BRICS Summit 2026: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS समिट में शामिल होने के लिए भारत पहुंच गए हैं। उनका विमान रात करीब 3 बजे नई दिल्ली पहुंचा। एयरपोर्ट पर विदेश राज्य मंत्री केवी सिंह ने उनका स्वागत किया। इसके बाद रेड कार्पेट और गार्ड ऑफ ऑनर की औपचारिकता पूरी की गई और पुतिन का काफिला एयरपोर्ट से रवाना हुआ। रूसी राष्ट्रपति दिल्ली के आईटीसी मौर्या होटल में ठहरे हैं।
BRICS Summit 2026: मोदी-पुतिन की बैठक में रक्षा सौदों पर चर्चा
BRICS समिट से पहले आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच बैठक होगी। इस दौरान Su-57 फाइटर जेट और अपडेटेड ब्रह्मोस समेत कई रक्षा सौदों पर चर्चा होने की संभावना है। रूस पहले ही भारत को Su-57 फाइटर जेट बेचने के साथ-साथ भारत में इसके उत्पादन और जरूरी तकनीक साझा करने की पेशकश कर चुका है। भारत चाहता है कि इस समझौते के जरिए उसे ऐसी तकनीक मिले, जिसका इस्तेमाल भविष्य में देश में ही लड़ाकू विमान विकसित करने में किया जा सके।
पुतिन से पहले भारत पहुंची उनकी बख्तरबंद कार
BRICS समिट में शामिल होने वाले दुनिया के दो बड़े नेताओं, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के काफिले सबसे बड़े काफिलों में शामिल होंगे। गुरुवार को जेवर एयरपोर्ट पर तीन रूसी ट्रांसपोर्ट विमानों के जरिए पुतिन का काफिला भारत पहुंचा। उनके साथ ऑरस सीनेट बख्तरबंद लिमोजिन भी लाई गई।पुतिन के साथ आने वाला ‘फ्लाइंग क्रेमलिन’ IL-96-300PU विमान एक चलता-फिरता राष्ट्रपति कमांड सेंटर है। दिल्ली में पुतिन की अंदरूनी सुरक्षा की जिम्मेदारी एफएसओ के पास रहेगी, जबकि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां बाहरी सुरक्षा घेरा संभालेंगी।

BRICS Summit 2026: खाने से लेकर सुरक्षा तक खास इंतजाम
पुतिन को दिए जाने वाले खाने की भी अलग से जांच की जाएगी। रूस अपने रसोइयों की सेवाएं लेगा। इससे पहले रूस की दूसरी Il-96 स्पेशल फ्लाइट राजनयिकों के साथ दिल्ली पहुंच चुकी है। रूस के पहले डिप्टी PM डेनिस मंटुरोव भी भारत पहुंच चुके हैं।
S-400 और ‘सुपर सुखोई’ पर भी बातचीत
भारत रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की बाकी खेप की आपूर्ति और उसके रखरखाव से जुड़े मुद्दों पर बात कर सकता है। इसके अलावा Su-30MKI लड़ाकू विमानों को अपग्रेड करने पर भी चर्चा हो सकती है। ‘सुपर सुखोई’ योजना के तहत इन विमानों में बेहतर रडार और नए हथियार लगाए जाने हैं।
ब्रह्मोस-NG पर बढ़ सकता है सहयोग
भारत और रूस ब्रह्मोस मिसाइल के नए और हल्के संस्करण पर मिलकर काम आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं। इसमें ब्रह्मोस-NG महत्वपूर्ण है। यह मौजूदा ब्रह्मोस की तुलना में हल्की होगी और इसे तेजस जैसे लड़ाकू विमानों से भी लॉन्च किया जा सकेगा।
BRICS Summit 2026: रक्षा के साथ परमाणु ऊर्जा पर भी फोकस
रक्षा क्षेत्र के अलावा भारत और रूस के बीच परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी बातचीत हो सकती है। रूस की सरकारी कंपनी रोसाटॉम भारत में कुडनकुलम परमाणु बिजली संयंत्र पर काम कर रही है। अब भारत में रूसी तकनीक की मदद से नए परमाणु बिजली संयंत्र स्थापित करने पर भी चर्चा होने की संभावना है।दोनों देश छोटे आकार के परमाणु रिएक्टर बनाने में सहयोग की संभावनाएं भी तलाश सकते हैं। ये रिएक्टर बड़े परमाणु बिजली संयंत्रों की तुलना में आकार में छोटे होते हैं।

