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देश का पहला बुलेट ट्रेन गलियारा अंतिम चरण में, भविष्य की परियोजनाओं का बनेगा आधार

Bullet Train: देश में चलेगी बुलेट ट्रेन, कार्य अंतिम दौर में

Bullet Train: भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। मुंबई-अहमदाबाद उच्च गति रेल गलियारा देश में आधुनिक रेल परिवहन की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। केंद्र सरकार का कहना है कि यह परियोजना केवल दो शहरों के बीच तेज यात्रा का माध्यम नहीं होगी, बल्कि भविष्य में बनने वाले सभी उच्च गति रेल गलियारों के लिए एक मानकीकृत मॉडल के रूप में भी काम करेगी। इससे देशभर में प्रस्तावित नई परियोजनाओं के निर्माण, संचालन और रखरखाव में एकरूपता लाने में मदद मिलेगी।

मुंबई से अहमदाबाद का सफर होगा दो घंटे से भी कम

मुंबई-अहमदाबाद उच्च गति रेल परियोजना पूरी होने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय घटकर लगभग एक घंटा अट्ठावन मिनट रह जाएगा। इस रेल की अधिकतम डिजाइन गति तीन सौ पचास किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है, जबकि संचालन के दौरान इसकी गति तीन सौ बीस किलोमीटर प्रति घंटा होगी। परियोजना में अत्याधुनिक डिब्बों, आधुनिक संकेत प्रणाली और उन्नत ट्रेन नियंत्रण तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे यात्रा अधिक सुरक्षित और आरामदायक होगी।

Bullet Train: बारह स्टेशन और दो हजार सत्ताईस में सेवा शुरू होने की उम्मीद

करीब पांच सौ आठ किलोमीटर लंबे इस उच्च गति रेल गलियारे में कुल बारह स्टेशन प्रस्तावित हैं। सरकार के अनुसार पहली बुलेट ट्रेन सेवा अगस्त दो हजार सत्ताईस में शुरू होने की संभावना है। शुरुआती चरण में इसका संचालन सूरत और वापी के बीच किया जाएगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से पूरे मार्ग पर सेवाएं शुरू की जाएंगी।

भविष्य की सभी परियोजनाओं के लिए बनेगा मानक मॉडल

सरकार का कहना है कि इस परियोजना से प्राप्त तकनीकी अनुभव का उपयोग देश में बनने वाले अन्य उच्च गति रेल गलियारों में किया जाएगा। भविष्य की परियोजनाओं में समान इंजीनियरिंग डिजाइन, निर्माण तकनीक और संचालन प्रणाली अपनाई जाएगी। इससे निर्माण कार्य में तेजी आएगी, गुणवत्ता बेहतर होगी और परियोजनाओं की लागत नियंत्रित रखने में भी सहायता मिलेगी।

Bullet Train: चार हजार किलोमीटर के नए रेल नेटवर्क की तैयारी

सरकार ने भविष्य के लिए लगभग चार हजार किलोमीटर लंबे सात नए उच्च गति रेल गलियारों की पहचान की है। इन परियोजनाओं में लगभग सोलह लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना जताई गई है। एक समान डिजाइन, उपकरण और रखरखाव व्यवस्था के कारण कर्मचारियों के प्रशिक्षण, स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता और खरीद प्रक्रिया भी आसान होगी। हालांकि प्रत्येक क्षेत्र की भौगोलिक और मिट्टी की स्थिति के अनुसार नींव तैयार की जाएगी, जबकि पिलर, पुल, रेल मार्ग, स्टेशन, विद्युतीकरण और संकेत प्रणाली जैसे प्रमुख ढांचे एक समान मानकों के अनुरूप विकसित किए जाएंगे। इससे भारत में उच्च गति रेल नेटवर्क के विस्तार को नई गति मिलने की उम्मीद है।