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जंतर-मंतर पर ‘पप्पू मीडिया’ का एजेंडा सेट करने का आरोप, पत्रकारों ने दागे सवाल तो भागते आए नजर

जंतर-मंतर पर 'पप्पू मीडिया' कहकर पत्रकारों को घेरा
जंतर-मंतर पर 'पप्पू मीडिया' कहकर पत्रकारों को घेरा

Jantar Mantar Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बीच पुलिस के साथ कथित धक्का-मुक्की और पत्रकारों के साथ बदसलूकी को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। खबर इंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट में प्रदर्शन के समर्थन और विरोध में खड़े लोगों के बीच कई मुद्दों पर बहस हुई। इसमें पुलिस की भूमिका, प्रदर्शनकारियों के व्यवहार, मीडिया की निष्पक्षता और राजनीतिक दलों को लेकर सवाल उठाए गए। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने पत्रकारों पर पक्षपात करने का आरोप लगाया, जबकि पत्रकारों ने अपने काम में बाधा डालने और धमकी देने की शिकायत की। इस पूरे घटनाक्रम में एक तरफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की बात हुई, तो दूसरी तरफ कानून-व्यवस्था बनाए रखने में जुटे पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट पर भी सवाल उठे।

Jantar Mantar Protest: पुलिस के साथ कथित मारपीट पर उठाए सवाल

वीडियो में एक व्यक्ति पुलिसकर्मियों के साथ कथित तौर पर हुई धक्का-मुक्की, जूते मारने और थप्पड़ मारने की घटनाओं का जिक्र करते हुए वहां मौजूद लोगों से सवाल करता नजर आता है। उसका कहना था कि यदि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ इस तरह का व्यवहार किया जा रहा था, तो किसी ने इसका विरोध क्यों नहीं किया। उसने सवाल किया कि अगर पुलिसकर्मी किसी के भाई या पिता होते, तो क्या तब भी उनके साथ ऐसा ही व्यवहार किया जाता?इस पर मौजूद लोगों के बीच बहस होती है। कुछ लोग प्रदर्शनकारियों के व्यवहार पर सवाल उठाते हैं, जबकि दूसरे लोग अपनी बात रखने की कोशिश करते हैं। इसी बीच एक व्यक्ति यह भी कहता है कि वह एक आम नागरिक है और गलत होते देखकर उसके खिलाफ आवाज उठाना उसकी जिम्मेदारी है।

पत्रकारों के साथ बदसलूकी और कैमरा छीनने के आरोप

मौके पर पत्रकारों और वहां मौजूद कुछ लोगों के बीच भी तनाव देखने को मिला। वीडियो में एक व्यक्ति पीटीआई के एक पत्रकार और कैमरामैन का पक्ष लेते हुए कहता है कि पत्रकारों के साथ बदसलूकी नहीं की जानी चाहिए और उनका कैमरा नहीं छीनना चाहिए। वह बार-बार लोगों से कैमरामैन के साथ ठीक व्यवहार करने की अपील करता है।दूसरी ओर, कुछ लोग पत्रकारों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्हें एकतरफा खबरें दिखाने का आरोप लगाते हैं। इस दौरान एक व्यक्ति खुद को पीटीआई से जुड़ा बताने वाले शख्स को लेकर सवाल करता है और पूछता है कि वह बीच में क्यों आ रहा है। जवाब में पत्रकारिता से जुड़े होने की बात कही जाती है, लेकिन इसके बाद भी दोनों पक्षों के बीच बहस जारी रहती है।

Jantar Mantar Protest: मीडिया को लेकर लगाए पक्षपात के आरोप

वीडियो में एक व्यक्ति कुछ पत्रकारों के लिए बार-बार ‘पप्पू मीडिया’ शब्द का इस्तेमाल करता है। वह आरोप लगाता है कि मीडिया का एक वर्ग राजनीतिक पक्षपात कर रहा है और जनता के सामने पूरी सच्चाई नहीं रख रहा है। उसका कहना है कि जब पहले पत्रकारों के साथ कथित मारपीट हुई थी, तब भी लोगों को इसी तरह विरोध करना चाहिए था।वह कुछ पत्रकारों पर एक ही पक्ष की घटनाओं को दिखाने का आरोप लगाते हुए कहता है कि मीडिया को सभी घटनाओं पर समान रूप से सवाल उठाने चाहिए। हालांकि, वीडियो में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

