New Delhi: अंतत: कांग्रेस ने काफी खींचतान के बाद केरल में मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा कर ही दी।राज्य में यूडीएफ को चुनाव जीते दस दिन हो गए थे, लेकिन कांग्रेस आलाकमान मुख्यमंत्री पद के लिए उभरी भयंकर गुटबाजी के चलते फैसला नहीं ले पा रहा था। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस आलाकमान की भरपूर कोशिश रही कि वेणुगोपाल को राज्य की कमान सौंप दी जाए, लेकिन स्थानीय कार्यकर्ताओं के असंतोष और विद्रोही तेवरों को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान को विवश होकर वीडी सतीशन के नाम का ऐलान करना पड़ा।
कांग्रेस आलाकमान की नीति
दरअसल, कांग्रेस आलाकमान अपने चहेतों या बड़े नेताओं को राज्यों में खपाने की नीति अपनाता रहा है, इसके लिए उसे जमीनी हकीकतों को नजरंदाज करने में भी संकोच नहीं रहा। वर्ष 2000 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष हरीश रावत ने जमीन पर लड़ाई लड़कर पार्टी को सत्ता में पहुंचाया, लेकिन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी बना दिये गये क्योंकि वे तब एक तरह से केंद्र में बेरोजगार थे, तो राज्य में खपा दिये गये। उस वक्त पार्टी विधायकों ने देहरादून में तिवारी के खिलाफ प्रदर्शन किया था। जहां आलाकमान को लगता है कि राज्य का जमीनी नेतृत्व बगावत कर सकता है, वहां वह कदम पीछे खींचने को विवश भी हो जाता है। उत्तराखंड के बाद हिमाचल में कांग्रेस के सत्ता में आने पर जब वीरभद्र सिंह को लगा कि वे आलाकमान की पसंद नहीं हैं, तो उन्होंने कड़ा संदेश दिया कि वे ही सीएम होंगे और हुआ भी वही।अपने चहेतों या बड़े नेताओं को राज्य में खपाने की आलाकमान की भूल या जिद पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हुई, लेकिन वह फिर भी इसे दोहराता रहता है।
New Delhi: मजबूरी में बनाए सतीशन
केरल में आलाकमान के खिलाफ कार्यकर्ताओं के प्रचंड असंतोष का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वायनाड में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को निशाना बनाने वाले पोस्टर लगे।अंग्रेजी में लिखे पोस्टर में राहुल और प्रियंका पर आरोप लगाया गया है कि वे केसी वेणुगोपाल को केरल पर थोपने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि व्यापक जनभावना उनके खिलाफ है।इनमें से एक पोस्टर में चेतावनी दी गई कि ‘केरल आपको कभी माफ नहीं करेगा,’ जबकि दूसरे पोस्टर में एक अशुभ घोषणा की गई कि ‘वायनाड दूसरा अमेठी बन जाएगा’।सवाल उठा कि जब वेणुगोपाल विधानसभा चुनाव जितवाने की भूमिका में नहीं रहे, तो फिर उन्हें कार्यकर्ताओं की भावना के विरुद्ध राज्य में क्यों थोपा जा रहा है ? बताया जाता है कि इस विस्फोटक स्थिति में कांग्रेस ने विवश होकर वीडी सतीशन के नाम पर मोहर लगाने में ही भलाई समझी।








