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चंपत राय के समर्थन में उतरे अयोध्या के साधु-संत बोले- ‘संघ का हर प्रचारक ईमानदा’, राम मंदिर ट्रस्ट से इस्तीफा नामंजूर करने की अपील

चंपत राय के समर्थन में उतरे अयोध्या के साधु-संत

Ayodhya Donation Scam: अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे को लेकर जारी विवाद के बीच शनिवार को संत समाज उनके समर्थन में उतर आया। संतों ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से अपील की कि वह चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार न करे।

संतों ने जताया चंपत राय की ईमानदारी पर भरोसा

अयोध्या में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए संतों ने चंपत राय की ईमानदारी, सच्चाई और निष्ठा पर पूरा भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि उन पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं और उनका मकसद उनकी सार्वजनिक छवि को खराब करना है। चंपत राय दशकों से राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण से गहराई से जुड़े रहे हैं और उनका सार्वजनिक जीवन पारदर्शिता और समर्पण से भरा रहा है। उन्होंने कहा कि उन पर लगाए गए आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है और यह उन्हें बदनाम करने की एक अनावश्यक कोशिश है। उन्होंने कहा कि इस विवाद के दौरान चंपत राय का व्यवहार पूरी तरह पारदर्शी रहा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद इस मामले की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) बनाने की मांग की थी, जिससे यह साबित होता है कि उनके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है और उन्हें पूरी जांच से कोई आपत्ति नहीं है।

Ayodhya Donation Scam: इस्तीफा स्वीकार नहीं किया चाहिए

एसआईटी बनाने के सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए संतों ने कहा कि जांच से सारे तथ्य सामने आ जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विवाद के बावजूद चंपत राय ने संयम बरता और सार्वजनिक बयान देने से बचे। उनके प्रति एकजुटता दिखाते हुए उन्होंने कहा कि अयोध्या के संत मजबूती से उनके साथ खड़े हैं और उन्हें अपना पूरा समर्थन और आशीर्वाद दे रहे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संतों ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी के सामने कई सवाल भी उठाए। उन्होंने मंदिर के फंड की सुरक्षा के लिए किए गए इंतजामों पर सवाल उठाए और जानना चाहा कि पर्याप्त सावधानी क्यों नहीं बरती गई। उन्होंने यह भी पूछा कि ट्रस्ट की प्रस्तावित बैठक समय से पहले क्यों बुलाई गई और इस फैसले की क्या जरूरत थी। संतों ने मांग की कि ट्रस्ट इन मुद्दों पर स्पष्ट जवाब दे। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है और भ्रम और विवाद से बचने के लिए मंदिर से जुड़े सभी मामलों में पूरी पारदर्शिता जरूरी है। बाद में कई संतों ने चंपत राय के लिए अपना समर्थन दोहराया और कहा कि उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

संघ का हर प्रचारक ईमानदार

संत राघवेश दास वेदांती ने आईएएनएस से ​​कहा कि अयोध्या के संत ट्रस्ट से मांग कर रहे हैं कि चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार न किया जाए। एसआईटी ने जिन आरोपियों को पकड़ा है, उन्हें रिमांड पर लिया गया है। कुछ दिनों में रिपोर्ट आ जाएगी और सब कुछ साफ हो जाएगा। राम कचहरी मंदिर के महंत शशिकांत दास ने आईएएनएस को बताया कि चंपत को दोषी ठहराया जा रहा है, जो पूरी तरह से बेबुनियाद है। इसमें चंपत की कोई गलती नहीं है। उन्हें हटाने की एक बड़ी साजिश रची जा रही है ताकि असली दोषी राम मंदिर को लूट सकें। आईएएनएस से ​​बात करते हुए वैदेही भवन के महंत वैदेही वल्लभ शरण ने भी चंपत राय का समर्थन करते हुए कहा कि संघ का हर प्रचारक ईमानदार होता है। संघ के प्रचारक समर्पित और अडिग होते हैं। ये कुछ बादल हैं जो जल्द ही छंट जाएंगे। इस बीच, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट 6 जुलाई को एक अहम बैठक करने वाला है, जिसमें सदस्य ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा द्वारा सौंपे गए इस्तीफों पर विचार करेंगे। बैठक में मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने और राम मंदिर के मैनेजमेंट से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) द्वारा की जा रही जांच पर भी चर्चा की जाएगी।

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