China news: चीन ने जलविद्युत क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया के सबसे ऊंचे बांध से बिजली उत्पादन शुरू कर दिया है। दक्षिण-पश्चिम चीन के सिचुआन प्रांत में बने शुआंगजियांगकोउ हाइड्रोपावर स्टेशन की पहली जनरेटिंग यूनिट को पावर ग्रिड से जोड़ दिया गया है। इसके साथ ही इस मेगा प्रोजेक्ट से बिजली उत्पादन की शुरुआत हो गई है। वहीं, चीन के यारलुंग त्सांगपो नदी पर बन रहे दूसरे मेगा डैम प्रोजेक्ट को लेकर भारत और बांग्लादेश की चिंताएं भी लगातार बढ़ रही हैं।
दुनिया का सबसे ऊंचा हाइड्रोपावर स्टेशन
शुआंगजियांगकोउ हाइड्रोपावर स्टेशन 315 मीटर ऊंचा है, जो इसे दुनिया का सबसे ऊंचा बांध बनाता है। इसकी कुल स्थापित क्षमता 20 लाख किलोवॉट (2 गीगावॉट) है। पूरी तरह चालू होने के बाद यह हर साल करीब 7.7 अरब यूनिट बिजली पैदा करेगा। इस परियोजना का उद्देश्य सिर्फ बिजली उत्पादन नहीं है, बल्कि यांग्त्जे नदी के ऊपरी हिस्से में जल प्रवाह को नियंत्रित करना और बाढ़ के खतरे को कम करना भी है।
China news: निर्माण में लगा रिकॉर्ड स्तर का संसाधन
इस विशाल परियोजना के निर्माण में 4.6 करोड़ क्यूबिक मीटर से अधिक निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। चीन का दावा है कि यह मात्रा इतनी अधिक है कि इससे पृथ्वी की भूमध्य रेखा के चारों ओर करीब एक मीटर ऊंची दीवार बनाई जा सकती है। हाइड्रोपावर स्टेशन के शुरू होने से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा और कोयले जैसे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
China news: यारलुंग त्सांगपो पर बन रहा मेगा डैम
इसी बीच चीन यारलुंग त्सांगपो नदी पर भी एक विशाल मेगा डैम परियोजना बना रहा है, जिसे मोटुओ (मेडोग) मेगा डैम प्रोजेक्ट के नाम से जाना जाता है। इस परियोजना का निर्माण जुलाई 2025 में शुरू हुआ था और इसकी अनुमानित लागत 168 अरब डॉलर बताई जा रही है।
भारत और बांग्लादेश क्यों हैं चिंतित?
विशेषज्ञों का मानना है कि यारलुंग त्सांगपो नदी पर बनने वाला मेगा डैम चीन को नदी के जल प्रवाह पर अधिक नियंत्रण दे सकता है। यही वजह है कि भारत और बांग्लादेश में इस परियोजना को लेकर चिंता जताई जा रही है। भारत में कई विशेषज्ञ इसे संभावित “वॉटर बम” के रूप में भी देख रहे हैं। यारलुंग त्सांगपो नदी तिब्बत से निकलकर अरुणाचल प्रदेश और असम में ब्रह्मपुत्र के नाम से बहती है। इसके बाद यही नदी बांग्लादेश में प्रवेश कर जमुना कहलाती है। ऐसे में नदी के ऊपरी हिस्से में बनने वाले बड़े बांध का असर निचले इलाकों में रहने वाले करोड़ों लोगों पर पड़ सकता है।
क्या होगा आगे?
China news: फिलहाल चीन का कहना है कि यह परियोजना स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और जल प्रबंधन को मजबूत करने के लिए बनाई जा रही है। हालांकि, सीमा पार बहने वाली नदियों पर बनने वाले बड़े बांधों को लेकर भारत और बांग्लादेश की चिंताएं बनी हुई हैं। आने वाले समय में इस परियोजना का क्षेत्रीय जल सुरक्षा और कूटनीतिक संबंधों पर क्या असर पड़ेगा, इस पर सभी की नजर रहेगी।
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