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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या नौकरियां खायेग?

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AI News: आज समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है। माना जा रहा है कि बुद्धि से काम करने वाले स्थानों पर ्वाइट कालर यानी सिटिंग जाॅब के लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ सकता है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अपनी भूमिका निभायेगा। अब यह समझते हैं कि ए आई होता क्या है? यह कंप्यूटर विज्ञान की एक शाखा है, जिसका उद्येश्य ऐसी मशीनें या साफ्टवेयर तैयार करना है, जो इंसानों की तरह सोच सकें, सीखें और निर्णय लेने में सक्षम हों। यह तकनीक डेटा और पैर्टन का विश्लेषण करके समस्याओं को सुलझाने में मदद करती है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई के मुख्य कार्य है

वर्चुअल असिस्टेंस, एलेक्सा या सिरी। यह आपकी आवाज सुनकर कमांड समझते हैं और अलार्म लगाने, काल करने और जानकारी खोजते हैं।

सर्च इंजनः गूगल से जब आप सर्च करते हैं, यानी टाइप करते हैं, तो यह एआई के माध्यम से कुछ ही समय में सटीक परिणाम आपके सामने खोज कर रख देता है।

स्मार्टफोन कैमराः मोबाइल कैमरे में मौजूद एआई तकनीक चेहरे को पहचानती है और रौशनी तथा रंग को बेहतर बनाकर तस्वीर खींचती है।

चैटबाॅक्सः यह व्यक्तियों द्वारा पूछे सवालों का लिखित रूप में बिल्कुल सही और विस्तृत जवाब देते हैं।

ओटीटी प्लेटफार्म और ई-कामर्सः नेटफ्लिक्स, अमेजान या यूट्यूब। यह एआई के माध्यम से आपकी पसंद और पिछले इतिहास को समझकर आपको फिल्मों या उत्पादों के सुझाव देता है।

नेविगेशनः गूगल मैप्स। यह एआई और लाइव ट्रैफिक डेटा का उपयोग करके सबसे छोटा रास्ता बताता है और सुझाव देता है कि ट्रैफिक जाम होने पर गंतव्य तक पहुंचने में कितना समय लगेगा।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जनक अमेरिकी कंप्यूटर वैज्ञानिक जाॅन मैकार्थी हैं। इन्होंने 1955 में सबसे पहले एआई शब्द का इस्तेमाल किया था। 1956 के डार्टमाउथ सम्मेलन में इस क्षेत्र की बुनियाद रखी गई थी।

एलन ट्यूरिंग को आधुनिक कंप्यूटर विज्ञान और एआई का आधार माना जाता है। उन्होंने ही ट्यूरिंग टेस्ट बनाया था, जिससे मशीन की सोचने की क्षमता जांची जाती है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई शब्द के प्रचलन से लेकर 1980 के दशक तक का समय एआई अनुसंधान के लिए तीव्र विकास का और संधर्ष का समय रहा। जबकि 1950 से लेकर 1960 के दशक तक सृजन का समय रहा।

एआई के जन्म से लेकर विकसित होने के इस संक्षिप्त इतिहास का मकसद यही है कि आने वाला समय एआई के हाथों हैं। हो सकता है कि व्यक्ति की सारी बुद्धि पर एआई कब्जा कर ले। इसी प्रसंग में आज सफेद काॅलर जाॅब के लिए घोर प्रतिद्वंदी एआई होगा। व्यक्ति की रोजी-रोटी भी मारी जा सकती है। लेकिन इसका सामना करने के लिए विकल्प ढूंढे जा सकते हैं। क्योंकि मनुष्य की बौद्धिक क्षमता का कोई मूल्यांकन नहीं है। समय ही नये अनुसंधानों की ओर मोड़कर आधुनिक युग को गाइड करेगा।

लेकख: भगवती प्रसाद डोभाल

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