New Delhi: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के करीबी चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी और नकदी बरामद होने का मामला सामने आने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है।भाजपा रावत के खिलाफ हमलावर हो गई है। ऐसा लगता है कि ईडी का छापा हरीश रावत विरोधियों के लिए एक बड़ा हथियार साबित हो जाएगा।खास बात यह है कि रावत के लिए भाजपा से ज्यादा अपनी पार्टी के भीतर से मुश्किलें हो सकती हैं। उनके सामने ‘एक तरफ कुआं, तो दूसरी तरफ खाई’ जैसी स्थिति पैदा हो चुकी है।
रावत के मुख्यमंत्री रहते हुई कांग्रस में बड़ी बगावत
दरअसल, हरीश रावत उत्तराखंड कांग्रेस के बड़े नेता तो हैं, लेकिन कांग्रेस के भीतर उनके खिलाफ असंतोष के स्वर उनके मुख्यमंत्री रहते ही उठ गये थे।तब कुछ बड़े नेताओं ने रावत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।यही नहीं इन नेताओं ने असंतुष्ट होकर भाजपा का दामन थाम लिया था।2017 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में छिड़े इस घमासान और बड़े नेताओं के भाजपा में चले जाने के बाद कांग्रेस को भारी नुकसान हुआ। कांग्रेस फिर राज्य की सत्ता में नहीं लौट पाई।कांग्रेस में रावत विरोधी अभी भी शांत नहीं हुए हैं।
New Delhi: रावत को दरकिनार करना चाहते हैं विरोधी
हालांकि 2017 में हरीश रावत का विरोध करने वाले कुछ नेता कांग्रेस में वापस लौट आए हैं, लेकिन 2027 में यदि कांग्रेस को बहुमत मिल भी गया तो ये सीएम पद के लिए हरीश रावत के नाम का समर्थन करेंगे, यह कह पाना काफी मुश्किल है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भी हरीश रावत के खिलाफ असंतोष देखा गया।पार्टी के महत्वाकांक्षी नेताओं को लगता है कि जब हरीश रावत अपनी पारी खेल चुके हैं, तो उन्हें अब मैदान से हट जाना चाहिए।
New Delhi: विरोधियों को मिला बेहतर मौका
हरीश रावत के ओएसडी रह चुके चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के चलते कांग्रेस में रावत विरोधियों को एक बार फिर सक्रिय होने का मौका मिल गया है।वे कांग्रेस आलाकमान के सामने यह बात उठा सकते हैं कि एक ओर जहां राहुल गांधी निरंतर भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष कर रहे हैं। राज्य में कांग्रेस उनकी मुहिम को आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के किसी बड़े नेता के करीबी या पूर्व ओएडी पर छापा भाजपा को हमला करने का हथियार थमा गया है। इससे पार्टी की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम को झटका लगा है।
New Delhi: एक तीर से तीन निशाने
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत राजनीति के बड़े खिलाड़ी हैं।इस बार उन्होंने एक तीर से तीन जगह निशाने लगाए हैं।शायद उन्हें अहसास है कि कांग्रेस के भीतर से उनका विरोध हो सकता है, इसीलिए उन्होंने अपने खिलाफ नैतिक और राजनीतिक दबाव पैदा होने से पहले ही कांग्रेस वर्किंग कमेटी और प्रदेश कार्यकारी समिति के पदों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने तत्काल इस्तीफा देकर कांग्रेस आलाकमान को संदेश दिया है कि वे किसी भी दशा में पार्टी पर आँच नहीं आने देंगे।रावत के इस्तीफे का दांव जनता और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सहानुभूति हासिल करने की रणनीति समझा जा रहा है।इसके साथ ही उन्होंने भाजपा पर भी हमला किया कि चुनाव के समय उनके खिलाफ ईडी और सीबीआई की सक्रियता तो होनी ही थी। उन्होंने कहा, “इस बार, मेरे घर पर दस्तक देने के बजाय, मेरे एक सहयोगी के घर पर दस्तक देने और एक मनगढ़ंत कहानी बनाने का प्रयास किया गया है।”अब देखना है कि रावत का यह दांव कितना कारगर साबित हो पाता है?








