Bhojshala Dispute News: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने धार स्थित भोजशाला विवाद मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए परिसर को मंदिर माना है। कोर्ट ने उस पुराने आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें मुस्लिम पक्ष को परिसर में नमाज की अनुमति दी गई थी।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि भोजशाला परिसर का धार्मिक स्वरूप मंदिर का है और यहां देवी सरस्वती का प्राचीन मंदिर मौजूद था। अदालत ने कहा कि ऐतिहासिक दस्तावेजों और साहित्यिक प्रमाणों से यह स्पष्ट होता है कि यह स्थान संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र था। कोर्ट ने कहा कि विवादित परिसर एक संरक्षित स्मारक है, लेकिन उसका मूल धार्मिक स्वरूप भोजशाला और मां वाग्देवी (सरस्वती) मंदिर का है।
Bhojshala Dispute News: 2003 का आदेश रद्द
हाईकोर्ट ने 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसमें मुस्लिम समुदाय को परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने कहा कि मुस्लिम पक्ष वैकल्पिक भूमि के लिए सरकार को आवेदन दे सकता है, जिस पर राज्य सरकार विचार करेगी।
हिंदू पक्ष की याचिका पर फैसला
यह फैसला उन याचिकाओं पर सुनाया गया, जिनमें हिंदू पक्ष ने भोजशाला परिसर को पूरी तरह हिंदुओं को सौंपने और वहां नमाज पर रोक लगाने की मांग की थी। अदालत ने हिंदू पक्ष के दावों को स्वीकार करते हुए पूजा-पाठ के अधिकार को मान्यता दी।
Bhojshala Dispute News: विष्णु शंकर जैन ने बताया ऐतिहासिक फैसला
हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर माना है। उन्होंने कहा कि अदालत ने हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार भी दिया है और 2003 का आदेश रद्द कर दिया है।
लंबे समय से चल रहा था विवाद
धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच विवाद चल रहा था। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर मानता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद से जुड़ा धार्मिक स्थल बताता रहा है। हाईकोर्ट के इस फैसले को इस लंबे विवाद में महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
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