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ब्रिटेन में 10 साल में 10 प्रधानमंत्री, भारत में 12 साल से मोदी; लोकतंत्र की दो तस्वीरें

Britain Politics vs modi:

ब्रिटेन में लोकतंत्र का तांडव!

Britain Politics vs modi: राजनीति शास्त्र में ब्रिटेन की संसद को विश्वभर की संसदों की जननी कहा जाता है। भारत की संसद भी उसी मां की बेटी है। लेकिन आज यदि गौर करें तो ब्रिटेन में 10 वर्षों के भीतर इसी संसद ने 10 प्रधानमंत्रियो को बदल दिया है। जबकि भारत में तीन आम चुनाव 2014, 2019 और 2024 से एक ही प्रधानमंत्री देश का नेतृत्व कर रहा है। प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में इस पद पर बने रहने का 12 वर्षों का इतिहास बनाया है। आत्मसंतोष के लिए प्रधनमंत्री मोदी देश में अपना प्रधानमंत्री पद पर रहने का नेहरू से ज्यादा समय का रिकार्ड मानते हैं, लेकिन प्रधाममंत्री पद पर रहने के समय की गणना करें, तो लगता है प्रधानमंत्री मोदी वर्षों के हिसाब से अभी पीछे हैं। भले ही यह मुगालता हो कि मैं ही चुनाव द्वारा लंबे समय तक भारत का प्रधानमंत्री हूं, तो वह निराधार ही है। विश्व इतिहास इस तरह से गणना नहीं करेगा।

चुनाव के लिए माहौल की जरूरत थी!

देश आजाद हुआ 1947 में तब ऐसी प्रक्रिया चुनाव की नहीं बनी थी, सिर्फ वे ही लोग राजनीति के दृष्य-पटल पर थे, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अपना अमूल्य जीवन गंवाया। अपनी जायदाद तक को भी आजादी की लड़ाई के लिए समर्पित कर दी थी, वर्षों जेलो में रहे। उनमें सरदार पटेल भी प्रमुख थे, लेकिन सरदार पटेल ने स्वयं ही प्रधानमंत्री बनने की इच्छा नहीं जताई, वह नेहरू को ही आगे रखना चाहते थे, क्योंकि उम्र में बड़े होने के नाते, वह प्रधानमंत्री पद को ज्यादा समय नहीं दे पायेंगे, उनके सामने उम्र की सीमा थी। इसलिए सर्वसम्मति से नेहरू ही प्रधानमंत्री पद के लिए उपयुक्त माने गये। उनका संधर्षो का अनुभव था। और कैसे एक फटेहाल देश को विकास का रास्ता दिया जा सकता है। उसकी पूरी योजना थी। इसी योजना में पंचवर्षीय योजना का बड़ा महत्व रहा, यह नेहरू की ही कल्पना थी। इसी कल्पना ने देश के विकास की बुनियाद रखी। हर क्षेत्र में इन्हीं पंचवर्षीय योजनाओं ने विकास की सीढी का काम किया। हां, सभी यह भूल जाते हैं कि नेहरू का देश को बनाने का जो आधार था, उस पर दृष्टि दौड़ायें, तो बहुत कुछ आज भारत की छवि विश्व में बनी, वह नेहरू शिल्पी की ही देन है। इसलिय कौन ज्यादा समय तक पद पर रहा, वह मायने नहीं रखता, मायने यह रखता है कि उस व्यक्ति के कार्यकाल की क्या-क्या देन है। अच्छा कल्पनाशील और उठाये गये कार्यें को संपन्न करना ही सफलता का पैमाना है। देश आज सफलता की ओर बढ़ रहा है, तो वह आधार नेहरू के द्वारा बुनियाद खोदने का ही प्रयास देखा जा सकता है।

Britain Politics vs modi: भारत में विविधता में एकता है!

दूसरी ओर भारत के संविधान की, जो बुनियाद है, उसका ही परिणाम है कि भारत विविधा में एक ऐसा देश है, जो पूरी तरह से एकजुट है। संविधान हर व्यक्ति को अपनी मर्यादाओं मे रहने की सीख देता है। इसमें चाहे न्यायपालिका हो, कार्यपालिका हो, संसद हो या मीडिया हो। कार्यपालिका न संसद पर हाबी हो सकती है और न ही न्यायपालिका को धमका सकती है। संविधान ने हर अनुच्छेद में सबकी अपनी-अपनी भूमिका के लिए जगह बनाई है।

Britain Politics vs modi: अनिश्चिता के दौर में ब्रिटेन!

दूसरी तरफ हम ब्रिटेन के संविधान पर नजर दौड़ायें, तो वह अलिखित संविधान है, वहां परंपराओं के आधार पर नियम लागू होते हैं। तभी आज हम 10 वर्षों में दस प्रधानमंत्री बदलने के नजारे देख रहे हैं। वहां अनिश्चितता का दौर अपने चरम सीमा पर है। उस तरह का शासन विकास को भी अवरुद्ध कर सकता है।

-भगवती प्रसाद डोभाल

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