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Assembly Elections 2026: क्या यह ममता की विदाई और कमल खिलने का संकेत है, क्या कहती है बंगाल की बंपर वोटिंग ?

Assembly Elections 2026: क्या यह ममता की विदाई और कमल खिलने का संकेत है, क्या कहती है बंगाल की बंपर वोटिंग ?
Assembly Elections 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 152 सीटों के लिए हुए मतदान में वोटरों ने गजब का उत्साह दिखाया। राज्य में पहली बार 92.6  प्रतिशत वोटिंग का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना।खास बात यह है कि मतदाताओं का यही उत्साह दूसरे चरण में 142 सीटों पर भी दिखाई दिया। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर वोटरों की लंबी-लंबी लाइनें लग गई। कई जगहों पर हिंसक झड़पों के बावजूद लोग जरा भी विचलित नहीं हुए और उनका उत्साह बना रहा। लोग हिंसा की परवाह किये बिना पोलिंग स्टेशनों पर पहुंचे और दोपहर एक बजे तक 66 प्रतिशत से अधिक वोटिंग देखने को मिली। इसी से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि शाम तक ऐतिहासिक वोटिंग का नया रिकॉर्ड कायम होने वाला है। 

अपने-अपने दावे

राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी बंपर वोटिंग को सत्ता के प्रति जनसमर्थन के तौर पर परिभाषित कर रही है, तो विपक्षी भाजपा इसे बदलाव की बयार बता रही है। दोनों पक्षों के दावे अपने-अपने हिसाब से सही हो सकते हैं, क्योंकि दोनों ओर से चुनाव जीतने के लिए प्रचार-प्रसार में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी गई।कार्यकर्ता अपने उम्मीदवारों के लिए जी जान से जुटे रहे, लेकिन पश्चिम बंगाल की जनता के मन में क्या चल रहा है, वह किसके हाथों में सत्ता सौंपती है और किसे विपक्ष की भूमिका में बिठाती है,  इसके लिए अभी चुनावी नतीजों का इंतजार करना होगा। हां, फिलहाल अतीत के आईने में झांककर भविष्य की तस्वीर देखने की कोशिश तो की ही जा सकती है।

Assembly Elections 2026:  पिछले चुनाव और नतीजे

अतीत में झांककर देखें तो 2006 के विधानसभा चुनाव में करीब 81.97 मतदान हुआ था, लेकिन इसके बाद  2011 में हुए रिकॉर्ड 85.55 प्रतिशत मतदान का नतीजा यह हुआ कि बंगाल की धरती से काफी हद तक वामपंथियों के पांव उखड़ गए। 34 साल पुरानी लेफ्ट फ्रंट सरकार सत्ता से बाहर हो गई और ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनी।
गौर करने वाली बात है कि राज्य में जब भी मतदान प्रतिशत बढ़ा तो सरकार बदल गई और घटा तो सरकार बनी रही। 2011 में हुए रिकॉर्ड 85.55 प्रतिशत मतदान से ममता बनर्जी की नई सरकार बनी, लेकिन इसके बाद मतदान प्रतिशत में कमी आती रही तो वे सत्ता में वापसी करती रहीं। वर्ष 2011 में हुए 85.55 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2016 में करीब 83.2 प्रतिशत मतदान हुआ यानी घट गया, लेकिन ममता की सत्ता में वापसी हुई। इसी तरह वर्ष 2021 में मतदान और घटकर करीब 82.3 प्रतिशत रह गया, फिर भी ममता बनर्जी की सत्ता बरकरार रही, लेकिन अब 2026 के चुनाव में तस्वीर कुछ अलग संकेत दे रही है।

Assembly Elections 2026: बदलाव की बयार तो नहीं ? 

पहले चरण में करीब 93 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है, जो पिछले चुनावों की तुलना में काफी अधिक है।दूसरे चरण में भी मतदाता गजब का उत्साह दिखा रहे हैं।ऐसे में यह चर्चा होनी स्वाभाविक है कि पश्चिम बंगाल में बंपर वोटिंग बदलाव की बयार तो नहीं ?  हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में तृणमूल के 48 प्रतिशत तो भाजपा को 38 प्रतिशत वोट मिले थे।10 प्रतिशत के इस अंतर को पाटना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन यदि जनता वाकई बदलाव का मन बना चुकी है, तो तब कोई भी अंतर मायने नहीं रखता। देखना है कि ममता बनर्जी चौथी बार सत्ता में लौट पाती हैं या नहीं ?
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