AYODHYA: रामनगरी अयोध्या एक और ऐतिहासिक क्षण की दहलीज़ पर खड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 नवंबर को राम मंदिर परिसर में एक विशेष रूप से तैयार किए गए दिव्य ध्वज का अनावरण और ध्वजारोहण करेंगे। यह ध्वज न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय इतिहास, अध्यात्म और पर्यावरण संरक्षण के विचारों को सहेजे हुए है।
त्रेता युग के ध्वजों से प्रेरित आधुनिक ध्वज
इस ध्वज की लंबाई 11 फीट और चौड़ाई 22 फीट है, जो अपने आप में विशाल और अनोखा है। डिजाइन और रिसर्च का कार्य ललित मिश्रा द्वारा किया गया है। मिश्रा बतातें हैं कि ध्वज का स्वरूप त्रेता युग में प्रयुक्त ध्वजों की प्रेरणा से तैयार किया गया है, जिसे आधुनिक तकनीक और पारंपरिक भावनाओं के संगम से साकार किया गया है।

AYODHYA: क्या हैं ध्वज के तीन प्रमुख प्रतीक
ध्वज के केंद्र में तीन पवित्र प्रतीक शामिल किए गए हैं —
1. ॐ : सनातन संस्कृति की अनंत ऊर्जा और अध्यात्म का प्रतीक
2. सूर्य : भगवान श्रीराम का सूर्यवंश से संबंध, साहस और तेज का प्रतीक
3. कोविदार वृक्ष : रामायण काल में वर्णित पवित्र वृक्ष, पर्यावरण संरक्षण का संदेश
डिजाइनर ललित मिश्रा का कहना है कि ॐ का समावेश दर्शाता है कि सनातन न कभी नष्ट होता है, न समाप्त — यह निरंतर सृजनशीलता का प्रतीक है।कोविदार वृक्ष का चयन बेहद शोधपूर्ण रहा क्योंकि इसका उल्लेख वाल्मीकि रामायण के अयोध्या कांड में मिलता है।

पर्यावरणीय संदेश और पौराणिक धरोहर का संगम
कोविदार वृक्ष का ध्वज पर अंकन केवल पौराणिक संकेत नहीं, बल्कि पर्यावरण-संरक्षण का संदेश भी देता है।
ध्वज को गुजरात में विशेष प्रकार की कपड़े की तकनीक से तैयार किया गया है। यह कपड़ा- धूल, मिट्टी और पानी से सुरक्षित, हर मौसम में स्वच्छ और सजीव दिखने वाला है।
AYODHYA: विशेष तकनीक से हमेशा लहराएगा ध्वज
ध्वज को इस प्रकार स्थापित किया जाएगा कि यह 360 डिग्री घूम सके, जिससे यह हमेशा हवा में लहराता प्रतीत होगा। 25 नवंबर का यह क्षण केवल श्रद्धा और गौरव का उत्सव नहीं, बल्कि हमारे वैदिक इतिहास की पुनर्स्थापना का दिव्य प्रतीक भी बनेगा। देश-दुनिया की करोड़ों आंखें इस पल की गवाह होंगी, जब पीएम नरेंद्र मोदी इस ध्वज का उद्घाटन करेंगे। यह ध्वज आने वाली पीढ़ियों के लिए धर्म, इतिहास और प्रकृति संरक्षण का प्रेरणास्रोत बनकर खड़ा रहेगा।
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