रुपये-रूबल में कारोबार बढ़ाने की कोशिश
भारत और रूस डॉलर की जगह रुपये और रूबल में कारोबार बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इससे दोनों देशों के बीच भुगतान अपनी-अपनी राष्ट्रीय करेंसी में किया जा सकेगा।क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा था कि रूस डॉलर को हटाने की कोशिश नहीं कर रहा है, बल्कि भुगतान के आसान विकल्पों के लिए तैयार है। उन्होंने बताया था कि BRICS देशों के साथ रूस का करीब 90% कारोबार स्थानीय करेंसी में हो रहा है।भारत और रूस के पास एक-दूसरे की करेंसी भी जमा हो गई है। अब इन पैसों को कारोबार और निवेश में इस्तेमाल करने के साथ रुपये-रूबल में भुगतान की प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी बातचीत हो सकती है।
BRICS Summit 2026: रूस तक पहुंचने के रास्तों पर चर्चा
व्यापार को बढ़ावा देने के लिए भारत और रूस इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर यानी INSTC और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा कर सकते हैं।INSTC भारत को ईरान के रास्ते रूस से जोड़ता है। वहीं चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग के जरिए भारत और रूस के पूर्वी हिस्से के बीच सामान पहुंचाने का समय करीब 40 दिन से घटकर 20-22 दिन किया जा सकता है।
ईरानी राष्ट्रपति से भी मिलेंगे PM मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेशकियान के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे। पजेशकियान शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। यह आठ साल बाद किसी ईरानी राष्ट्रपति की भारत यात्रा है। दोनों नेताओं की मुलाकात ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है।इससे पहले 31 अगस्त को SCO शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और पजेशकियान की मुलाकात हुई थी। उस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों, पश्चिम एशिया की स्थिति और क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता के लिए बातचीत और कूटनीति की जरूरत पर चर्चा की थी।

BRICS Summit: 30 हजार जवानों की तैनाती, एयर डिफेंस भी मजबूत
BRICS शिखर सम्मेलन को देखते हुए दिल्ली में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के करीब 30 हजार जवान तैनात किए गए हैं। एयर डिफेंस के लिए आकाश मिसाइलों के साथ वायुसेना के लड़ाकू विमान भी तैनात हैं। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधिमंडलों की सुरक्षा के लिए 11 होटल और 35 सुरक्षित रूट तय किए गए हैं।सुरक्षित रूटों पर फेस रिकॉग्निशन कैमरे लगाए गए हैं। दिल्ली में गणतंत्र दिवस जैसी सख्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के लिए एंटी एयरक्राफ्ट गन, एंटी ड्रोन सिस्टम और स्नाइपर भी तैनात किए गए हैं। आयोजन स्थल भारत मंडपम और इसके आसपास के इलाकों में 500 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इनमें से कुछ कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट की पहचान भी कर सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन की तैयारियों से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है।
100 से ज्यादा NSG कमांडो समेत 30 हजार जवान
दिल्ली में पैरामिलिट्री फोर्स की 200 कंपनियों समेत करीब 30 हजार जवानों को सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया है। इसके अलावा 4800 ट्रैफिक पुलिसकर्मी शहर में यातायात व्यवस्था संभालेंगे। मेहमानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी DCP रैंक के 30 अधिकारियों को दी गई है। इनमें 10 अधिकारी भारत मंडपम की सुरक्षा संभालेंगे।सुरक्षा व्यवस्था में NSG के 100 से ज्यादा कमांडो और दिल्ली पुलिस की SWAT टीमें भी शामिल हैं। समिट से पहले NSG और SWAT ने ‘ऑपरेशन ब्रिक्स कवच’ के तहत जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम, राजघाट, भारत मंडपम और आर्मी पोलो ग्राउंड में सुरक्षा मॉक ड्रिल भी की।
BRICS Summit 2026: CRPF के 10 हजार से ज्यादा जवान स्टैंडबाय पर
CRPF के 10 हजार से ज्यादा जवानों को स्टैंडबाय पर रखा गया है। जरूरत पड़ने पर इन जवानों को तुरंत सुरक्षा व्यवस्था में लगाया जा सकेगा। इसके अलावा दिल्ली पुलिस उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और चंडीगढ़ की पुलिस से भी मदद ले रही है। सीमावर्ती इलाकों में चेकिंग और निगरानी भी बढ़ा दी गई है।दिल्ली पुलिस के पूर्व कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव के मुताबिक, समिट में आने वाले विदेशी मेहमानों से जुड़ी ज्यादातर सुरक्षा जानकारी गोपनीय रखी जाती है। उनकी क्लोज सिक्योरिटी की जिम्मेदारी उनके निजी बॉडीगार्ड संभालते हैं, जबकि बाहरी सुरक्षा घेरा दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्सेस के जिम्मे रहता है।








