आवामी पार्टी का जन्म पूर्वी पाकिस्तान में जून 21, 1949 को ढाका में हुआ था। इस पार्टी के बदौलत ही बांग्लादेश पाकिस्तान से अलग हुआ था। उस पार्टी के स्थापना दिवस को आवामी लीग के सदस्य मनाना चाहते थे, पर उन्हें ढाका में मिलने नहीं दिया गया। आवामी पार्टी की सारी सदस्यता को समाप्त कर दिया गया। अब वह सड़कों पर अपना विरोध आवामी लीग पार्टी के रूप में नहीं कर सकते हैं। ऐसा काम अखंड भारत में ब्रिटिश सरकार ने भी नहीं किया था। तब पाकिस्तान का भी जन्म नहीं हुआ था। हालांकि ब्रिटिश कूटनीति ने भारत से जाते-जाते भारत के दो हिस्से करवा दिये थे। जो पाकिस्तान आज है, वह भी भारत का अंग था और पूर्व में जो आज बांग्लादेश है, वह भी भारत का पूर्वी भाग था।
अखंड भारत तीन टुकड़ों में!
समय ने ऐसी करवट ली कि आज अखंड भारत तीन देशों में बंटा है। भारत, पाकिस्तान और बांग्ला देश। भारत के आजाद होने के समय से ही पाकिस्तान असंतोष की लहर भारत में फैलाने की कोशिश करता आया है। भारत के साथ चार युद्ध पाकिस्तान कर चुका है, पर किसी भी युद्ध को वह जीत नहीं सका। फिर भी पाकिस्तान के रहनुमाओं में एक टीस बनी हुई है, कि भारत को हराना हैं। इसी लिए एन-केन प्रकारेण भारत को शिकस्त देने की लालसा में वह सदैव खड़ा है। इसी परिप्रेक्ष्य में पाकिस्तना के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अलि भुट्टो कहते रहे कि पाकिस्तान हजार साल तक भारत के साथ युद्ध करता रहेगा। भारत के प्रति यह खटास ब्रिटिश साम्राज्य ने डाली थी, जो अभी तक मिटी नहीं है।
भारत का सहयोग स्वतंत्र बांग्लदेश के लिए था!
बांग्लादेश को पाकिस्तान से अलग करवाने में भारत का हाथ रहा है। यह जग जाहिर है। इसके पीछे उन बंग भूमि के लोगों की स्वतंत्र इच्छा को बरकरार रखने के लिए भारत ने सहयोग दिया। लेकिन आज वह सहयोग बांग्लादेश की सरकार मानने को तैयार नहीं है। वहां की चुनी हुई सरकार शेख हसीना को पद पर नहीं रहने दिया, उसके खिलाफ विद्रोह फैलाया, उसे मारने की धमकी थी, उसी के डर से शेख हसीना ने भारत में शरण ली। लेकिन उसकी पार्टी, जो बांग्लादेश में सक्रिय थी, उसका अस्तित्व ही मिटाने का प्रयास हुआ है। यह किसी भी लोकतंत्रात्मक देश के शासन काल में नहीं होता, जो आज बांग्लादेश में हो रहा है। वहां की जनता को भी आवामी लीग पार्टी से लगाव है, यह पार्टी 77 साल पुरानी पर्टी हैं, इस पार्टी ने बांग्लादेश को विकास की दिशा दी है, उसे आज के पदासीन शासकों ने नकारा है, जो किसी भी तरह से न्याय के अनुकूल नहीं है। उम्मीद है वर्तमान बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान देश के लोगों की भावनाओं को समझेंगे, और सौहार्द का वातावरण अपने देश में कायम करेंगे।
लेखक: भगवती प्रसाद डोभाल
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