BRICS Summit 2026: दिल्ली में हो रहा BRICS शिखर सम्मेलन भारत के लिए सिर्फ वैश्विक मुद्दों पर चर्चा का मंच नहीं है। भारत इस मौके का इस्तेमाल अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी द्विपक्षीय साझेदारियों को मजबूत करने के लिए भी कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इथियोपिया और मलेशिया के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत इसी रणनीति का हिस्सा है। इनके अलावा वियतनाम के साथ भी भारत की रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर दिखाई दे रहा है।
इन बैठकों को एक साथ देखें तो भारत की कूटनीति के कई लक्ष्य सामने आते हैं-रक्षा सहयोग, निवेश, महत्वपूर्ण खनिज, सेमीकंडक्टर, सप्लाई चेन और इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक पहुंच। यही वजह है कि BRICS का यह सम्मेलन भारत के लिए केवल बहुपक्षीय कूटनीति नहीं, बल्कि कई मोर्चों पर एक साथ रिश्ते साधने का अवसर बन गया है।
सवाल-1: इथियोपिया से भारत ने क्या साधने की कोशिश की?
अफ्रीका भारत की विदेश नीति में लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। इथियोपिया के साथ बातचीत इसी व्यापक अफ्रीका नीति का हिस्सा है। इथियोपिया के साथ रक्षा सहयोग, प्रशिक्षण, निवेश और खनिज क्षेत्र में संभावनाएं भारत के लिए खास महत्व रखती हैं। अफ्रीकी देश अपने प्राकृतिक संसाधनों और तेजी से बढ़ते बाजार के कारण भारत के लिए आर्थिक अवसर पैदा करते हैं।
खास तौर पर महत्वपूर्ण खनिजों और कच्चे माल की सप्लाई चेन को सुरक्षित करना आने वाले वर्षों में रणनीतिक प्राथमिकता हो सकता है। ऐसे में भारतीय कंपनियों के लिए इथियोपिया में निवेश की संभावनाएं दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई दिशा दे सकती हैं। यानी इथियोपिया के मामले में भारत का निशाना सिर्फ कूटनीतिक संबंध मजबूत करना नहीं, बल्कि अफ्रीका में आर्थिक और रणनीतिक मौजूदगी बढ़ाना भी है।
BRICS Summit 2026: सवाल-2: रक्षा सहयोग भारत के लिए कितना बड़ा दांव है?
भारत अब केवल हथियारों का बड़ा खरीदार बनने के बजाय रक्षा उपकरणों का निर्यातक और रक्षा साझेदार बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इथियोपिया और मलेशिया जैसे देशों के साथ रक्षा प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और रक्षा उद्योग में सहयोग भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्यों से जुड़ सकता है। हालांकि किसी देश के साथ बातचीत को तत्काल बड़े रक्षा सौदे में बदलकर देखना सही नहीं होगा। असली महत्व इस बात का है कि भारत धीरे-धीरे ऐसे बाजार तैयार कर रहा है जहां उसके स्वदेशी रक्षा उत्पादों के लिए संभावनाएं बन सकें।
सवाल-3: मलेशिया भारत के लिए क्यों खास है?
मलेशिया भारत की दक्षिण-पूर्व एशिया रणनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ASEAN क्षेत्र में उसकी आर्थिक और भौगोलिक स्थिति उसे भारत के लिए उपयोगी साझेदार बनाती है।मलेशिया के साथ संबंधों का एक अहम पहलू अब हाई-टेक उद्योग और सप्लाई चेन भी बन रहा है। खास तौर पर सेमीकंडक्टर सेक्टर दोनों देशों के लिए भविष्य का बड़ा सहयोग क्षेत्र हो सकता है। दुनिया जिस तेजी से चिप सप्लाई चेन को चीन और कुछ चुनिंदा देशों पर निर्भरता से बाहर निकालने की कोशिश कर रही है, उसमें भारत और मलेशिया के बीच सहयोग की संभावनाएं बढ़ती हैं।
BRICS Summit 2026: सवाल-4: सेमीकंडक्टर पर भारत की नजर क्यों है?
मोबाइल फोन से लेकर कार, AI, रक्षा उपकरण और टेलीकॉम तक लगभग हर हाई-टेक उद्योग को सेमीकंडक्टर की जरूरत है। भारत घरेलू चिप निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रहा है। वहीं मलेशिया लंबे समय से ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का हिस्सा रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग का मतलब सिर्फ व्यापार बढ़ाना नहीं है। यह भविष्य की टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन में अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश भी है।

सवाल-5: फिर वियतनाम कहां फिट होता है?