प्रदर्शन को लेकर भी हुई तीखी बहस

प्रदर्शन के उद्देश्य और उसके तरीके को लेकर भी लोगों के बीच सवाल-जवाब हुए। एक पक्ष का कहना था कि जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने के लिए जगह दी गई है, इसलिए वहां शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखी जानी चाहिए। उसने सवाल किया कि यदि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देती है, तो फिर पुलिस के साथ टकराव क्यों किया जा रहा है।वहीं, दूसरे पक्ष की ओर से प्रदर्शन के तरीके और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए। इस पर एक व्यक्ति ने कहा कि आंदोलन करने का मतलब पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट करना नहीं हो सकता। उसने जोर देकर कहा कि पुलिसकर्मी भी अपनी ड्यूटी निभा रहे होते हैं और उनके साथ हिंसा करना उचित नहीं है।

Jantar Mantar Protest: पुलिस की कार्रवाई और सरकार की भूमिका पर चर्चा

वीडियो में एक व्यक्ति का कहना है कि सरकार की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है और पुलिसकर्मी इसी जिम्मेदारी के तहत काम करते हैं। वह सवाल करता है कि यदि पुलिस अपनी ड्यूटी निभा रही थी, तो उसके साथ मारपीट क्यों की गई।वह यह भी स्पष्ट करता है कि सरकारी व्यवस्था का हिस्सा होने के बावजूद पुलिसकर्मियों के साथ हिंसा को सही नहीं ठहराया जा सकता। इस मुद्दे पर मौजूद लोगों के बीच बहस होती है और अलग-अलग पक्ष अपनी दलीलें रखते हैं।

विदेशी फंडिंग को लेकर भी लगाए आरोप

प्रदर्शन को लेकर बहस के बीच एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि आंदोलन को विदेश से पैसा मिल रहा है। उसने इसे अमेरिका से फंडिंग मिलने का दावा करते हुए विदेशी पैसे से संचालित प्रदर्शन बताया। हालांकि, वीडियो में इस आरोप के समर्थन में कोई दस्तावेज या प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।उसने यह भी कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों के प्रति जरूरत से ज्यादा नरम रुख अपना रही है और उसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिक सख्ती करनी चाहिए। साथ ही उसने दावा किया कि सरकार आरक्षण हटाने से जुड़े किसी नए आंदोलन की स्थिति पैदा नहीं होने देना चाहती। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

राहुल गांधी और दूसरे नेताओं के नाम पर भी विवाद

बहस के बीच राजनीतिक नेताओं के नाम भी सामने आए। वीडियो में मौजूद व्यक्ति ने राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान का जिक्र किया। उसने सवाल उठाया कि कुछ लोग चुनिंदा नेताओं का नाम लेकर उनकी आलोचना क्यों करते हैं, जबकि दूसरे नेताओं पर सवाल उठाने से बचते हैं।इस दौरान राहुल गांधी को लेकर अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल भी किया गया। संबंधित व्यक्ति ने मीडिया पर राजनीतिक पक्षपात करने का आरोप दोहराते हुए कहा कि सरकार को भी प्रदर्शनकारियों के मामले में अधिक सख्ती दिखानी चाहिए। हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों के समर्थन में वीडियो में कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया गया।

Jantar Mantar Protest: पत्रकार को रोकने और जवाब मांगने की कोशिश

वीडियो के एक हिस्से में एक व्यक्ति एक शख्स को रुकने और अपने सवालों का जवाब देने के लिए कहता नजर आता है। जब वह वहां से जाने लगता है, तो उसे बार-बार वापस बुलाया जाता है। इस दौरान उस पर सवालों से बचने और जवाब दिए बिना चले जाने का आरोप लगाया जाता है।वहीं, पत्रकारों की ओर से भी सवाल पूछने और अपना पक्ष रखने की कोशिश की जाती है। कुछ लोग पत्रकारों को प्रदर्शन के बीच आने पर सवाल करते हैं, जबकि दूसरे लोग उनके काम में बाधा नहीं डालने की अपील करते हैं। इस वजह से मौके पर मौजूद लोगों के बीच तनाव और बढ़ जाता है।

राजनीति और आम जनता के मुद्दों पर जताई नाराजगी

वीडियो के अंतिम हिस्से में एक व्यक्ति राजनीतिक व्यवस्था को लेकर नाराजगी जाहिर करता है। वह आरोप लगाता है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता राजनीति में उलझे हुए हैं, जबकि आम लोगों को रोजगार जैसी बुनियादी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उसने नेताओं की पेंशन और आम जनता के लिए नौकरियों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए।वह कहता है कि राजनीतिक दलों को जनता के हितों और रोजगार जैसे मुद्दों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। इस तरह जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर शुरू हुई बहस पुलिस के साथ कथित मारपीट, पत्रकारों की स्वतंत्रता, मीडिया की निष्पक्षता, विदेशी फंडिंग के आरोपों और राजनीतिक जवाबदेही जैसे कई मुद्दों तक पहुंच गई।