BENGAL BY ELECTION 2026: पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर 24 जुलाई को होने वाले उपचुनाव से पहले सियासी समीकरण तेज हो गए हैं। तृणमूल कांग्रेस में टूट के बावजूद विधानसभा का गणित ऐसा है कि ममता बनर्जी की राजनीतिक ताकत बरकरार दिखाई दे रही है। मौजूदा स्थिति में उनके समर्थन के बिना ऋतब्रता बनर्जी गुट के लिए राज्यसभा की एक भी सीट जीतना आसान नहीं माना जा रहा है।
एक सीट के लिए 74 विधायकों की जरूरत
294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 74 विधायकों का समर्थन जरूरी है। भाजपा के पास 207 विधायक हैं, जिससे वह दो सीटें आसानी से जीत सकती है। हालांकि तीसरी सीट के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता होगी।
BENGAL BY ELECTION 2026: तीसरी सीट पर बढ़ी दिलचस्पी
विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायक हैं, लेकिन पार्टी दो गुटों में बंटी हुई है। यदि दोनों गुट अलग-अलग उम्मीदवार उतारते हैं तो तीसरी सीट का मुकाबला रोचक हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी अपने विरोधी गुट को किसी भी स्थिति में समर्थन नहीं देंगी।
ममता के बिना मुश्किल में ऋतब्रता गुट
ऋतब्रता बनर्जी गुट का दावा है कि उसके साथ लगभग 60 विधायक हैं। ऐसे में बहुमत का आंकड़ा छूने के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी। ममता गुट के सहयोग की संभावना लगभग न के बराबर मानी जा रही है, जिससे ऋतब्रता गुट की राह कठिन दिखाई दे रही है।
BENGAL BY ELECTION 2026: भाजपा की रणनीति पर भी नजर
भाजपा के पास दो उम्मीदवारों को जिताने के बाद भी पर्याप्त वोट बचेंगे। ऐसे में राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि क्या भाजपा तीसरी सीट के लिए रणनीतिक समर्थन देगी या क्रॉस वोटिंग की संभावना तलाशेगी। तीसरी सीट का परिणाम काफी हद तक इसी रणनीति पर निर्भर करेगा।
विधानसभा का मौजूदा गणित
वर्तमान विधानसभा में भाजपा के 207 विधायक, तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायक, कांग्रेस के 2 विधायक, हुमायूं कबीर की पार्टी के 2 विधायक तथा सीपीआई और एआईएसएफ के एक-एक विधायक हैं। ऐसे में राज्यसभा उपचुनाव केवल सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि टीएमसी में शक्ति संतुलन की भी बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
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