Assam News : एक तरफ भारत के जवान बाढ़ में फंसे बांग्लादेशियों को कंधे पर उठाकर सुरक्षित जगह पहुंचा रहे थे। दूसरी तरफ उसी बॉर्डर पर कुछ बांग्लादेशी एक भारतीय किसान को खेत से उठाकर अपने मुल्क ले गए। सिर पर पट्टी बांधे जब किसान रंजीत दास वापस लौटे तो उनकी आंखों में खौफ और शरीर पर टॉर्चर के निशान थे। कछार जिले के कटिगोरा इलाके के नरसिंहपुर गांव के रंजीत दास मंगलवार सुबह रोज की तरह मवेशियों के लिए घास लेने निकले थे।

असम में भारत बांग्लादेश बॉर्डर पर एक अजीब स्थिति है। सुरक्षा कारणों से फेंस असली इंटरनेशनल बाउंड्री से थोड़ा पीछे लगी है। इस वजह से भारत की बहुत सी खेती की जमीन फेंस और जीरो लाइन के बीच फंस गई है। किसान BSF गेट पर आईडी जमा करके उस जमीन पर जाते हैं। रंजीत ने भी सुबह 7 बजे गेट खुलते ही अपना पहचान पत्र जमा किया और खेत की तरफ बढ़ गए।
Assam News: सात लोग आए और खींच ले गए
रंजीत बताते हैं कि घास इकट्ठा करने के बाद अचानक सात लोग आ गए। उन्होंने आवाज दी और कहा कि तुम्हें हमारे साथ बांग्लादेश चलना होगा। रंजीत ने विरोध किया तो सरहद पार ले जाकर उनके सिर पर रॉड से वार किया गया। हमलावरों का कहना था कि उनका एक भाई लापता है और BSF को उसके बारे में पता है। वे रंजीत के जरिए जानकारी निकलवाना चाहते थे। उन्हें वहीं बैठाकर इंतजार करने को कहा गया।
BSF की कोशिश रंग लाई
गांव वालों से खबर मिलते ही रंजीत का बेटा सुजीत भागा भागा BOP पर पहुंचा। उसने BSF अफसरों को पूरी बात बताई। BSF की टीम तुरंत सुजीत को लेकर बॉर्डर एरिया में सर्च करने निकली। दोनों देशों की सिक्योरिटी एजेंसियों के बीच तुरंत बातचीत शुरू हुई। कुछ ही घंटों में बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश ने रंजीत को भारतीय अधिकारियों के हवाले कर दिया। सिर पर पट्टी बांधे रंजीत जब घर लौटे तो पूरे गांव ने राहत की सांस ली।
जीरो पॉइंट का दर्द
यह पहला मामला नहीं है। कटिगोरा के लोग रोज डर के साए में जीते हैं। उनकी जमीन भारतीय है, पर फेंस के उस पार है। रोजी रोटी के लिए उन्हें BSF गेट से होकर उस जीरो पॉइंट पर जाना पड़ता है। एक चूक हुई और वे सरहद पार खींच लिए जाते हैं। रंजीत के साथ जो हुआ उसने पूरे इलाके में दहशत फैला दी थी। लोगों का कहना है कि रंजीत अपनी मर्जी से बांग्लादेश नहीं गए थे। उन्हें भारतीय जमीन से ही उठाया गया।
वापस आने के बाद रंजीत ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, BSF और सभी अधिकारियों का शुक्रिया अदा किया। लेकिन उनकी कहानी एक बड़ा सवाल छोड़ गई है। जो किसान देश का पेट भरने के लिए बॉर्डर पर खेती करता है, उसकी सुरक्षा का जिम्मा कौन लेगा? फेंस के उस पार खेती करना मजबूरी है, पर हर दिन सरहद पार खिंच जाने का डर उनके साथ चलता है।
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Written By : Mansi Sharma








