Brij Bhushan Sharan Singh: कैसरगंज के पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने बुधवार शाम अपने कार्यालय पर कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में CEO की नियुक्ति पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसी नियुक्ति पहले ही हो जानी चाहिए थी।
संतों का संरक्षण जरूरी, प्रशासनिक काम के लिए अलग व्यवस्था
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि संतों की भूमिका और जिम्मेदारी अपनी जगह है। संतों का संरक्षण होना चाहिए और उनके मार्गदर्शन में काम भी होना चाहिए, लेकिन वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था संभालने के लिए अलग विशेषज्ञ व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने कहा कि अकाउंट और हिसाब-किताब संभालना हर किसी के बस की बात नहीं है। ट्रस्ट के कामकाज में संतों के सम्मान और उनकी भूमिका को बनाए रखते हुए प्रशासनिक तथा वित्तीय जिम्मेदारियों के लिए अलग व्यवस्था होना जरूरी है। पूर्व सांसद ने कहा कि अगर यह व्यवस्था पहले ही लागू कर दी गई होती तो शायद कुछ ऐसी बातें सामने नहीं आतीं, जिनको लेकर बाद में सवाल उठे। उन्होंने CEO की नियुक्ति को इसी दिशा में उठाया गया कदम बताते हुए इसका स्वागत किया।

Brij Bhushan Sharan Singh: AI के इस्तेमाल पर भी जताई चिंता
बृजभूषण शरण सिंह ने उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दलों की ओर से बनाए जा रहे AI वीडियो को लेकर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि AI किस उद्देश्य से बनाया गया था, यह उन्हें नहीं पता, लेकिन जिस तरह से इसका इस्तेमाल हो रहा है, वह निश्चित तौर पर सही उद्देश्य नहीं हो सकता। उन्होंने दावा किया कि AI के जरिए किसी व्यक्ति की छवि खराब करना आसान हो गया है। उनके मुताबिक, फर्जी वीडियो बनाकर लोगों को महिलाओं के साथ दिखाने जैसे मामले भी सामने आ रहे हैं। उन्होंने AI के बढ़ते दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि तकनीक का इस्तेमाल किसी को बदनाम करने के लिए नहीं होना चाहिए।
Brij Bhushan Sharan Singh: राम मंदिर चंदे पर पहले भी दे चुके हैं बयान
बृजभूषण शरण सिंह इससे पहले राम मंदिर के चंदे से जुड़े विवाद को लेकर भी बयान दे चुके हैं। उस समय उन्होंने कहा था कि यदि वह इस मामले में ज्यादा बोलेंगे तो मुश्किल में पड़ सकते हैं। अब राम मंदिर ट्रस्ट में CEO की नियुक्ति पर उनका खुलकर समर्थन सामने आया है। उनके बयान के बाद एक बार फिर ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज होने के आसार हैं।








