Akhilesh Yadav: उत्तर प्रदेश की राजनीति में उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कहे जाने का मुद्दा गरमा गया है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बयान को लेकर उत्तर प्रदेश में रहने वाले उत्तराखंड के लोगों ने नाराजगी जताई है। प्रदर्शनकारियों ने इसे उत्तराखंड के लोगों का अपमान बताते हुए अखिलेश यादव से माफी मांगने की मांग की। खबर इंडिया के वीडियो में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने अपने विचार रखते हुए कहा कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक रिश्ता रहा है। ऐसे में उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कहना गलत है। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पलटवार और 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
Akhilesh Yadav: अखिलेश यादव के बयान पर सड़कों पर उतरे लोग
खबर इंडिया के अनुसार, उत्तराखंड समाज से जुड़े कई लोग अखिलेश यादव के बयान के विरोध में सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ नारे लगाए और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। लोगों ने कहा कि उत्तराखंड के नागरिक देश का अभिन्न हिस्सा हैं और उन्हें घुसपैठिया कहना उचित नहीं है।प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि उत्तराखंड के अनेक निवासी रोजगार और कामकाज के सिलसिले में उत्तर प्रदेश में रहते हैं। ऐसे में उन्हें बाहरी या घुसपैठिया बताना उनके सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला है।
प्रदर्शनकारियों ने परिवार का जिक्र कर उठाए सवाल
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने अखिलेश यादव के परिवार का जिक्र करते हुए भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव उत्तराखंड से हैं। इसके अलावा, उनके परिवार की सदस्य अपर्णा यादव का भी उत्तराखंड से संबंध है।प्रदर्शनकारियों ने सवाल किया कि यदि उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कहा जा रहा है, तो क्या उनके परिवार से जुड़ी उत्तराखंड की महिलाओं पर भी यही बात लागू होगी? उन्होंने कहा कि किसी भी सार्वजनिक पद पर रहने वाले नेता को बयान देते समय शब्दों का ध्यान रखना चाहिए।
Akhilesh Yadav: उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के पुराने रिश्ते का दिया हवाला
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उत्तराखंड पहले उत्तर प्रदेश का हिस्सा था और साल 2000 में अलग राज्य बना। ऐसे में उत्तराखंड के लोगों को उत्तर प्रदेश में घुसपैठिया बताना समझ से परे है।एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि उत्तराखंड के लोग उत्तर प्रदेश में पैदा हुए हैं और लंबे समय से यहां रह रहे हैं। जब दोनों राज्यों का ऐतिहासिक और सामाजिक जुड़ाव रहा है, तो उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कैसे कहा जा सकता है?उन्होंने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों गोविंद बल्लभ पंत और नारायण दत्त तिवारी का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि इन नेताओं का उत्तराखंड से संबंध रहा है। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उत्तराखंड से जुड़े होने का हवाला देते हुए कहा कि उत्तराखंड के लोगों का प्रदेश के विकास और राजनीति में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
मुजफ्फरनगर कांड का भी किया जिक्र
प्रदर्शनकारियों ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के समय हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य गठन की मांग के दौरान उत्तराखंड के लोगों ने संघर्ष किया था। उन्होंने मुजफ्फरनगर और मसूरी की घटनाओं को याद करते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और कई लोगों ने अपनी जान गंवाई।प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि उत्तराखंड के लोगों के साथ पहले भी अन्याय हुआ है। ऐसे में उनके प्रति इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उनकी भावनाओं को आहत करता है।
Akhilesh Yadav: योगी आदित्यनाथ ने भी किया पलटवार
अखिलेश यादव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बड़े मियां और छोटे मियां को घुसपैठियों से ज्यादा प्रेम है। उनके इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया।खबर इंडिया के वीडियो में प्रदर्शनकारियों ने योगी आदित्यनाथ के बयान का समर्थन करते हुए आरोप लगाया कि अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेता अवैध रूप से देश में आने वाले लोगों के मुद्दे पर उचित रुख नहीं अपनाते। हालांकि, ये बातें प्रदर्शनकारियों के आरोप और राजनीतिक विचार हैं।
Akhilesh Yadav: बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे पर भी उठाए सवाल
प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर विपक्षी नेताओं का रवैया अलग-अलग रहा है। उनका आरोप था कि जहां अवैध रूप से रह रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात आती है, वहां कुछ नेता विरोध करते हैं, जबकि उत्तराखंड के लोगों के लिए घुसपैठिया जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है।कुछ प्रदर्शनकारियों ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का भी जिक्र किया। उनका दावा था कि इस प्रक्रिया के बाद फर्जी मतदाताओं के नाम सामने आए। उन्होंने आरोप लगाया कि वोट बैंक की राजनीति के कारण घुसपैठ के मुद्दे पर राजनीतिक दलों का रवैया बदल जाता है।
उत्तराखंड के लोगों ने कहा- हम देश के लिए बलिदान देने वाले लोग
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने उत्तराखंड के सैनिकों और देश की सुरक्षा में उनके योगदान का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि उत्तराखंड के अनेक लोग सेना में सेवा देते हैं और देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए बलिदान देते हैं।प्रदर्शनकारियों ने कुमाऊं और गढ़वाल रेजिमेंट का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड के लोगों की देश की सुरक्षा में अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रदेश के लोगों के लिए घुसपैठिया जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना अनुचित है।
Akhilesh Yadav: महिलाओं ने भी जताई नाराजगी
प्रदर्शन में शामिल सुनीता नयाल सहित अन्य महिलाओं ने भी अखिलेश यादव के बयान पर नाराजगी जताई। सुनीता नयाल ने कहा कि उत्तराखंड के लोगों के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए था। उन्होंने राज्य आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तराखंड के लोगों ने अलग राज्य के लिए संघर्ष किया है।एक अन्य महिला, जिन्होंने अपना नाम चंडा बताया, ने कहा कि वह अपने पति के कामकाज के कारण उत्तर प्रदेश में रहती हैं। उन्होंने सवाल किया कि उत्तराखंड से आने वाले लोग यदि उत्तर प्रदेश में रहकर काम कर रहे हैं, तो उन्हें घुसपैठिया कैसे कहा जा सकता है? उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य के लोगों को इस तरह अपमानित नहीं किया जाना चाहिए।
2027 के विधानसभा चुनावों पर भी चर्चा
प्रदर्शनकारियों ने अखिलेश यादव के बयान को आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़ते हुए दावा किया कि इसका राजनीतिक असर 2027 के चुनावों में देखने को मिल सकता है। उनका आरोप था कि अखिलेश यादव राजनीतिक दबाव में ऐसे बयान दे रहे हैं और जनता इसका जवाब चुनाव में देगी।हालांकि, यह प्रदर्शनकारियों की राजनीतिक राय है। इस बयान का वास्तविक चुनावी प्रभाव क्या होगा, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट हो सकेगा।
Akhilesh Yadav: माफी की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने अखिलेश यादव के खिलाफ नारे लगाए और उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। उनका कहना था कि उत्तराखंड के लोग देश के नागरिक हैं और उत्तर प्रदेश में रहकर काम करने का उन्हें पूरा अधिकार है।खबर इंडिया के वीडियो में सामने आए लोगों के बयानों से स्पष्ट है कि इस मुद्दे को लेकर उत्तराखंड समाज के कुछ वर्गों में नाराजगी है। अब इस राजनीतिक विवाद में आगे क्या प्रतिक्रिया आती है और इसका आगामी चुनावों पर कितना असर पड़ता है, इस पर सबकी नजर रहेगी।