भारत की इस रणनीति में वियतनाम भी महत्वपूर्ण कड़ी है। वियतनाम के साथ भारत के संबंधों में रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार और इंडो-पैसिफिक सहयोग पहले से महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं। इंडो-पैसिफिक में समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से भारत और वियतनाम के हित कई जगह एक-दूसरे से जुड़ते हैं। इसलिए वियतनाम के साथ रिश्ते भारत की उस नीति को मजबूत करते हैं जिसमें दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता दी जा रही है।
BRICS Summit 2026: सवाल-6: क्या भारत BRICS को अपनी ‘ग्लोबल साउथ’ कूटनीति के लिए इस्तेमाल कर रहा है?
BRICS का विस्तार होने के बाद इसका महत्व सिर्फ पांच मूल देशों तक सीमित नहीं रहा। अब यह ग्लोबल साउथ के कई महत्वपूर्ण देशों को एक मंच पर लाने वाला बड़ा समूह बन चुका है। भारत के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दिल्ली लंबे समय से विकासशील देशों की आवाज, वैश्विक संस्थाओं में सुधार और अधिक संतुलित बहुपक्षीय व्यवस्था की बात करता रहा है। BRICS की मेजबानी भारत को एक साथ दो स्तरों पर काम करने का मौका देती है—बहुपक्षीय मंच पर अपनी प्राथमिकताएं रखने का और अलग-अलग देशों के साथ द्विपक्षीय रिश्ते मजबूत करने का।
सवाल-7: ‘कई निशाने’ आखिर कौन-कौन से हैं?
अगर पूरे घटनाक्रम को एक साथ देखें तो भारत की रणनीति के कम से कम पांच बड़े आयाम दिखाई देते हैं। पहला- रक्षा: भारत रक्षा प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और स्वदेशी रक्षा उत्पादों के लिए नए साझेदार तलाश रहा है। दूसरा – खनिज: अफ्रीकी देशों के साथ संबंध महत्वपूर्ण खनिजों और कच्चे माल की भविष्य की सप्लाई चेन में मदद कर सकते हैं।तीसरा- सेमीकंडक्टर: मलेशिया जैसे देशों के साथ साझेदारी भारत के हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत कर सकती है। चौथा-इंडो-पैसिफिक: वियतनाम और ASEAN क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग भारत की समुद्री और रणनीतिक पहुंच को मजबूत करता है। पांचवां- ग्लोबल साउथ: BRICS के जरिए भारत विकासशील देशों के बीच अपनी कूटनीतिक भूमिका को और मजबूत कर सकता है।
BRICS Summit 2026: सवाल-8: क्या इससे भारत की ‘बढ़ती साख’ साबित होती है?
किसी एक सम्मेलन या बैठक से किसी देश की वैश्विक साख तय नहीं होती। लेकिन लगातार अलग-अलग क्षेत्रों और देशों के साथ बढ़ता संवाद यह जरूर दिखाता है कि भारत अपनी विदेश नीति को केवल पारंपरिक साझेदारों तक सीमित नहीं रखना चाहता। रूस और अमेरिका जैसे बड़े शक्तिशाली देशों के साथ संबंध बनाए रखते हुए भारत अफ्रीका, ASEAN और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भी अपने विकल्प बढ़ा रहा है। यही भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का अहम पहलू है—किसी एक धुरी पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग देशों के साथ अपने हितों के आधार पर साझेदारी बढ़ाना।
BRICS सिर्फ बैठक नहीं, रिश्तों का बड़ा मंच
दिल्ली में BRICS का मंच भारत के लिए कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है। इथियोपिया से अफ्रीका में आर्थिक और रणनीतिक पहुंच, मलेशिया से सेमीकंडक्टर और सप्लाई चेन, जबकि वियतनाम से इंडो-पैसिफिक और समुद्री सुरक्षा के मोर्चे पर सहयोग की संभावनाएं जुड़ी हैं।
इसलिए “BRICS से भारत ने साधे कई निशाने” सिर्फ एक राजनीतिक जुमला नहीं, बल्कि इस सम्मेलन के दौरान चल रही व्यापक द्विपक्षीय कूटनीति को समझने का एक तरीका है। अब असली परीक्षा बैठकों और बयानों की नहीं, बल्कि यह होगी कि इन संपर्कों से आने वाले समय में कितने ठोस निवेश, रक्षा सहयोग, तकनीकी साझेदारी और व्यापारिक परिणाम निकलते हैं।
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