Bihar Cabinet: बिहार में प्रस्तावित कैबिनेट विस्तार से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन इससे पहले ही गठबंधन के भीतर मंत्री पदों को लेकर खींचतान सामने आने लगी है। जनता दल (यूनाइटेड) ने खुले तौर पर अपनी मांग रखकर राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
जेडीयू ने रखी 16 मंत्री पदों की मांग
जनता दल (यूनाइटेड) की बिहार इकाई के अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी सरकार में 16 मंत्री पद चाहती है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है और उम्मीद है कि कैबिनेट विस्तार में उसे उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा। इस मांग के सामने आने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इस संतुलन को कैसे साधते हैं।
Bihar Cabinet: सत्ता परिवर्तन के बाद बदली राजनीतिक तस्वीर
पिछले महीने बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला था, जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा का रुख किया। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी के नेता सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद संभाला। वर्तमान मंत्रिमंडल अभी छोटा है, जिसमें जेडीयू के दो वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद उपमुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में कैबिनेट विस्तार को लेकर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
संवैधानिक सीमा और विस्तार की तैयारी
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार बिहार में अधिकतम 30 मंत्री बनाए जा सकते हैं, जो विधानसभा की कुल संख्या का 15 प्रतिशत है। गुरुवार को प्रस्तावित शपथ ग्रहण समारोह में कई बड़े नेताओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। इस विस्तार में विभिन्न दलों के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
Bihar Cabinet: गठबंधन सहयोगियों की उम्मीदें और नई चर्चाएं
एनडीए गठबंधन में शामिल अन्य दल भी कैबिनेट में हिस्सेदारी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। इनमें लोक जनशक्ति पार्टी, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख हैं। वहीं, नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, पार्टी नेताओं का कहना है कि उन्होंने फिलहाल संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच सक्रिय रहने का फैसला किया है। इस बीच, कैबिनेट विस्तार को लेकर जारी चर्चाओं ने बिहार की राजनीति को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।








