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Ali Khamenei Funeral: आखिर 4 महीने बाद क्यों होगा खामेनेई का अंतिम संस्कार? इस्लाम का क्या है नियम

Ali Khamenei Funeral: आखिर 4 महीने बाद क्यों होगा खामेनेई का अंतिम संस्कार? इस्लाम का क्या है नियम

Ali Khamenei Funeral: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार उनकी मौत के लगभग चार महीने बाद किया जा रहा है। 3 जुलाई से 9 जुलाई तक उनका जनाज़ा ईरान और इराक के कई अहम धार्मिक शहरों से होकर गुजरेगा, जिसके बाद उन्हें मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार अंतिम संस्कार में लाखों-करोड़ों लोगों के शामिल होने की संभावना है और सुरक्षा कारणों से यह कार्यक्रम लंबे समय तक टाला गया।

युद्ध और सुरक्षा बनी देरी की सबसे बड़ी वजह

शिया विद्वानों के अनुसार इस्लाम में सामान्य परिस्थितियों में मृतक को जल्द से जल्द दफनाना बेहतर माना जाता है। लेकिन यदि युद्ध, सुरक्षा संकट, प्राकृतिक आपदा या अन्य असाधारण परिस्थितियां हों, तो दफन में देरी की अनुमति दी जा सकती है। बताया गया कि ईरान में युद्ध जैसे हालात और बड़े पैमाने पर सुरक्षा व्यवस्था के कारण अंतिम संस्कार को टालना पड़ा।

Ali Khamenei Funeral: इस्लाम क्या कहता है?

इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार मृतक को बिना अनावश्यक देरी के दफनाना सुन्नत माना जाता है। हालांकि यदि जान-माल का खतरा हो, शव को सुरक्षित रखना जरूरी हो या कोई गंभीर बाधा मौजूद हो, तो अस्थायी देरी की गुंजाइश रहती है। इसलिए विशेष परिस्थितियों में शव को कोल्ड स्टोरेज में रखना धार्मिक रूप से पूरी तरह निषिद्ध नहीं माना जाता।

Ali Khamenei Funeral: कर्बला की मिसाल भी दी जाती है

शिया परंपरा में 680 ईस्वी की कर्बला की घटना का उदाहरण दिया जाता है। मान्यता के अनुसार, युद्ध की परिस्थितियों के कारण इमाम हुसैन के शव को तुरंत दफन नहीं किया जा सका था और कुछ समय बाद दफन की प्रक्रिया पूरी हुई। इस उदाहरण के आधार पर कहा जाता है कि संघर्ष की स्थिति में तत्काल दफन हर हाल में अनिवार्य नहीं होता।

करोड़ों लोगों की मौजूदगी भी चुनौती

खामेनेई के अंतिम दर्शन और जनाज़े में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के सामने भीड़ नियंत्रण, संभावित हमलों और यात्रा मार्गों की सुरक्षा जैसी बड़ी चुनौतियां थीं। यही कारण है कि अंतिम संस्कार का कार्यक्रम विस्तृत योजना के साथ कई चरणों में आयोजित किया जा रहा है।धार्मिक जानकारों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु विदेश में हो जाए और शव को उसके वतन लाने की प्रक्रिया चल रही हो, तब भी दफन में देरी हो सकती है। ऐसे मामलों में यह देरी परिस्थितियों के अनुसार स्वीकार्य मानी जाती है।

Ali Khamenei Funeral: कब हुई थी खामेनेई की मौत?

ईरानी सरकारी घोषणा और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़रायल के संयुक्त हवाई हमले में तेहरान स्थित उनके परिसर को निशाना बनाया गया, जिसमें अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके बाद युद्ध और सुरक्षा हालात के कारण उनका अंतिम संस्कार कई महीनों तक स्थगित रखा गया।इस्लाम सामान्य परिस्थितियों में मृतक को जल्द दफनाने की शिक्षा देता है, लेकिन युद्ध, सुरक्षा खतरे, शव के सुरक्षित परिवहन या अन्य असाधारण हालात में दफन में देरी की अनुमति दी जाती है। अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में हुई चार महीने की देरी को भी ईरानी अधिकारियों और कई शिया विद्वानों ने इन्हीं असाधारण परिस्थितियों का परिणाम बताया है।

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