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ब्रेस्ट कैंसर की पहचान में देरी बनी बड़ी वजह, भारत में सिर्फ 65.7% सर्वाइवल रेट: WHO रिपोर्ट में खुलासा

ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवल रेट पर WHO रिपोर्ट

Breast Cancer: ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में होने वाले सबसे आम कैंसर में से एक है। इस बीमारी को लेकर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की एक नई रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में भारत में ब्रेस्ट कैंसर से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या और सर्वाइवल रेट में सुधार हुआ है।हालांकि, इसके बावजूद भारत का ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवल रेट विकसित और अमीर देशों की तुलना में अभी भी काफी कम है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में ब्रेस्ट कैंसर की पहचान होने के बाद हर तीन महिलाओं में से केवल दो महिलाएं ही कम से कम पांच साल तक जीवित रह पाती हैं।

क्या कहते हैं आंकड़े?

WHO ने अपने सभी 194 सदस्य देशों के लिए ब्रेस्ट कैंसर के पांच साल के सर्वाइवल रेट का अनुमान लगाया है। यह रिपोर्ट नेचर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित हुई है।रिपोर्ट के अनुसार, साल 2017 से 2021 के बीच भारत में ब्रेस्ट कैंसर का पांच साल का सर्वाइवल रेट 65.7% रहा। वहीं, पूरी दुनिया का औसत (ग्लोबल मीडियन) 77.8% है। यानी भारत का सर्वाइवल रेट वैश्विक औसत से काफी कम है, जो चिंता की बात मानी जा रही है।

अमीर देशों का प्रदर्शन बेहतर

रिपोर्ट में बताया गया है कि अधिक आय वाले देशों में ब्रेस्ट कैंसर का सर्वाइवल रेट 87.3% रहा। वहीं, अमेरिका में यह 88.5% और यूरोपीय देशों में 84% दर्ज किया गया। ये सभी आंकड़े भारत की तुलना में काफी बेहतर हैं।इस स्टडी का उद्देश्य हर साल समय से पहले होने वाली मौतों में 2.5% की कमी लाना और साल 2040 तक 25 लाख लोगों की जान बचाना है।

Breast Cancer:  ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवल रेट पर WHO रिपोर्ट
ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवल रेट पर WHO रिपोर्ट
भारत में सुधार, लेकिन अभी लंबा सफर बाकी

भारत में पिछले कुछ दशकों में ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवल रेट में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम की साल 2024 की एक भारतीय स्टडी के मुताबिक, 1990 के दशक में यह दर 31% से 54% के बीच थी। वहीं, 2012 से 2015 के दौरान यह बढ़कर 66.4% तक पहुंच गई।इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि अभी और सुधार की जरूरत है। अगर शुरुआती जांच और बेहतर इलाज की सुविधा ज्यादा लोगों तक पहुंचे, तो सर्वाइवल रेट को और बढ़ाया जा सकता है।

जागरूकता की कमी बनी बड़ी चुनौती

सरकार की आयुष्मान भारत-पीएमजेएवाई जैसी योजनाओं और कम्युनिटी स्तर पर की जा रही जांच से ब्रेस्ट कैंसर की समय पर पहचान करने में मदद मिली है।फिर भी आज भी कई महिलाएं जागरूकता की कमी, सामाजिक झिझक, जांच में देरी और आर्थिक परेशानियों की वजह से समय पर जांच नहीं करा पाती हैं। इसका नतीजा यह होता है कि जब वे डॉक्टर के पास पहुंचती हैं, तब तक कैंसर अक्सर आखिरी स्टेज में पहुंच चुका होता है।

आय के आधार पर सर्वाइवल रेट

अलग-अलग आय वर्ग वाले देशों में ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों के पांच साल तक जीवित रहने की दर में बड़ा अंतर देखने को मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादा आय वाले देशों में सर्वाइवल रेट 87.3% दर्ज किया गया। वहीं, उच्च-मध्यम आय वाले देशों में यह 78.7%, निम्न-मध्यम आय वाले देशों में 60.1% और कम आय वाले देशों में केवल 41.9% रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि किसी देश की आर्थिक स्थिति का बेहतर इलाज, समय पर जांच और मरीजों के सर्वाइवल रेट पर सीधा असर पड़ता है।

समय पर इलाज सबसे जरूरी

साल 2024 में दुनिया भर में ब्रेस्ट कैंसर की वजह से करीब 6.9 लाख लोगों की मौत हुई। इनमें से लगभग 70% मौतें निम्न और मध्यम आय वाले देशों में दर्ज की गईं।रिपोर्ट से साफ है कि ब्रेस्ट कैंसर से होने वाली मौतों को कम करने के लिए बीमारी की जल्द पहचान बेहद जरूरी है। इसके साथ ही मरीजों को समय पर सही इलाज, दवाएं और आर्थिक सहायता मिलना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई मामलों में आर्थिक तंगी इलाज शुरू होने में सबसे बड़ी बाधा बन जाती है।

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