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‘परमाणु ठिकानों पर हमले सही नहीं’… BRICS का अमेरिका को सख्त संदेश, नई दिल्ली घोषणा में क्या-क्या कहा?

BRICS Summit 2026: नई दिल्ली घोषणा में BRICS नेताओं ने नागरिक बुनियादी ढांचे और IAEA की निगरानी वाले शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई। हालांकि, घोषणा में किसी देश का सीधे नाम नहीं लिया गया।

भारत की मेजबानी में हो रहे BRICS शिखर सम्मेलन के बीच नई दिल्ली घोषणा में परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर बड़ा संदेश सामने आया है। BRICS नेताओं ने कहा कि सशस्त्र संघर्ष के दौरान भी परमाणु सुरक्षा और संरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। घोषणा में नागरिक बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की पूरी निगरानी में चल रहे शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों पर जानबूझकर किए गए हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई गई। हालांकि, इसमें किसी देश का नाम लेकर सीधे आरोप नहीं लगाया गया है।

आखिर BRICS ने परमाणु हमलों पर क्यों जताई चिंता?

नई दिल्ली घोषणा में कहा गया कि परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले अंतरराष्ट्रीय कानून और IAEA के संबंधित प्रस्तावों के खिलाफ हैं। नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि युद्ध या सशस्त्र संघर्ष की स्थिति में भी परमाणु सुरक्षा, संरक्षा और निगरानी व्यवस्था को बनाए रखना जरूरी है। इसका मकसद लोगों और पर्यावरण को संभावित नुकसान से बचाना है।

BRICS Summit 2026: क्या यह अमेरिका को सीधा संदेश है?

घोषणा ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष और परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बनी हुई है। इसी वजह से इसे अमेरिका और संघर्ष में शामिल अन्य पक्षों के लिए कड़ा कूटनीतिक संदेश माना जा सकता है। हालांकि, एक महत्वपूर्ण बात यह है कि नई दिल्ली घोषणा में अमेरिका का नाम लेकर कोई सीधा बयान नहीं दिया गया है। इसलिए इसे ‘अमेरिका विरोधी प्रस्ताव’ कहना सही नहीं होगा। यह संदेश व्यापक रूप से संघर्ष के दौरान परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के सिद्धांत पर केंद्रित है।

PM मोदी ने कब अपनाने की घोषणा की?

BRICS सम्मेलन के पहले दिन की बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली घोषणा को अपनाए जाने की घोषणा की। इस दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस और BRICS के अन्य नेता मौजूद रहे। भारत के लिए यह इसलिए अहम है क्योंकि पश्चिम एशिया के मुद्दे पर ईरान और UAE के बीच मतभेदों के बावजूद समूह साझा घोषणा पर सहमत हुआ।

BRICS Summit 2026: ईरान-अमेरिका विवाद का सीधे जिक्र क्यों नहीं?

घोषणा में ईरान पर अमेरिका के हमलों या खाड़ी के अरब देशों पर ईरानी हमलों का सीधा उल्लेख नहीं किया गया। यही इस घोषणा की कूटनीतिक बारीकी है। BRICS ने किसी एक पक्ष को निशाना बनाने के बजाय परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन को लेकर व्यापक सिद्धांत पर सहमति बनाई।

परमाणु खतरे पर भी BRICS की चिंता

BRICS नेताओं ने परमाणु खतरे और संघर्ष के बढ़ते जोखिम पर भी चिंता जताई। उन्होंने निरस्त्रीकरण, हथियार नियंत्रण और परमाणु अप्रसार की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत दोहराई। घोषणा में कहा गया कि इन व्यवस्थाओं की मजबूती वैश्विक स्थिरता, अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए जरूरी है।

BRICS Summit 2026: मध्य पूर्व को परमाणु हथियार मुक्त बनाने पर जोर

BRICS ने मध्य पूर्व को परमाणु हथियारों और अन्य सामूहिक विनाश के हथियारों से मुक्त क्षेत्र बनाने के प्रयासों को आगे बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया। समूह ने इस दिशा में चल रही संयुक्त राष्ट्र प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए संबंधित पक्षों से सद्भावना के साथ बातचीत में शामिल होने और रचनात्मक भूमिका निभाने की अपील की।

BRICS Summit 2026
                                              BRICS Summit 2026
BRICS का विस्तार कितना बड़ा हो चुका है?

BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से हुई थी। इसके बाद समूह का विस्तार हुआ और मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE और सऊदी अरब जैसे देश शामिल हुए। बाद में इंडोनेशिया भी समूह का हिस्सा बना। इसके अलावा कई देशों को साझेदार देश का दर्जा दिया गया है। ऐसे में BRICS अब पहले की तुलना में कहीं बड़ा और विविध समूह बन चुका है।

BRICS Summit 2026: भारत की कूटनीतिक जीत या सिर्फ साझा बयान?

नई दिल्ली घोषणा में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अलग-अलग हितों और मतभेदों वाले देशों को एक साझा भाषा पर सहमत कराया गया। परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले, परमाणु सुरक्षा और अप्रसार जैसे मुद्दों पर BRICS का संदेश ऐसे समय आया है जब दुनिया कई संघर्षों से जूझ रही है।

बड़ा सवाल यही है- क्या BRICS की यह घोषणा केवल कूटनीतिक संदेश बनकर रह जाएगी या परमाणु सुरक्षा और संघर्षों के दौरान अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन पर वास्तव में दबाव बढ़ाएगी? आने वाले दिनों में इसका असर देखना अहम होगा।

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