी के संबंध में भी कानून में विशेष सुरक्षा प्रावधान हैं। सामान्य नियम के तहत सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले महिला की गिरफ्तारी नहीं की जाती; अपवादस्वरूप परिस्थितियों में निर्धारित प्रक्रिया और प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है।
Jantar Mantar Protest: प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन नियमों के साथ
दिल्ली में धरना-प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन किसी भी जगह बिना शर्त भीड़ जुटाने या सार्वजनिक रास्ते को बाधित करने की स्वतः अनुमति नहीं है। जंतर-मंतर और रामलीला मैदान जैसे स्थानों पर प्रदर्शन करने से पहले संबंधित पुलिस अनुमति, स्थानीय दिशा-निर्देश और उस समय लागू प्रतिबंधात्मक आदेशों की जानकारी लेना जरूरी है। यानी कानून विरोध की आवाज उठाने का अधिकार देता है, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके, सार्वजनिक व्यवस्था और दूसरों के अधिकारों का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।









