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Boss Scam: उद्योगपति नरेश गुजराल की कंपनी से 7.8 करोड़ की ठगी, जानिए कैसे काम करता है यह खतरनाक तरीका

Boss Scam : देश में साइबर अपराध के मामले लगातार नए-नए रूप ले रहे हैं। ताजा मामला पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के बेटे और उद्योगपति नरेश गुजराल से जुड़ी कंपनी का है, जहां साइबर ठगों ने बेहद सुनियोजित तरीके से करीब 7.8 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया। इस घटना ने एक बार फिर कॉरपोरेट जगत में साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की धोखाधड़ी को ‘बॉस स्कैम’ या ‘बिजनेस ईमेल फ्रॉड’ कहा जाता है।

इसमें अपराधी किसी कंपनी के मालिक, सीईओ, चेयरमैन या वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद कर्मचारियों को तत्काल भुगतान या गोपनीय वित्तीय लेनदेन का निर्देश भेजा जाता है। संदेश इस तरह तैयार किए जाते हैं कि सामने वाला व्यक्ति उसे असली मान लेता है और बिना किसी अतिरिक्त पुष्टि के कार्रवाई कर देता है।

Boss Scam

पुलिस जांच में सामने आया है कि ठगों ने एक मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर उद्योगपति नरेश गुजराल की तस्वीर का उपयोग करते हुए फर्जी अकाउंट तैयार किया। इसके बाद कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) से संपर्क किया गया। संदेशों में कुछ जरूरी कारोबारी भुगतान का हवाला दिया गया और तत्काल धनराशि ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए। फर्जी संदेशों को असली समझकर कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी ने निर्देशों का पालन किया। पुलिस के मुताबिक आरटीजीएस के माध्यम से करीब 7.8 करोड़ रुपये अलग-अलग बैंक खातों में भेज दिए गए। बाद में जब लेनदेन की जांच की गई तो पता चला कि जिन संदेशों के आधार पर भुगतान किया गया था, वे पूरी तरह फर्जी थे और ठगी का हिस्सा थे।

क्यों खतरनाक माना जाता है यह फ्रॉड

बॉस स्कैम में अपराधी तकनीकी हैकिंग से ज्यादा मनोवैज्ञानिक दबाव का इस्तेमाल करते हैं। वे ऐसे संदेश भेजते हैं जिनमें गोपनीयता, जल्दबाजी और वरिष्ठ अधिकारी का प्रभाव दिखाई देता है। इसी कारण कई बार कर्मचारी बिना दोबारा पुष्टि किए वित्तीय लेनदेन कर बैठते हैं। साइबर विशेषज्ञ बताते हैं कि जब किसी बड़े उद्योगपति, वरिष्ठ अधिकारी, राजनेता या प्रभावशाली व्यक्ति की पहचान का उपयोग कर वित्तीय धोखाधड़ी की जाती है, तो उसे ‘व्हेलिंग अटैक’ कहा जाता है। इसमें बड़े पदों पर बैठे लोगों की साख और पहचान का फायदा उठाकर कंपनियों को निशाना बनाया जाता है।

जरूरी हैं ये सावधानियां

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बड़े भुगतान से पहले फोन कॉल या आधिकारिक माध्यम से पुष्टि करना जरूरी है। केवल फोटो, नाम या मैसेज देखकर वित्तीय निर्णय लेना जोखिम भरा हो सकता है। कंपनियों को भी अपने कर्मचारियों को साइबर जागरूकता प्रशिक्षण देने और भुगतान प्रक्रिया में अतिरिक्त सत्यापन व्यवस्था लागू करने की जरूरत है।

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