Brijesh Pathak: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अयोध्या, काशी और मथुरा को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। अयोध्या में सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के सवालों पर यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने पलटवार किया है। पाठक ने अयोध्या और काशी के विकास का मुद्दा उठाने के साथ अखिलेश यादव से मथुरा को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट करने को कहा।
‘राम का नहीं तो कृष्ण का नहीं’
ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा, ‘जो राम का नहीं हुआ वो कृष्ण का नहीं हो सकता… जो कृष्ण का नहीं हो सकता वो किसी का नहीं हो सकता।’ पाठक ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान तुष्टीकरण की राजनीति चरम पर थी और अयोध्या-काशी के विकास पर पर्याप्त काम नहीं हुआ। उन्होंने अखिलेश यादव से सवाल किया कि मथुरा को लेकर सपा का रुख क्या है।
Brijesh Pathak: अयोध्या के विकास पर सपा से सवाल
विवाद की एक कड़ी अयोध्या में चल रहे सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने के अभियान से जुड़ी है। अखिलेश यादव इन कार्रवाइयों को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। इसके जवाब में पाठक ने योगी सरकार के विकास कार्यों का हवाला दिया। उन्होंने 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के चौड़ीकरण समेत अयोध्या में चल रही परियोजनाओं का जिक्र किया और पिछली सपा सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए।
मथुरा क्यों बना सियासी मुद्दा?
अयोध्या और काशी के बाद मथुरा भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक मुद्दे के रूप में सामने आता रहा है। सितंबर की शुरुआत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मथुरा-वृंदावन में अयोध्या और काशी की तर्ज पर भव्य विकास और मंदिर परिसर से जुड़ी योजनाओं की बात कही थी। इसी पृष्ठभूमि में ब्रजेश पाठक का अखिलेश यादव से मथुरा पर रुख स्पष्ट करने का सवाल सियासी चर्चा में आया है।
Brijesh Pathak: चुनाव आयोग पर भी पाठक का पलटवार
ब्रजेश पाठक ने सिर्फ धार्मिक स्थलों से जुड़े मुद्दों पर ही अखिलेश यादव को जवाब नहीं दिया। उन्होंने चुनाव आयोग को लेकर सपा प्रमुख की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी। पाठक ने आरोप लगाया कि चुनाव जीतने पर सपा संवैधानिक संस्थाओं को सही मानती है, जबकि हार के बाद उन्हीं संस्थाओं पर सवाल उठाती है। इस तरह अयोध्या-काशी-मथुरा से शुरू हुआ बयानबाजी का दौर चुनाव आयोग तक पहुंच गया है
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